अमेरिका और ईरान के बीच स्थाई शांति को लेकर बातचीत का दौर जारी है। मध्य एशिया के कई देश और पाकिस्तान लगातार दोनों देशों को जंग रोकने के लिए मना रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि कतर, सऊदी अरब, पाकिस्तान, मिस्त्र व अन्य देश इस काम में लगे हुए हैं। वहीं, दूसरी तरफ जंग को लेकर अमेरिका में ही मतभेद उभर कर सामने आए हैं।
समझौते से बढ़ सकती है लेबनान और इराक में अस्थिरता
US सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि अगर कोई भी समझौता ईरान को पहले से ज्यादा मजबूत व ताकतवर बनाता है तो इससे इराक और लेबनान में अस्थिरता बढ़ेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य के आस-पास तनाव को और खराब कर सकता है। ग्राहम ने X पर एक पोस्ट में कहा कि अगर इस क्षेत्र में यह माना जाता है कि ईरान के साथ कोई समझौता उस शासन को जीवित रहने और समय के साथ अधिक शक्तिशाली बनने की अनुमति देता है, तो हम लेबनान और इराक में चल रहे संघर्षों में आग में घी डालने का काम करेंगे। एक ऐसा समझौता, जिसे ईरान को जीवित रहने और भविष्य में जलडमरूमध्य को नियंत्रित करने की क्षमता रखने की अनुमति देने वाला माना जाता है। वह लेबनान में हिज्बुल्लाह और इराक में शिया मिलिशिया को और भी ज्यादा शक्तिशाली बनाएगा।
उन्होंने कहा कि ऐसा समझौता होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव को और बढ़ा सकता है। ग्राहम का मानना है कि अगर ईरान को खाड़ी के तेल बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की क्षमता के साथ छोड़ दिया गया तो क्षेत्र में ताकत का संतुलन बिगड़ जाएगा। इससे इजराइल के लिए भी मुश्किलें बढ़ेंगी।
ईरान का समझौते पर सख्त रुख
दूसरी तरफ ईरान ने ट्रंप प्रशासन के दावों को सीधे खारिज कर दिया है। ईरानी अर्ध-सरकारी एजेंसी फार्स न्यूज ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण पहले की तरह ही रहेगा। तेहरान ने सिर्फ जहाजों की संख्या को युद्ध से पहले के स्तर पर लाने की बात मानी है, लेकिन इसका मतलब मुक्त आवाजाही नहीं है।
ईरान ने जंग शुरू होने के बाद से ही कहना शुरू कर दिया है कि अब जहाजों के रूट, समय और परमिट का पूरा निर्णय उसके अधिकार क्षेत्र में रहेगा। जिम्बाब्वे में ईरानी दूतावास ने इसे लेकर अमेरिका पर तंज भी कसा है।


