अलवर-भिवाड़ी में पॉल्यूशन पर लगेगा ब्रेक, प्रदूषण विभाग ने लॉन्च किया ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’

अलवर-भिवाड़ी में पॉल्यूशन पर लगेगा ब्रेक, प्रदूषण विभाग ने लॉन्च किया ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’

अलवर जिले में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने अर्ली वार्निंग सिस्टम (ईडब्ल्यूएस) लॉन्च किया है। इस सिस्टम से अलवर और भिवाड़ी के प्रदूषण पर डिजिटल निगरानी रखी जाएगी। यह सिस्टम प्रदूषण का पूर्वानुमान बताएगा ताकि संबंधित विभाग उसे नियंत्रित करने कदम उठा सकेंगे।

अब तक ऐसा कोई सिस्टम नहीं होने से अचानक प्रदूषण बढ़ने से स्थिति विकट हो जाती थी। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने जयपुर में इसकी लॉन्चिंग की है। इसके लॉन्च होने से क्षेत्र में पॉल्यूशन पर रियल मॉनिटरिंग हो सकेगी।

ऐसे करेगा काम

अर्ली वार्निंग सिस्टम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों, मौसम विभाग और अन्य स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करेगा। इसमें हवा की दिशा और गति, तापमान, आर्द्रता, धूलकणों की मात्रा, वाहनों का दबाव और औद्योगिक गतिविधियों जैसे कारकों को शामिल किया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और वैज्ञानिक मॉडलिंग तकनीक की मदद से यह प्रणाली आगामी दिनों की वायु गुणवत्ता का पूर्वानुमान तैयार करेगी।

यदि किसी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ने की संभावना होगी तो संबंधित विभागों को पहले ही चेतावनी जारी कर दी जाएगी। यह सामान्य मॉनिटरिंग सिस्टम जहां मौजूदा स्थिति की जानकारी देता है, वहीं अर्ली वार्निंग सिस्टम संभावित खतरे की पहले से सूचना उपलब्ध कराता है।

प्रशासन को होगा फायदा

प्रदूषण बढ़ने की आशंका होने पर प्रशासन निर्माण कार्यों पर नियंत्रण, सड़कों पर पानी का छिड़काव, यांत्रिक सफाई, औद्योगिक इकाइयों की निगरानी और अन्य आवश्यक कदम पहले ही उठा सकेगा। इससे प्रदूषण को गंभीर स्तर तक पहुंचने से पहले नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। नई व्यवस्था से लोगों को भी वायु गुणवत्ता खराब होने की पूर्व सूचना मिल सकेगी।

विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को समय रहते सावधानी बरतने का अवसर मिलेगा। इससे स्वास्थ्य जोखिम कम करने में सहायता मिलेगी। क्षेत्र के लोगों को पोलुशन से जुडी समस्या से थोड़ी राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि यह देखना बाकी है कि इस प्रोजेक्ट से कितना लाभ आमजन को मिलता है।

एनसीआर क्षेत्र के लिए अहम पहल

अलवर और भिवाड़ी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का हिस्सा हैं। सर्दियों के मौसम में यहां धूल, वाहनों के धुएं और औद्योगिक गतिविधियों के कारण वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में दिल्ली की तर्ज पर शुरू किया गया यह अर्ली वार्निंग सिस्टम वायु गुणवत्ता प्रबंधन को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हर साल लोगों को प्रदुषण की समस्या से जूझना पड़ता है। हर साल औद्योगिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

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