UP Tourism Visit My State: उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार व स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए पर्यटन विभाग ने होम-स्टे मॉडल को मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के तहत मान्यवर कांशीराम इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म मैनेजमेंट (एमकेआईटीएम) में आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शनिवार को संपन्न हुआ। 15 से 19 सितंबर तक चले इस प्रशिक्षण में प्रदेश के 14 जिलों से आए 31 होम-स्टे संचालकों को आतिथ्य सेवा, व्यवसाय प्रबंधन, डिजिटल तकनीक, मार्केटिंग और जिम्मेदार पर्यटन की बारीकियों से परिचित कराया गया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल होम-स्टे संचालकों को बेहतर सेवा देने का तरीका सिखाना नहीं रहा, बल्कि उन्हें पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने का हुनर भी देना रहा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि पर्यटकों को सिर्फ ठहरने की सुविधा देने के बजाय स्थानीय संस्कृति, खानपान, परंपराओं, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन से जोड़कर उन्हें विशिष्ट अनुभव दिया जा सकता है। पर्यटन विभाग की यह पहल प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में देखी जा रही है। इससे पहले भी विभाग ने ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के तहत होम-स्टे संचालकों के लिए आधुनिक पर्यटन कौशल और आतिथ्य सेवाओं पर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया था।
‘आतिथ्य से आत्मनिर्भरता’ को जमीन पर उतारने की कोशिश
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार ग्रामीण पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। होम-स्टे संचालकों को प्रशिक्षण देकर उन्हें पर्यटन क्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। उनका कहना है कि बेहतर आतिथ्य, स्थानीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक का समन्वय ग्रामीण इलाकों में पर्यटन को नई दिशा दे सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान संचालकों को पर्यटकों की जरूरत समझने, बेहतर व्यवहार, स्वच्छता, सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ अपने होम-स्टे को व्यवसाय के रूप में विकसित करने की जानकारी दी गई। इसके अलावा स्थानीय खानपान और उत्पादों को पर्यटकों के सामने बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। मंत्री के मुताबिक प्रदेश में होम-स्टे नेटवर्क का विस्तार करने की जरूरत है। सरकार की पर्यटन योजनाओं में अतिरिक्त कमरों और नए होम-स्टे विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। राज्य के बजट से संबंधित दस्तावेज में भी पर्यटन क्षेत्र के तहत नए कमरों और नए होम-स्टे विकसित करने की दिशा में प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
कारोबार से लेकर ब्रांडिंग तक का प्रशिक्षण
पांच दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को होम-स्टे के संचालन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी होम-स्टे की सफलता केवल अच्छे कमरे या सुविधाओं पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके प्रचार-प्रसार, ग्राहक व्यवहार, ऑनलाइन मौजूदगी और स्थानीय अनुभवों को प्रस्तुत करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है।

प्रशिक्षण में कम लागत में प्रभावी मार्केटिंग, ब्रांडिंग, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्रचार के तरीकों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। संचालकों को टैरिफ तय करने, लागत को नियंत्रित करने, अतिथि पंजीकरण और शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि पर्यटकों से मिलने वाले फीडबैक का उपयोग सेवा में सुधार के लिए कैसे किया जा सकता है। इसके साथ ही हाउसकीपिंग, रखरखाव, इंटीरियर, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी जोर दिया गया। प्रशिक्षकों ने सेवा प्रोटोकॉल और अतिथियों के साथ पेशेवर व्यवहार को होम-स्टे व्यवसाय की सफलता का अहम हिस्सा बताया।
डिजिटल भुगतान से सोशल मीडिया तक पर जोर
बदलते पर्यटन बाजार में डिजिटल तकनीक की भूमिका को देखते हुए होम-स्टे संचालकों को डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन प्रचार के बारे में भी प्रशिक्षण दिया गया। संचालकों को बताया गया कि पर्यटकों के लिए भुगतान प्रक्रिया जितनी सरल और सुविधाजनक होगी, उनके अनुभव में उतना ही सुधार आएगा।
सोशल मीडिया के जरिए स्थानीय पर्यटन स्थलों, होम-स्टे की सुविधाओं, खानपान और आसपास उपलब्ध गतिविधियों की जानकारी संभावित पर्यटकों तक पहुंचाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। प्रशिक्षकों ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को डिजिटल माध्यम से ब्रांड बनाने की संभावनाओं को समझाया। इस प्रशिक्षण में जिम्मेदार पर्यटन यानी रिस्पांसिबल टूरिज्म की अवधारणा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय संस्कृति और समुदाय की भागीदारी के साथ पर्यटन गतिविधियों को आगे बढ़ाने की जरूरत समझाई गई।
कागज पर नहीं, जमीन पर दिखा होम-स्टे का मॉडल
प्रशिक्षण के चार दिन जहां कक्षा में सैद्धांतिक जानकारी दी गई, वहीं पांचवें दिन प्रतिभागियों को राजधानी के ग्रामीण क्षेत्र में संचालित होम-स्टे और फार्म-स्टे का व्यावहारिक अनुभव कराया गया। कठवारा स्थित कृष्णा होम स्टे, आकाश होम स्टे और मिदौरी फार्म स्टे का भ्रमण कराकर संचालकों को वास्तविक संचालन व्यवस्था से रूबरू कराया गया। भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने देखा कि पर्यटकों के लिए ग्रामीण माहौल को किस तरह आकर्षक बनाया जा सकता है। होम-स्टे की व्यवस्थाओं, अतिथि सत्कार, स्थानीय गतिविधियों और मनोरंजन के साधनों के बारे में भी उन्हें जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण को केवल कागजी या सैद्धांतिक न रखते हुए वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ना था।
बोटिंग, पॉटरी और स्थानीय खेलों से समझी नई संभावनाएं
फील्ड विजिट के दौरान प्रतिभागियों को बोटिंग जैसी गतिविधियों का अनुभव कराया गया। इसके अलावा पॉटरी मेकर्स से मुलाकात कराकर स्थानीय हस्तकला को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाओं के बारे में बताया गया। कबड्डी और खो-खो जैसे पारंपरिक स्थानीय खेलों में भी प्रतिभागियों को शामिल कराया गया। प्रशिक्षण में स्टोरी टेलिंग को भी पर्यटन अनुभव का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। संचालकों को समझाया गया कि किसी गांव, क्षेत्र, परंपरा, खानपान या स्थानीय कला की कहानी पर्यटक के अनुभव को किस तरह यादगार बना सकती है। यदि होम-स्टे संचालक अपने क्षेत्र की खासियतों को कहानी के रूप में पेश करें तो पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति से जोड़ने का बेहतर अवसर मिल सकता है।
14 जिलों से पहुंचे 31 संचालक
एमकेआईटीएम में प्रशिक्षण लेने वाले 31 होम-स्टे संचालक प्रदेश के 14 जिलों से पहुंचे थे। अंबेडकरनगर से चार संचालक प्रशिक्षण में शामिल हुए। शामली, चंदौली, सिद्धार्थनगर, हमीरपुर और मथुरा से तीन-तीन संचालकों ने प्रशिक्षण लिया। प्रतापगढ़, फतेहपुर, कन्नौज और फिरोजाबाद से दो-दो संचालक कार्यक्रम का हिस्सा बने। वहीं लखीमपुर, मुरादाबाद, अमरोहा और गाजियाबाद से एक-एक होम-स्टे संचालक ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। अलग-अलग भौगोलिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आए संचालकों ने अपने अनुभव भी साझा किए।
गांव की संस्कृति बनेगी पर्यटकों के अनुभव का हिस्सा
उत्तर प्रदेश में पर्यटन की संभावनाएं केवल बड़े शहरों और धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं हैं। गांवों में मौजूद लोक संस्कृति, पारंपरिक खानपान, हस्तशिल्प, खेती आधारित जीवन, प्राकृतिक परिवेश और स्थानीय उत्सव भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। होम-स्टे मॉडल इसी संभावना को कारोबार से जोड़ने का माध्यम बन सकता है। होम-स्टे में ठहरने वाला पर्यटक स्थानीय परिवार और परिवेश के करीब रह सकता है। इससे उसे होटल आधारित पर्यटन से अलग अनुभव मिलता है। साथ ही स्थानीय परिवार को सीधे आय का अवसर मिलता है। इसी वजह से ग्रामीण पर्यटन में होम-स्टे को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने वाले मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज्म बोर्ड की मौजूदा गतिविधियों में भी होम-स्टे और ग्रामीण पर्यटन को विभिन्न प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण कार्यक्रमों से जोड़ने के प्रयास दिखाई देते हैं। अयोध्या, वाराणसी, चंदौली और अन्य क्षेत्रों के यात्रा कार्यक्रमों में भी होम-स्टे को ठहरने के विकल्प के रूप में शामिल किया गया है।
प्रशिक्षण से बढ़ा आत्मविश्वास, कारोबार की उम्मीद
प्रशिक्षण में शामिल प्रतापगढ़ के मनगढ़ निवासी अजय कुमार शुक्ला, हमीरपुर के खंडेह निवासी अरुण कुमार यादव, मथुरा के मखुराई निवासी गोविंद शरण और फिरोजाबाद के अकबरपुर निवासी सौरभ कुमार यादव समेत अन्य प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताया।
प्रतिभागियों के मुताबिक, प्रशिक्षण के दौरान उन्हें होम-स्टे चलाने से जुड़े कई ऐसे पहलुओं की जानकारी मिली, जिनका व्यावहारिक उपयोग वे अपने कारोबार में कर सकते हैं। उनका कहना था कि बेहतर आतिथ्य, स्वच्छता, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया प्रचार और स्थानीय गतिविधियों को पर्यटकों से जोड़ने की जानकारी से होम-स्टे को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। संचालकों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटकों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय संस्कृति और खानपान को भी पर्यटन अनुभव का हिस्सा बनाया जा सकता है। इससे पर्यटकों को नया अनुभव मिलेगा और स्थानीय लोगों को आय के अतिरिक्त साधन उपलब्ध होंगे।
प्रमाण-पत्र के साथ मिली नई दिशा
पांच दिवसीय प्रशिक्षण के अंतिम दिन प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया गया और इसके बाद उन्हें प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। प्रमाण-पत्र के साथ संचालकों को अपने-अपने क्षेत्रों में सीखी गई तकनीकों को लागू करने की जिम्मेदारी भी मिली। पर्यटन विभाग की कोशिश है कि प्रशिक्षित संचालक अपने होम-स्टे को केवल ठहरने की जगह न रखकर स्थानीय पर्यटन अनुभव का केंद्र बनाएं। इसके लिए स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प, लोक कला, पारंपरिक खेल और आसपास के पर्यटन स्थलों को पैकेज के रूप में विकसित करने की संभावनाएं भी प्रशिक्षण में समझाई गईं।
लक्ष्य बड़ा, होम-स्टे नेटवर्क के विस्तार पर नजर
पर्यटन विभाग की रणनीति में होम-स्टे का विस्तार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पर्यटन से जोड़ने के बड़े लक्ष्य का हिस्सा है। राज्य के पर्यटन क्षेत्र को आने वाले वर्षों में और विस्तार देने के लिए अतिरिक्त कमरे और नए होम-स्टे विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। बजट संबंधी सरकारी दस्तावेज में भी 50 हजार नए होम-स्टे के लिए काम किए जाने का उल्लेख किया गया है।
ऐसे में 31 संचालकों का यह प्रशिक्षण संख्या के लिहाज से भले ही छोटा हो, लेकिन ग्रामीण पर्यटन को पेशेवर तरीके से आगे बढ़ाने की दिशा में इसे एक प्रशिक्षण मॉडल के रूप में देखा जा सकता है। आने वाले समय में ऐसे प्रशिक्षणों के माध्यम से अधिक संचालकों को पर्यटन बाजार, डिजिटल तकनीक और आधुनिक आतिथ्य सेवाओं से जोड़ने की संभावना है। ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के साथ होम-स्टे नेटवर्क को जोड़ने का मकसद प्रदेश के पर्यटन अनुभव को शहरों से गांवों तक ले जाना है। यदि स्थानीय संसाधनों, आधुनिक प्रबंधन और बेहतर आतिथ्य का संतुलन कायम होता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

