शाजापुर के 350 वर्ष प्राचीन श्री गोवर्धन नाथ मंदिर हवेली में अक्षय तृतीया से ग्रीष्मकालीन सेवाएँ शुरू हो गई हैं। ठाकुर जी को गर्मी से बचाने के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की गई हैं, जिसके तहत उनकी दिनचर्या, श्रृंगार और भोग में बदलाव किए गए हैं। मंदिर के मुखिया निकुंज और योगेश मेहता ने बताया कि पुष्टिमार्ग परंपरा के अनुसार, अक्षय तृतीया से देशभर की लगभग 12,500 हवेलियों में ठाकुर जी की सेवा में मौसमी बदलाव किए जाते हैं। इस परंपरा में ठाकुर जी की बाल स्वरूप में सेवा की जाती है, जिसके कारण गर्मी से बचाव के लिए बच्चों की तरह विशेष ध्यान रखा जाता है। मेहता ने बताया कि अब ठाकुर जी को प्रतिदिन चंदन से स्नान कराया जाएगा। मंदिर में एसी, कूलर और ठंडे जल की व्यवस्था की गई है, साथ ही पंखे का भी उपयोग किया जा रहा है। श्रृंगार के लिए मोगरे के फूलों और कलियों की मालाओं का उपयोग शुरू हो गया है। वस्त्रों में भी बदलाव किया गया है; अब हल्के कॉटन के सफेद, पीले, नीले और गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कराए जा रहे हैं। भोग में भी ग्रीष्मकालीन व्यंजनों को शामिल किया गया है। इनमें श्रीखंड, आम, आमपाक, भीगी चने की दाल, मक्खन, सत्तू, दही, खरबूजा और पना जैसे ठंडक देने वाले पदार्थ ठाकुर जी को अर्पित किए जा रहे हैं। मंदिर में प्रतिदिन निर्धारित समय पर मंगला, श्रृंगार, राजभोग, उत्थापन और शयन आरती के दर्शन होते हैं। इन सेवाओं में वैष्णवजन भजन-कीर्तन कर सहभागी बनते हैं।


