US-Iran War: ‘वे मजबूत और खुद्दार हैं, इसलिए पीछे नहीं हट रहे’, ईरान के साथ जारी जंग पर डोनाल्ड ट्रंप का दावा

US-Iran War: ‘वे मजबूत और खुद्दार हैं, इसलिए पीछे नहीं हट रहे’, ईरान के साथ जारी जंग पर डोनाल्ड ट्रंप का दावा

Tehran: अमेरिका और ईरान के बीच जारी खूनी संघर्ष अब अपने चौथे महीने में प्रवेश कर चुका है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर हलचल मचा दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान अभी तक युद्ध को समाप्त करने के लिए किसी समझौते पर राजी नहीं हुआ है। ट्रंप के अनुसार, इसका कारण यह है कि ईरान के नेता बहुत ‘मजबूत’ और खुद्दार हैं। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि तेहरान की मौजूदा स्थिति ऐसी है कि आखिरकार उन्हें बातचीत की मेज पर आना ही पड़ेगा।

ईरान का लगभग सफाया हो चुका है: ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने एक अमेरिकी मीडिया आउटलेट से बात करते हुए दावा किया कि महीनों की भीषण लड़ाई के बाद ईरानी नेतृत्व अपनी मौजूदा बदहाली स्वीकार नहीं कर पा रहा है। उन्होंने कहा, ‘वे गहरे संकट में हैं और उन्हें अब ऐसे फैसले लेने पड़ रहे हैं, जो उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचे थे। उनके पास अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।’ उन्होंने कहा कि ईरान को पिछले 47 बरसों से मनमानी करने की छूट मिली हुई थी, लेकिन अब वे ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं, जहां उनका लगभग सफाया हो चुका है। ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सैन्य कार्रवाई बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी।

आखिर समझौते में कहां फंसा है पेच ?

वर्तमान में वाशिंगटन और तेहरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है, जिसका मकसद एक अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनाना है। इस योजना के तहत तात्कालिक लड़ाई रोक कर परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल मुद्दों को भविष्य की चर्चा के लिए छोड़ने का प्रस्ताव है, लेकिन ईरान की मांगें इस रास्ते में बहुत बड़ा रोड़ा हैं। तेहरान चाहता है कि उसके फ्रीज किए गए अरबों डॉलर के तेल राजस्व को बहाल किया जाए, कच्चे तेल के निर्यात से प्रतिबंध हटें और उसके बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी खत्म हो। साथ ही ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, जिसे उसने बंद करके दुनिया के सबसे बड़े तेल सप्लाई रूट को ठप कर रखा है।

युद्धविराम के बीच मिसाइल और ड्रोन अटैक

भले ही दोनों देश अप्रेल में एक अस्थायी युद्धविराम पर सहमत हुए थे, लेकिन जमीन पर हालात बिल्कुल अलग हैं। शनिवार तड़के अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास गोरुक और काेशम द्वीप पर स्थित ईरानी रडार ठिकानों को हवाई हमलों में नष्ट कर दिया। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्युशनरी गार्ड्स ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। कुवैत ने दावा किया कि उसने सात मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, जबकि बहरीन में हमलों के बाद सायरन बजने लगे।

पाकिस्तान की शांति दूत के रूप में एंट्री

इन सबके बीच कूटनीतिक मोर्चे पर एक नया मोड़ आया है। पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को अचानक एक विशेष पत्र लेकर तेहरान पहुंचे। यह पत्र पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की ओर से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को भेजा गया है, जिसे युद्ध रोकने की एक बड़ी मध्यस्थता कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि यह पूरा युद्ध इस साल 28 फरवरी को तब शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक संयुक्त सैन्य अभियान का आगाज किया था।

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