सागर के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में सोमवार को एक गुफा के बाहर बाघिन के साथ चार शावक देखे गए। गश्ती दल ने उन्हें कैमरे में कैद कर लिया। यह बाघिन-N6 है, जिसे एक साल पहले पेंच टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू करके यहां लाया गया था। बाघिन और शावक स्वस्थ बताए जा रहे हैं। दो साल शावकों के विकास के लिए चुनौतीपूर्ण रहते हैं। निगरानी के लिए आसपास ट्रैकर कैमरे लगाए हैं। चार शावकों के जन्म के साथ टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा 30 के पार पहुंच गया है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. रजनीश सिंह ने बताया कि पेंच से लाई गई इस बाघिन ने पहली बार बच्चों को जन्म दिया है। टाइगर रिजर्व में बाघों के लिए काफी अनुकूल माहौल है। यही बाघ वंशवृद्धि का बड़ा कारण हैं। बाघिन व शावकों की निगरानी बढ़ा दी गई है। 8 साल में ऐसे बढ़ा बाघों का कुनबा साल 2018 में ढाई साल की एक बाघिन को नौरादेही अभयारण्य (अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व) लाया गया था। यह पहला मौका था। जब किसी बाघिन ने यहां कदम रखा था। इसके पहले तक यहां पन्ना के बाघ आते-जाते रहे हैं। बाघिन राधा एन-1 से वंशवृद्धि के लिए दो माह बाद बांधवगढ़ से साढ़े तीन साल का एक बाघ किशन एन-2 यहां लाया गया। एक साल बाद खुशखबरी आई। बाघिन राधा ने पहली बार मई 2019 में तीन शावकों को जन्म दिया। इनमें दो मादा और एक नर था। बाघिन राधा की बेटियां भी बाघों का कुनबा बढ़ा रही हैं। एक बार में 3-4 शावकों को जन्म दे रही हैं। आखिरी बार वंशवृद्धि की खबर एक साल पहले मिली थी, जब बाघिन एन-112 अपने 4 शावकों के साथ कैमरे में कैद हुई थी। टाइगर रिजर्व में करीब 65 फीसदी संख्या बाघिनों की बताई जा रही है।


