‘अधिकारी बनना चाहता था, NIA ने आरोपी बना दिया’:16 साल बाद बेगुनाह साबित हुए इंदौर के राजेंद्र चौधरी, बोले- PSC प्री फर्स्ट एटेम्पट में क्लियर की

‘अधिकारी बनना चाहता था, NIA ने आरोपी बना दिया’:16 साल बाद बेगुनाह साबित हुए इंदौर के राजेंद्र चौधरी, बोले- PSC प्री फर्स्ट एटेम्पट में क्लियर की

मेरा बचपन यहीं मालवा में गुजरा और पूरी शिक्षा भी इंदौर और देपालपुर में ही हुई। मैंने बीकॉम करने के साथ ही पीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। पीएससी -प्री फर्स्ट एटेम्पट में क्लियर करने के बाद मैंस और इंटरव्यू की तैयारी शुरू कर दी थी। सपना था कि अधिकारी बनकर समाज सेवा करूंगा। नागदा के पास पिरलई गांव में रामायण का पाठ कर रहा था तभी NIA ने चारों तरफ से घेरकर गिरफ्तार कर लिया। अधिकारी तो न बन सका, आरोपी जरूर बना दिया गया। 8 सितंबर 2006 को मालेगांव बम ब्लास्ट केस में बुधवार को बरी हुए राजेंद्र चौधरी ने अपनी आपबीती बताई। NIA द्वारा दिसंबर 2012 में गिरफ्तार किए गए राजेंद्र चौधरी के ऊपर मालेगांव ब्लास्ट के साथ ही समझौता एक्सप्रेस और हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए ब्लास्ट में शामिल होने के आरोप लगे थे। राजेंद्र को कोर्ट ने 16 अप्रैल 2018 को हैदराबाद मक्का मस्जिद ब्लास्ट, 20 मई 2019 को समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट और अब मालेगांव ब्लास्ट से बरी कर दिया है। राजेंद्र चौधरी इंदौर से 42 किमी दूर देपालपुर में धाकड़ सेरी में रह रहे हैं। दैनिक भास्कर ने राजेंद्र चौधरी और उनके करीबियों से बात की। राजेंद्र ने बीते 16 साल की पूरी कहानी सुनाई। राजेंद्र के करीबियों ने बताया कि राजेंद्र जम्मू-कश्मीर में रहे। गिरफ्तार होने के बाद उन्हें कस्टडी में बुरी तरह प्रताड़ित किया गया और उन पर गलत गवाही देने का दबाव बनाया गया। कोर्ट ने हमारे पक्ष में दिया फैसला राजेंद्र चौधरी ने कहा कि मुंबई हाई कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला दिया है। यह सराहनीय फैसला है। हमें शुरुआत से ही भारतीय न्याय व्यवस्था और कानून पर पूरा विश्वास था और आज उस विश्वास और आस्था की जीत हुई है। चौधरी ने बताया कि उनका बचपन देपालपुर में गुजरा और पूरी शिक्षा भी यहीं हुई। बीकॉम किया। इसके बाद PSC की तैयारी कर रहा था। PSC प्री क्लीयर भी हो गई थी, लेकिन उसके बाद फिर यह सब केस हो गए। रामायण का पाठ कर रहे थे, NIA उठा ले गई राजेंद्र चौधरी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम दर्दनाक नहीं है। उनके करीबियों ने बताया कि 15 दिसंबर 2012 को राजेंद्र को पिपलोदा बागला गांव से देर रात पकड़ा था। जिस समय पुलिस ने राजेंद्र को गिरफ्तार किया, उस समय वह समंदर दास बनकर रह रहे थे। राजेंद्र को पिपलोदा बागला गांव से गिरफ्तार किया गया था, उस वक्त वह रामायण का पाठ कर रहे थे। NIA ने राजेंद्र पर मालेगांव ब्लास्ट 2006, समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट और हैदराबाद मस्जिद ब्लास्ट में शामिल होने के आरोप लगाए। 15 दिसंबर को उठाया गया। 15 और 16 दिसंबर को शनिवार-रविवार था। राजेंद्र चौधरी को गिरफ्तार करने के बाद NIA उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लेकर हरियाणा गई थी। 17 दिसंबर 2012 को उन्हें पंचकूला की विशेष एनआईए अदालत में पहली बार पेश किया गया था, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए एनआईए की हिरासत में भेजा गया था। फरार चल रहे थे, 2 साल जम्मू में रहे राजेंद्र के एक परिचित ने बताया कि राजेंद्र फरार चल रहे थे तभी उनके गिरफ्तार होने की सूचना हमारे पास आई। उन्हें जब मस्जिद ब्लास्ट का आरोपी बनाकर हैदराबाद जेल ले जाया गया था तब हैदराबाद को छावनी बना दिया गया था, ताकि कोई राजेंद्र पर हमला न करे। राजेंद्र को जेल में काफी टॉर्चर किया जाता था। फरारी के दौरान राजेंद्र ने करीब 2 साल जम्मू-कश्मीर में बिताए। राजेंद्र सबसे पहले उज्जैन के मुजीब लाला नाम के गुंडे की हत्या के आरोप में बरी हुए थे। राजेंद्र को इस केस से 29 जनवरी 2014 को उज्जैन की स्थानीय अदालत (अतिरिक्त सत्र न्यायालय) ने बरी किया था। 2002-2003 में हुए इस हत्याकांड में आरोपी बनाए जाने के बाद राजेंद्र अपना नाम बदलकर समंदर सिंह के नाम से रह रहे थे। चुनाव लड़ने पर राजेंद्र कहते हैं- हम भविष्य के भविष्य वक्ता तो हैं नहीं, देखेंगे जैसा भी समाज चाहेगा। हमारे जो कार्यकर्ता बंधु चाहेंगे, वह समय के अनुसार निर्णय लेंगे। अभी किसी पार्टी से ऑफर नहीं है, लेकिन आगे देखते हैं क्या होता है। यातनाएं दीं ताकि मानसिक संतुलन बिगड़ जाए राजेंद्र के करीबियों ने बताया कि राजेंद्र को लंबे समय तक अंधेरी कोठरी में अकेले रखा जाता था ताकि उनका मानसिक संतुलन बिगड़ जाए। लगातार धमकियां दी जाती थीं कि उनके परिवार को भी इस मामले में फंसा दिया जाएगा। कस्टडी के दौरान उन्हें सोने नहीं दिया जाता था और घंटों तक एक ही स्थिति में खड़े रहने या बैठने पर मजबूर किया जाता था। उनसे जबरन कोरे कागजों और पहले से लिखे बयानों पर हस्ताक्षर करवाने के लिए शारीरिक बल का प्रयोग किया गया। राजेंद्र से जबरदस्ती आरोप स्वीकारने के लिए उसके हाथ-पैर पर इतना मारते थे कि वह सुन्न हो जाएं। इसके बाद बिजली के झटके दिए जाते थे। ये खबर भी पढ़ें… कर्नल की कनपटी पर बंदूक रखकर बयान लिए’ ‘मालेगांव ब्लास्ट मामले में हमें झूठे नाम से गैरकानूनी तरीके से अरेस्ट किया है। इसे तत्कालीन एटीएस के अधिकारियों ने भी दोहराया कि उन पर प्रेशर बनाया था, केस में कुछ हिंदुओं को गलत तरीके से फंसाया जाए। एविडेंस फेब्रिकेट किए गए। गवाहों और ऑन ड्यूटी कर्नल ने कहा कि कनपटी पर बंदूक रखकर उनसे स्टेटमेंट लिखवाए गए। जो कांग्रेस का षड्यंत्र था, वो उजागर हो चुका है।’पूरी खबर पढ़ें

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