RBI के GDP अनुमान में कटौती का असर, शेयर Market में छाई मायूसी

RBI के GDP अनुमान में कटौती का असर, शेयर Market में छाई मायूसी
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बावजूद निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा। आर्थिक विकास और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों को लेकर बनी चिंताओं का बाजारों पर दबाव बना रहा। बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंक या 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,243.34 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 49.85 अंक या 0.21 प्रतिशत गिरकर 23,366.70 पर बंद हुआ।
 

इसे भी पढ़ें: Titan और BlueStone का 2030 Vision, दोगुना Revenue के ऐलान से शेयर बाजार में आई बहार

इस तरह सेंसेक्स में कुल 728.82 अंकों का उतार-चढ़ाव देखा गया। वहीं, एनएसई का मानक सूचकांक निफ्टी 49.85 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,366.70 पर बंद हुआ। आरबीआई ने शुक्रवार को उम्मीद के अनुरूप प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा। इसके साथ पश्चिम एशिया संघर्ष, ऊर्जा की ऊंची कीमतों और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में समस्या के कारण वृद्धि और मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों के बीच विदेशी पूंजी आकर्षित करने और रुपये को समर्थन देने के लिए कई उपायों की घोषणा की गई। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में से ट्रेंट, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), टाटा स्टील, एनटीपीसी, एचसीएल टेक और भारती एयरटेल प्रमुख रूप से नुकसान में रहीं। दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में हिंदुस्तान यूनिलीवर, एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स और बजाज फाइनेंस शामिल हैं। 
सरकार द्वारा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को कर राहत प्रदान करने वाले अध्यादेश जारी करने के बाद बाजार सकारात्मक शुरुआत के साथ खुले। उम्मीद थी कि इस कदम से विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और रुपये को मजबूती मिलेगी। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति संबंधी फैसले और संशोधित आर्थिक विकास के अनुमानों पर निवेशकों की प्रतिक्रिया के कारण यह बढ़त अल्पकालिक रही।
 

इसे भी पढ़ें: BYD की सफलता बनी मुसीबत! 1 लाख से ज्यादा Booking के बाद नई Electric SUV का Launch टला

आरबीआई ने वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक जोखिमों का हवाला देते हुए बेंचमार्क रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा और जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया। वैश्विक घटनाक्रमों ने भी निवेशकों को चिंतित रखा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, इज़राइल-लेबनान युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने की चिंताओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और मुद्रास्फीति के जोखिमों को लेकर आशंकाएं बढ़ा दीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *