जीरन क्षेत्र के पालसोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की पैथोलॉजी लैब में मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ का मामला सामने आया है। अस्पताल में जांच के नाम पर ऐसा खेल चल रहा है कि यूरिन के सैंपल टेबल पर ही रखे रह जाते हैं और बिना छुए कुछ ही मिनटों में रिपोर्ट प्रिंट होकर मिल जाती है। सोमवार को एक सजग मरीज के परिजन ने इस व्यवस्था को रंगे हाथों पकड़कर वीडियो बना लिया। विरोध बढ़ने पर घबराए कर्मचारी आनन-फानन में सैंपलों में टेस्ट स्ट्रिप्स डालने लगे। मामले की लिखित शिकायत बीएमओ से की गई है। भुक्तभोगी पालसोड़ा निवासी अनिल राठौर ने बताया कि वे पत्नी रीना राठौर की जांच कराने पहुंचे थे। लैब में दोपहर 12:48 बजे सैंपल लिया गया और महज 8 मिनट बाद 12:56 बजे फाइनल रिपोर्ट थमा दी गई। अनिल ने देखा कि उनकी पत्नी से पहले करीब 11 अन्य मरीजों के सैंपल स्टैंड पर रखे थे, जिन्हें छुए बिना ही 10 से 15 मिनट में सबकी रिपोर्ट तैयार हो रही थी। नागरिकों का कहना है कि मनगढ़ंत रिपोर्ट से गलत दवा मिलने का खतरा रहता है। बीएमओ डॉ. विजय भारती ने बताया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। विरोध देख सबूत मिटाने की कोशिश पीड़ित अनिल राठौर ने जब इस फर्जीवाड़े पर आपत्ति दर्ज कराते हुए मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया, तो लैब स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई। खुद को फंसता देख एक कर्मचारी दौड़कर आया और सबूत मिटाने के लिए जल्दबाजी में सभी सैंपलों के डिब्बों में स्ट्रिप्स डालने लगा ताकि यह दिखाया जा सके कि जांच की जा रही है।


