दरभंगा में रविवार को जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। बजरंगबली मंदिर के नाम से दर्ज जमीन को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते ईंट-पत्थर चलने लगे। इस झड़प में दोनों पक्षों के करीब आधा दर्जन लोग घायल हो गए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना बहेड़ी थाना क्षेत्र स्थित शंकर रोहार बिठौली चौक कीहै। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे जानकारी के अनुसार बबलू राय उक्त जमीन पर व्यावसायिक भवन का निर्माण करा रहे थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष ने जमीन को मंदिर की संपत्ति बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। बबलू राय का कहना है कि जमीन 1975 से उनके परिवार के कब्जे में है। बंटवारे में उन्हें मिली थी। परिवार के ही एक सदस्य ने गलत तरीके से जमीन मंदिर के नाम दर्ज करा दी। वहीं, मंदिर समिति के अध्यक्ष कमलेश मंडल और सचिव पंकज कुमार मंडल का दावा है कि वर्ष 2005 में जमीन विधिवत रूप से मंदिर के नाम रजिस्ट्री की गई थी, इसके बावजूद जबरन निर्माण कराया जा रहा है। प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले भी अंचल कार्यालय और थाना में शिकायत देकर निर्माण रोकने की मांग की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे मामला बढ़ गया। गड़बड़ी पर रजिस्ट्री रद्द होगी प्रभारी सीओ सह आरओ राजीव कुमार ने बताया कि मामला डीएम स्तर तक पहुंच गया है और जांच के आदेश दिए गए हैं। गड़बड़ी मिलने पर रजिस्ट्री रद्द की जाएगी। प्रभारी थानाध्यक्ष रौशन कुमार ने कहा कि अभी तक किसी पक्ष से लिखित शिकायत नहीं मिली है, पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है। दरभंगा में रविवार को जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। बजरंगबली मंदिर के नाम से दर्ज जमीन को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते ईंट-पत्थर चलने लगे। इस झड़प में दोनों पक्षों के करीब आधा दर्जन लोग घायल हो गए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना बहेड़ी थाना क्षेत्र स्थित शंकर रोहार बिठौली चौक कीहै। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे जानकारी के अनुसार बबलू राय उक्त जमीन पर व्यावसायिक भवन का निर्माण करा रहे थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष ने जमीन को मंदिर की संपत्ति बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। बबलू राय का कहना है कि जमीन 1975 से उनके परिवार के कब्जे में है। बंटवारे में उन्हें मिली थी। परिवार के ही एक सदस्य ने गलत तरीके से जमीन मंदिर के नाम दर्ज करा दी। वहीं, मंदिर समिति के अध्यक्ष कमलेश मंडल और सचिव पंकज कुमार मंडल का दावा है कि वर्ष 2005 में जमीन विधिवत रूप से मंदिर के नाम रजिस्ट्री की गई थी, इसके बावजूद जबरन निर्माण कराया जा रहा है। प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले भी अंचल कार्यालय और थाना में शिकायत देकर निर्माण रोकने की मांग की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे मामला बढ़ गया। गड़बड़ी पर रजिस्ट्री रद्द होगी प्रभारी सीओ सह आरओ राजीव कुमार ने बताया कि मामला डीएम स्तर तक पहुंच गया है और जांच के आदेश दिए गए हैं। गड़बड़ी मिलने पर रजिस्ट्री रद्द की जाएगी। प्रभारी थानाध्यक्ष रौशन कुमार ने कहा कि अभी तक किसी पक्ष से लिखित शिकायत नहीं मिली है, पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है।


