जमुई में कम्युनिटी लाइब्रेरी का काम अधूरा:लाखों खर्च के बाद भी बच्चों को सुविधा नहीं, संसाधन गायब होने का आरोप

जमुई में कम्युनिटी लाइब्रेरी का काम अधूरा:लाखों खर्च के बाद भी बच्चों को सुविधा नहीं, संसाधन गायब होने का आरोप

जमुई जिले के बरहट प्रखंड की नुमर पंचायत के वार्ड संख्या 5 में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई सामुदायिक पुस्तकालय योजना लापरवाही और अनियमितताओं का शिकार हो गई है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत करीब 7 लाख 89 हजार रुपये की लागत से दो कमरों का पुस्तकालय भवन वर्ष 2022-23 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। निर्माण कार्य आज तक अधूरा पड़ा है। भवन की न तो छत की ढलाई पूरी हुई है और न ही दीवारों का काम ठीक से किया गया है। आधा-अधूरा ढांचा अब जर्जर होने लगा है और परिसर में झाड़-झंखाड़ उग आए हैं। स्थिति यह है कि जहां बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था होनी चाहिए थी, वहां अब मवेशी बांधे जा रहे हैं। 4 लाख 36 हजार रुपये की राशि पहले ही निकाली जा चुकी ग्रामीणों के अनुसार, योजना के तहत करीब 4 लाख 36 हजार रुपये की राशि पहले ही निकाली जा चुकी है, इसके बावजूद निर्माण कार्य अधूरा है। इसे लेकर ग्रामीणों ने अनियमितता का आरोप लगाया है। वार्ड सदस्य वरुण कुमार यादव ने मामले की लिखित शिकायत संबंधित विभाग को देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लैपटॉप, बैट्री और इनवर्टर की खरीदारी की गई थी ग्रामीणों का यह भी दावा है कि पुस्तकालय के नाम पर लैपटॉप, बैट्री और इनवर्टर की खरीदारी की गई थी, लेकिन भवन तैयार न होने के बावजूद इन संसाधनों का कोई अता-पता नहीं है। इससे पूरे मामले में गड़बड़ी की आशंका और गहरा गई है। इस संबंध में प्रभारी पंचायत राज पदाधिकारी शशिकांत वर्मा ने बताया कि उन्हें पहले इस बारे में जानकारी नहीं थी। शिकायत मिलने के बाद अब जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। जमुई जिले के बरहट प्रखंड की नुमर पंचायत के वार्ड संख्या 5 में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई सामुदायिक पुस्तकालय योजना लापरवाही और अनियमितताओं का शिकार हो गई है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत करीब 7 लाख 89 हजार रुपये की लागत से दो कमरों का पुस्तकालय भवन वर्ष 2022-23 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। निर्माण कार्य आज तक अधूरा पड़ा है। भवन की न तो छत की ढलाई पूरी हुई है और न ही दीवारों का काम ठीक से किया गया है। आधा-अधूरा ढांचा अब जर्जर होने लगा है और परिसर में झाड़-झंखाड़ उग आए हैं। स्थिति यह है कि जहां बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था होनी चाहिए थी, वहां अब मवेशी बांधे जा रहे हैं। 4 लाख 36 हजार रुपये की राशि पहले ही निकाली जा चुकी ग्रामीणों के अनुसार, योजना के तहत करीब 4 लाख 36 हजार रुपये की राशि पहले ही निकाली जा चुकी है, इसके बावजूद निर्माण कार्य अधूरा है। इसे लेकर ग्रामीणों ने अनियमितता का आरोप लगाया है। वार्ड सदस्य वरुण कुमार यादव ने मामले की लिखित शिकायत संबंधित विभाग को देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लैपटॉप, बैट्री और इनवर्टर की खरीदारी की गई थी ग्रामीणों का यह भी दावा है कि पुस्तकालय के नाम पर लैपटॉप, बैट्री और इनवर्टर की खरीदारी की गई थी, लेकिन भवन तैयार न होने के बावजूद इन संसाधनों का कोई अता-पता नहीं है। इससे पूरे मामले में गड़बड़ी की आशंका और गहरा गई है। इस संबंध में प्रभारी पंचायत राज पदाधिकारी शशिकांत वर्मा ने बताया कि उन्हें पहले इस बारे में जानकारी नहीं थी। शिकायत मिलने के बाद अब जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।  

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