Vijay TVK election victory 2026: “आधी रात का सन्नाटा था, जब तमिलनाडु की गलियों में एक खबर आग की तरह फैली। एक ऐसा सुपरस्टार, जिसने दशकों तक सिल्वर स्क्रीन पर राज किया, अब सत्ता के उस सिंहासन की तरफ कदम बढ़ा चुका था जहां पहुंचने का ख्वाब कई सितारों ने देखा, पर हकीकत में उसे सिर्फ एक ही शख्स जी पाया था। क्या पर्दे का ‘थलापति’ वाकई असल जिंदगी का ‘मुख्यमंत्री’ बन पाएगा? क्या 43 साल पुराना वो करिश्मा फिर से दोहराया जाएगा जो कभी एन.टी. रामाराव ने कर दिखाया था? सस्पेंस गहरा था, लेकिन जब 4 मई 2026 की सुबह ईवीएम (EVM) के पिटारे खुले, तो जो सच सामने आया उसने भारतीय राजनीति के पन्नों पर एक नया इतिहास लिख दिया।”
विजय थलापति ने जीता चुनाव (Vijay Thalapathy Become New CM of Tamil Nadu?)
कहानी शुरू होती है मार्च 1982 में, जब आंध्र प्रदेश के चहेते स्टार NT रामाराव ने अपनी ‘तेलुगु देशम पार्टी’ (TDP) का ऐलान किया था। भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध छेड़ते हुए NTR अपनी मॉडिफाइड शेवरले वैन में सवार होकर सड़कों पर निकले और महज 9 महीनों के अंदर, जनवरी 1983 में 59 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बनकर दुनिया को हैरान कर दिया। उन्होंने 294 में से 202 सीटें जीतकर कांग्रेस के दशकों पुराने किले को ढहा दिया था।
विजय ने तमिलनाडु में रचा कीर्तिमान (Vijay TVK election victory 2026)
NTR के बाद कई सितारों ने राजनीति में हाथ आजमाया- चाहे वो चिरंजीवी हों, कमल हासन हों या रजनीकांत- लेकिन किसी को भी इतनी जल्दी और ऐसी प्रचंड सफलता नहीं मिली। अब 51 साल के ‘थलापति’ विजय ने वह कर दिखाया है जो असंभव लग रहा था। 2 फरवरी 2024 को अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) बनाने के महज दो साल के भीतर विजय तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बनने की दहलीज पर आ पहुंचे हैं।
तमिलनाडु की राजनीति दशकों से DMK और AIADMK के बीच झूल रही थी। लेकिन विजय ने अपनी रैलियों और सनरूफ वैन से किए गए प्रचार के जरिए जनता को एक तीसरा विकल्प दिया। उन्होंने सत्ताधारी DMK को सीधे चुनौती दी और भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ ‘बदलाव’ की अपील की। 4 मई 2026 को आए चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया कि तमिलनाडु की जनता ने सिनेमा के पर्दे वाले नायक को अपना असली नेता मान लिया है।
बाकी सितारों का सफर रहा संघर्षपूर्ण (Vijay vs NTR political success comparison)
विजय की यह जीत इसलिए भी बड़ी है क्योंकि दक्षिण के दूसरे सितारों को राजनीति में जमने में सालों लग गए। एम.जी. रामचंद्रन (MGR) ने 1972 में पार्टी बनाई और 1977 में सत्ता पाई। चिरंजीवी की पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया, जबकि उनके भाई पवन कल्याण को उपमुख्यमंत्री पद तक पहुंचने के लिए 10 साल का लंबा इंतजार और गठबंधन करना पड़ा। वहीं कमल हासन और विजयकांत जैसे सितारों को भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
विजय न केवल सबसे कम समय में सत्ता हासिल करने वाले नेता बने हैं, बल्कि वह तमिलनाडु के अब तक के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्रियों में से भी एक होंगे। सिनेमा के पर्दे से निकलकर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने का विजय का यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बन गया है। आज तमिलनाडु की सड़कों पर जश्न का माहौल है और हवा में बस एक ही नारा गूंज रहा है- ‘थलापति’ का राज आ गया है।


