सीहोर के सात गांवों में गहराया जल संकट:हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद 14 साल से जमोनिया तालाब का पानी नहीं छोड़ा गया

सीहोर के सात गांवों में गहराया जल संकट:हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद 14 साल से जमोनिया तालाब का पानी नहीं छोड़ा गया

सीहोर के जमोनिया तालाब से पानी न छोड़े जाने के कारण आसपास के सात गांवों में भीषण जल संकट गहरा गया है। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि तालाब बनने के बाद पानी की समस्या दूर होगी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें पानी नहीं मिल रहा है। वर्तमान में क्षेत्र में भूमिगत जलस्तर काफी नीचे चला गया है और कई जल स्रोत सूख गए हैं। इसके चलते बड़ी आबादी को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अधिक क्षमता वाले जमोनिया तालाब के समीपवर्ती गांव भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। मुंगावली गांव के किसान एचपी मल्होत्रा पिछले 14 वर्षों से इन सात गांवों के लिए पानी की कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 तक जमोनिया, मुंगावली, दीपड़ा, मुहाली, करंजखेड़ा और मगरखेड़ा गांवों को पेयजल और निस्तार के लिए तालाब से पानी मिलता था, लेकिन उसके बाद इसे बंद कर दिया गया। हैंडपंप और बोरिंग सूख जाते हैं
पानी बंद होने के कारण गर्मियों में इन गांवों का भूजलस्तर काफी नीचे गिर जाता है, जिससे हैंडपंप और बोरिंग सूख जाते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी समस्या रखी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद, वर्ष 2012 में किसान एचपी मल्होत्रा ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पानी छोड़े जाने की मांग की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि तालाब का निर्माण ग्रामीणों और किसानों के लिए किया गया था, लेकिन उन्हें ही इसका लाभ नहीं मिल रहा है। याचिकाकर्ता किसान एचपी मल्होत्रा का आरोप है कि जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। उनके अनुसार, स्टॉपडेम के लिए तालाब से एक बार भी पानी नहीं छोड़ा गया है। मल्होत्रा का कहना है कि यदि साल में दो बार पानी छोड़ा जाए, तो हैंडपंप और बोरिंग रिचार्ज हो सकते हैं, जिससे गर्मियों में इन गांवों में जल संकट की स्थिति इतनी गंभीर नहीं होगी। इस संबंध में जल संसाधन विभाग के एसडीओ राहुल बामनिया ने बताया कि पानी छोड़ने का निर्णय कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र में आता है, क्योंकि वे जल समिति के प्रमुख हैं। आदेश के बाद भी नहीं मिला पानी
वर्ष 2015 में जबलपुर हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए जिला प्रशासन सीहोर को 7 गांव के लिए पानी संरक्षित करने का आदेश दिया। इनके बाद जिला स्तरीय जल उपयोगिता समिति की बैठक में तत्कालीन कलेक्टर सुदाम खाड़े ने कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग सीहोर को निर्देश दिए थे कि तालाब से 0.46 मिली घन मीटर पानी गांवों के लिए पेयजल और निस्तार के लिए सुरक्षित रख कर छोड़ा जाए।

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