सम्राट चौधरी ने बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। उनके साथ JDU के विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बिहार के इतिहास में 2022 के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब कैबिनेट इतना छोटा है। सम्राट ने गृह समेत 29 विभाग अपने पास रखे हैं। विजय चौधरी को 10 और बिजेंद्र यादव को 8 विभाग मिले हैं। 5 मई के बाद मंत्रिमंडल विस्तार होगा। इसके बाद ये विभाग बाकी मंत्रियों में बंटेंगे। तब तक तीनों इनकी जिम्मेदारी संभालेंगे। आखिर सम्राट सरकार का कैबिनेट इतना छोटा क्यों? बाकी मंत्रियों को शपथ क्यों नहीं दिलाई गई? जानिए, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में…। 3 कारणों से फंसी भाजपा के मंत्रियों की लिस्ट 1- नए चेहरों को शामिल करने की तैयारी कैबिनेट के इतना छोटा होने में भाजपा का रोल ज्यादा है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के मंत्रियों की लिस्ट अब तक फाइनल नहीं हो पाई है। इसका कारण पार्टी की अंदरुनी नाराजगी मानी जा रही है। बीजेपी मंत्रियों की लिस्ट में कुछ नए चेहरे को भी शामिल कर सकती है, जिनका फैसला अभी नहीं हो पाया है। माना जा रहा है कि सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल में अपनी टीम तैयार करना चाहते हैं। इसकी लिस्ट उन्होंने आलाकमान को दी है, लेकिन अंतिम फैसला अभी नहीं आया है। 2- बंगाल चुनाव में भाजपा नेतृत्व व्यस्त बिहार के पड़ोसी राज्य बंगाल में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। यहां भाजपा ने अपने शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय दिग्गजों की पूरी टीम चुनाव प्रचार में उतार रखी है। दो चरणों में वोटिंग होगी। मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026 को होना है। गिनती 4 मई को होगी। पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई बड़े भाजपा नेता बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं। कैबिनेट का हिस्सा रहे मंगल पांडेय बंगाल चुनाव प्रभारी हैं। बंगाल चुनाव परिणाम के बाद बिहार कैबिनेट का एक्सटेंशन होगा। सूत्रों की मानें तो 5 मई को बाकी अन्य मंत्री को शपथ दिलाई जाएंगी। 3- विजय सिन्हा को कैसे एडजस्ट करें, इस पर मंथन पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा के मंत्रियों की लिस्ट फाइनल नहीं हो सकी है। बिहार में बदले समीकरण में सीनियर को फिट करना है। काफी माथापच्ची बाकी है। सबसे बड़ी बाधा विजय सिन्हा को लेकर है। विजय सिन्हा नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम थे। उनके साथ सम्राट चौधरी भी उपमुख्यमंत्री थे। अब सम्राट का प्रमोशन हो गया है। वह सीएम की कुर्सी पर बैठ गए हैं। डिप्टी सीएम की कुर्सी जदयू के खाते में चली गई है। ऐसे में क्या विजय सिन्हा मंत्री बनेंगे? यह बड़ा सवाल है। इस बात की भी चर्चा है कि विजय सिन्हा को कोई और बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। भाजपा कोटे के अन्य मंत्रियों की अंतिम सूची पर अभी भी मंथन बाकी है। मंत्री पद को लेकर खींचतान है। सूत्रों के अनुसार विजय सिन्हा को एडजस्ट करने के लिए बीजेपी की लिस्ट रोकी गई है। भाजपा के कारण JDU, चिराग-मांझी के मंत्री फंसे पार्टी सूत्रों के अनुसार, जदयू के किस नेता को मंत्री बनाना है यह लिस्ट तैयार थी, लेकिन भाजपा ने उनका शपथ अटका दिया। कहा कि जदयू के नेता भी भाजपा नेताओं के साथ मंत्री पद की शपथ लेंगे। यही स्थिति चिराग पासवान की पार्टी LJP (R), जीतन राम मांझी की पार्टी HAM और उपेंद्र कुशवाहा की RLM की है। इन पार्टियों के कई नेताओं ने मंत्री बनने की तैयारी कर रखी थी। सूत्रों के अनुसार कई ने तो दिल्ली तक की सेटिंग भी लगा दी, लेकिन शपथ ग्रहण के लिए न्योता नहीं आया। नीतीश सरकार में मंत्री रहे नेताओं को डर सताता रहा कि कहीं उसे ही तो नहीं बुलावा न भेजा गया है। हालांकि, शपथ ग्रहण के बाद अब मंत्री पद की चाहत रखने वाले नेता वेट एंड वाच की स्थिति में हैं। विभागों के बंटवारे में भाजपा का दबदबा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सामान्य प्रशासन, निगरानी, निर्वाचन, कैबिनेट और गृह समेत 29 विभाग अपने पास रखे हैं। जदयू को गृह मंत्रालय नहीं दिया गया। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को 10 और बिजेंद्र प्रसाद यादव को 8 विभाग दिए गए हैं। जदयू के CM थे तो कई हाई प्रोफाइल विभाग भाजपा के पास थे। अब जब BJP के CM हैं तब भी भाजपा ने बड़े विभाग अपने पास ही रखे हैं। कौन सा विभाग किसके खाते में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी- सामान्य प्रशासन, गृह, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन, राजस्व एवं भूमि सुधार, खान एवं भूतत्व, नगर विकास एवं आवास, स्वास्थ्य, विधि, उद्योग, पथ निर्माण, कृषि, लघु जल संसाधन, श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण, युवा, रोजगार एवं कौशल विकास, पर्यटन, कला एवं संस्कृति, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन,आपदा प्रबंधन, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, खेल, सहकारिता, पर्यावरण-वन एवं जलवायु परिवर्तन, गन्ना उद्योग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण और पंचायती राज विभाग। ऐसे सभी विभाग जो किसी को आवंटित नहीं किया गया वे भी मुख्यमंत्री के पास रहेंगे। उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी- जल संसाधन, संसदीय कार्य, सूचना एवं जन-संपर्क, भवन निर्माण, अल्पसंख्यक कल्याण, शिक्षा, साइंस टेक्नोलॉजी एंड टेक्निकल एजुकेशन, ग्रामीण विकास, परिवहन और उच्च शिक्षा विभाग। उप-मुख्यमंत्री बिजेन्द्र यादव – ऊर्जा, योजना एवं विकास, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन, वित्त, वाणिज्य-कर, समाज कल्याण, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण और ग्रामीण कार्य विभाग। नई सरकार में भाजपा फुल पावर में, जदयू में नाराजगी नई सरकार में भाजपा फुल पावर में है। वहीं, पार्टी सूत्रों के अनुसार जदयू में नाराजगी है। पार्टी के नेताओं को दोहरी मार झेलनी पड़ी है। पहला- नीतीश के दिल्ली जाने का जख्म अभी भरा नहीं था कि मंत्री पद का वेटिंग ने घाव ताजा कर दिए। दूसरा- पार्टी के अंदर आक्रोश है। शीर्ष नेतृत्व के फैसले को सवालों के घेरे में देखा जा रहा है। उप-मुख्यमंत्री के चेहरे पर नाराजगी है। अब जानिए जदयू में कौन-कौन मंत्री बनेंगे जदयू सूत्रों की मानें तो पार्टी मंत्रियों की लिस्ट में बड़े बदलाव नहीं करने जा रही है। नीतीश कैबिनेट में जो नेता मंत्री थे उन्हें एक बार फिर मौका मिलेगा। पार्टी सूत्रों की माने तो 8 में से दो उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं। शेष 6 का मंत्री बनना बाकी है। फूल स्ट्रेथ वाली कैबिनेट में जदयू से 15 मंत्री शामिल किए जाएंगे। बिहार में दूसरी बार सबसे छोटे कैबिनेट का हुआ शपथ ग्रहण बिहार में यह दूसरा मौका है जब सबसे छोट मंत्रिपरिषद को शपथ दिलाई गई है। कैबिनेट सचिवालय से मिली जानकारी के मुताबिक इससे पहले 2022 में ऐसा हुआ था। 10 अगस्त 2022 को नीतीश ने सीएम पद की शपथ ली थी। उनके साथ सिर्फ तेजस्वी यादव ने उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। नीतीश भाजपा का साथ छोड़कर महागठबंधन में गए थे। 6 दिन बाद 16 अगस्त को मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया था। 31 नए मंत्रियों को सरकार में शामिल किया गया था। सम्राट चौधरी ने बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। उनके साथ JDU के विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बिहार के इतिहास में 2022 के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब कैबिनेट इतना छोटा है। सम्राट ने गृह समेत 29 विभाग अपने पास रखे हैं। विजय चौधरी को 10 और बिजेंद्र यादव को 8 विभाग मिले हैं। 5 मई के बाद मंत्रिमंडल विस्तार होगा। इसके बाद ये विभाग बाकी मंत्रियों में बंटेंगे। तब तक तीनों इनकी जिम्मेदारी संभालेंगे। आखिर सम्राट सरकार का कैबिनेट इतना छोटा क्यों? बाकी मंत्रियों को शपथ क्यों नहीं दिलाई गई? जानिए, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में…। 3 कारणों से फंसी भाजपा के मंत्रियों की लिस्ट 1- नए चेहरों को शामिल करने की तैयारी कैबिनेट के इतना छोटा होने में भाजपा का रोल ज्यादा है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के मंत्रियों की लिस्ट अब तक फाइनल नहीं हो पाई है। इसका कारण पार्टी की अंदरुनी नाराजगी मानी जा रही है। बीजेपी मंत्रियों की लिस्ट में कुछ नए चेहरे को भी शामिल कर सकती है, जिनका फैसला अभी नहीं हो पाया है। माना जा रहा है कि सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल में अपनी टीम तैयार करना चाहते हैं। इसकी लिस्ट उन्होंने आलाकमान को दी है, लेकिन अंतिम फैसला अभी नहीं आया है। 2- बंगाल चुनाव में भाजपा नेतृत्व व्यस्त बिहार के पड़ोसी राज्य बंगाल में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। यहां भाजपा ने अपने शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय दिग्गजों की पूरी टीम चुनाव प्रचार में उतार रखी है। दो चरणों में वोटिंग होगी। मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026 को होना है। गिनती 4 मई को होगी। पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई बड़े भाजपा नेता बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं। कैबिनेट का हिस्सा रहे मंगल पांडेय बंगाल चुनाव प्रभारी हैं। बंगाल चुनाव परिणाम के बाद बिहार कैबिनेट का एक्सटेंशन होगा। सूत्रों की मानें तो 5 मई को बाकी अन्य मंत्री को शपथ दिलाई जाएंगी। 3- विजय सिन्हा को कैसे एडजस्ट करें, इस पर मंथन पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा के मंत्रियों की लिस्ट फाइनल नहीं हो सकी है। बिहार में बदले समीकरण में सीनियर को फिट करना है। काफी माथापच्ची बाकी है। सबसे बड़ी बाधा विजय सिन्हा को लेकर है। विजय सिन्हा नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम थे। उनके साथ सम्राट चौधरी भी उपमुख्यमंत्री थे। अब सम्राट का प्रमोशन हो गया है। वह सीएम की कुर्सी पर बैठ गए हैं। डिप्टी सीएम की कुर्सी जदयू के खाते में चली गई है। ऐसे में क्या विजय सिन्हा मंत्री बनेंगे? यह बड़ा सवाल है। इस बात की भी चर्चा है कि विजय सिन्हा को कोई और बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। भाजपा कोटे के अन्य मंत्रियों की अंतिम सूची पर अभी भी मंथन बाकी है। मंत्री पद को लेकर खींचतान है। सूत्रों के अनुसार विजय सिन्हा को एडजस्ट करने के लिए बीजेपी की लिस्ट रोकी गई है। भाजपा के कारण JDU, चिराग-मांझी के मंत्री फंसे पार्टी सूत्रों के अनुसार, जदयू के किस नेता को मंत्री बनाना है यह लिस्ट तैयार थी, लेकिन भाजपा ने उनका शपथ अटका दिया। कहा कि जदयू के नेता भी भाजपा नेताओं के साथ मंत्री पद की शपथ लेंगे। यही स्थिति चिराग पासवान की पार्टी LJP (R), जीतन राम मांझी की पार्टी HAM और उपेंद्र कुशवाहा की RLM की है। इन पार्टियों के कई नेताओं ने मंत्री बनने की तैयारी कर रखी थी। सूत्रों के अनुसार कई ने तो दिल्ली तक की सेटिंग भी लगा दी, लेकिन शपथ ग्रहण के लिए न्योता नहीं आया। नीतीश सरकार में मंत्री रहे नेताओं को डर सताता रहा कि कहीं उसे ही तो नहीं बुलावा न भेजा गया है। हालांकि, शपथ ग्रहण के बाद अब मंत्री पद की चाहत रखने वाले नेता वेट एंड वाच की स्थिति में हैं। विभागों के बंटवारे में भाजपा का दबदबा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सामान्य प्रशासन, निगरानी, निर्वाचन, कैबिनेट और गृह समेत 29 विभाग अपने पास रखे हैं। जदयू को गृह मंत्रालय नहीं दिया गया। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को 10 और बिजेंद्र प्रसाद यादव को 8 विभाग दिए गए हैं। जदयू के CM थे तो कई हाई प्रोफाइल विभाग भाजपा के पास थे। अब जब BJP के CM हैं तब भी भाजपा ने बड़े विभाग अपने पास ही रखे हैं। कौन सा विभाग किसके खाते में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी- सामान्य प्रशासन, गृह, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन, राजस्व एवं भूमि सुधार, खान एवं भूतत्व, नगर विकास एवं आवास, स्वास्थ्य, विधि, उद्योग, पथ निर्माण, कृषि, लघु जल संसाधन, श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण, युवा, रोजगार एवं कौशल विकास, पर्यटन, कला एवं संस्कृति, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन,आपदा प्रबंधन, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, खेल, सहकारिता, पर्यावरण-वन एवं जलवायु परिवर्तन, गन्ना उद्योग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण और पंचायती राज विभाग। ऐसे सभी विभाग जो किसी को आवंटित नहीं किया गया वे भी मुख्यमंत्री के पास रहेंगे। उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी- जल संसाधन, संसदीय कार्य, सूचना एवं जन-संपर्क, भवन निर्माण, अल्पसंख्यक कल्याण, शिक्षा, साइंस टेक्नोलॉजी एंड टेक्निकल एजुकेशन, ग्रामीण विकास, परिवहन और उच्च शिक्षा विभाग। उप-मुख्यमंत्री बिजेन्द्र यादव – ऊर्जा, योजना एवं विकास, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन, वित्त, वाणिज्य-कर, समाज कल्याण, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण और ग्रामीण कार्य विभाग। नई सरकार में भाजपा फुल पावर में, जदयू में नाराजगी नई सरकार में भाजपा फुल पावर में है। वहीं, पार्टी सूत्रों के अनुसार जदयू में नाराजगी है। पार्टी के नेताओं को दोहरी मार झेलनी पड़ी है। पहला- नीतीश के दिल्ली जाने का जख्म अभी भरा नहीं था कि मंत्री पद का वेटिंग ने घाव ताजा कर दिए। दूसरा- पार्टी के अंदर आक्रोश है। शीर्ष नेतृत्व के फैसले को सवालों के घेरे में देखा जा रहा है। उप-मुख्यमंत्री के चेहरे पर नाराजगी है। अब जानिए जदयू में कौन-कौन मंत्री बनेंगे जदयू सूत्रों की मानें तो पार्टी मंत्रियों की लिस्ट में बड़े बदलाव नहीं करने जा रही है। नीतीश कैबिनेट में जो नेता मंत्री थे उन्हें एक बार फिर मौका मिलेगा। पार्टी सूत्रों की माने तो 8 में से दो उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं। शेष 6 का मंत्री बनना बाकी है। फूल स्ट्रेथ वाली कैबिनेट में जदयू से 15 मंत्री शामिल किए जाएंगे। बिहार में दूसरी बार सबसे छोटे कैबिनेट का हुआ शपथ ग्रहण बिहार में यह दूसरा मौका है जब सबसे छोट मंत्रिपरिषद को शपथ दिलाई गई है। कैबिनेट सचिवालय से मिली जानकारी के मुताबिक इससे पहले 2022 में ऐसा हुआ था। 10 अगस्त 2022 को नीतीश ने सीएम पद की शपथ ली थी। उनके साथ सिर्फ तेजस्वी यादव ने उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। नीतीश भाजपा का साथ छोड़कर महागठबंधन में गए थे। 6 दिन बाद 16 अगस्त को मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया था। 31 नए मंत्रियों को सरकार में शामिल किया गया था।


