‘जिनकी शैक्षणिक योग्यता क्लियर नहीं, उन्हें सीएम बनाया’:जन सुराज प्रदेश अध्यक्ष बोले- नए सीएम के पदभार संभालते नीट छात्रा के आरोपी को बेल मिला

‘जिनकी शैक्षणिक योग्यता क्लियर नहीं, उन्हें सीएम बनाया’:जन सुराज प्रदेश अध्यक्ष बोले- नए सीएम के पदभार संभालते नीट छात्रा के आरोपी को बेल मिला

जन सुराज पार्टी कार्यालय में शनिवार को पीसी हुई। पार्टी नेताओं ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर सवाल उठाए। प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि बिहार जैसे ज्ञान की भूमि पर आज ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया गया है, जिनकी शैक्षणिक योग्यता तक स्पष्ट नहीं है। मनोज भारती ने हाल के नीट छात्रा से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए कहा कि नए मुख्यमंत्री के पद संभालते ही आरोपी को बेल मिल जाना सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में राज्य की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है और आने वाले पांच सालों को लेकर निराशा बढ़ी है। जिस नेतृत्व के नाम पर चुनाव लड़ा गया, उसे कुछ ही महीनों में किनारे कर दिया गया, जिससे जनता के जनादेश का अपमान हुआ है। सरकारी कर्मियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा मनोज ने कहा कि बिहार के आधे से अधिक जिलों में सरकारी कर्मियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जो कोष की खराब हालत को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान मुख्यमंत्री जब गृहमंत्री थे, तब भी राज्य में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ती रहीं और प्रशासनिक व्यवस्था लगभग शून्य हो गई।
मंत्री पद से बर्खास्त करने का आदेश मिला था पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव ने 1999 से जुड़े एक प्रकरण का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय वर्तमान मुख्यमंत्री थे। सौरव ने सम्राट को राकेश कुमार के नाम से संबोधित किया और कहा कि उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त करने का आदेश सीधे राजभवन से जारी हुआ था। तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान की ओर से जारी आदेश में न केवल बर्खास्तगी की बात कही गई थी, बल्कि जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने का भी निर्देश दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई किसी पार्टी या सरकार की ओर से नहीं, बल्कि राजभवन के स्तर से की गई थी।
सम्राट की उम्र आज तक क्लियर नहीं कुमार सौरव ने आगे दावा किया कि उस समय एक जांच समिति बनाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट में उम्र और दस्तावेजों में विसंगतियां सामने आईं थी। अलग-अलग दस्तावेजों में अलग-अलग उम्र दर्ज थी। कहीं 31, कहीं 24 और कहीं 16 साल लिखा था। यह मामला आज भी स्पष्ट नहीं हो सका है और रिपोर्ट ठंडे बस्ते में पड़ी है। ये सवाल केवल राज्य सरकार या मुख्यमंत्री से नहीं, बल्कि केंद्र नेतृत्व नरेंद्र मोदी और अमित शाह से भी है कि ऐसे आरोपों के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री क्यों बनाया गया। जन सुराज पार्टी कार्यालय में शनिवार को पीसी हुई। पार्टी नेताओं ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर सवाल उठाए। प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि बिहार जैसे ज्ञान की भूमि पर आज ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया गया है, जिनकी शैक्षणिक योग्यता तक स्पष्ट नहीं है। मनोज भारती ने हाल के नीट छात्रा से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए कहा कि नए मुख्यमंत्री के पद संभालते ही आरोपी को बेल मिल जाना सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में राज्य की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है और आने वाले पांच सालों को लेकर निराशा बढ़ी है। जिस नेतृत्व के नाम पर चुनाव लड़ा गया, उसे कुछ ही महीनों में किनारे कर दिया गया, जिससे जनता के जनादेश का अपमान हुआ है। सरकारी कर्मियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा मनोज ने कहा कि बिहार के आधे से अधिक जिलों में सरकारी कर्मियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जो कोष की खराब हालत को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान मुख्यमंत्री जब गृहमंत्री थे, तब भी राज्य में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ती रहीं और प्रशासनिक व्यवस्था लगभग शून्य हो गई।
मंत्री पद से बर्खास्त करने का आदेश मिला था पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव ने 1999 से जुड़े एक प्रकरण का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय वर्तमान मुख्यमंत्री थे। सौरव ने सम्राट को राकेश कुमार के नाम से संबोधित किया और कहा कि उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त करने का आदेश सीधे राजभवन से जारी हुआ था। तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान की ओर से जारी आदेश में न केवल बर्खास्तगी की बात कही गई थी, बल्कि जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने का भी निर्देश दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई किसी पार्टी या सरकार की ओर से नहीं, बल्कि राजभवन के स्तर से की गई थी।
सम्राट की उम्र आज तक क्लियर नहीं कुमार सौरव ने आगे दावा किया कि उस समय एक जांच समिति बनाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट में उम्र और दस्तावेजों में विसंगतियां सामने आईं थी। अलग-अलग दस्तावेजों में अलग-अलग उम्र दर्ज थी। कहीं 31, कहीं 24 और कहीं 16 साल लिखा था। यह मामला आज भी स्पष्ट नहीं हो सका है और रिपोर्ट ठंडे बस्ते में पड़ी है। ये सवाल केवल राज्य सरकार या मुख्यमंत्री से नहीं, बल्कि केंद्र नेतृत्व नरेंद्र मोदी और अमित शाह से भी है कि ऐसे आरोपों के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री क्यों बनाया गया।  

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