Colon Cancer Risk: आजकल एक चिंता बढ़ाने वाली बात सामने आ रही है। कम उम्र के लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर (आंत का कैंसर) से मौतें बढ़ रही हैं। नई रिसर्च के मुताबिक ये बढ़ोतरी खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा देखी जा रही है, जिनकी पढ़ाई कम है या जिनके पास कॉलेज डिग्री नहीं है।
ये स्टडी जर्नल JAMA Oncology में पब्लिश हुई है। इसमें American Cancer Society के रिसर्चर्स ने 1994 से 2023 तक के 1 लाख से ज्यादा युवाओं (25-49 साल) के डेटा का विश्लेषण किया। स्टडी के मुख्य लेखक Ahmedin Jemal हैं।
क्या कहती है रिसर्च?
रिसर्च में पाया गया कि पिछले 30 सालों में युवा लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर से मौतों में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन ये बढ़ोतरी लगभग पूरी तरह उन लोगों में देखी गई जिनके पास 4 साल की कॉलेज डिग्री नहीं थी। कम पढ़े-लिखे लोगों में मौत का रेट 4 से बढ़कर 5.2 प्रति 1 लाख हो गया वहीं ग्रेजुएट लोगों में यह रेट लगभग 2.7 पर ही स्थिर रहा।
क्या पढ़ाई कैंसर से बचाती है?
ऐसा नहीं है कि ज्यादा पढ़ाई करने से कैंसर नहीं होता। एक्सपर्ट्स के अनुसार, पढ़ाई यहां एक संकेत (marker) है। जिन लोगों की शिक्षा कम होती है, उनमें अक्सर ये समस्याएं ज्यादा होती हैं। कम आय (कम पैसा), खराब खान-पान, कम फिजिकल एक्टिविटी, समय पर इलाज और जांच की कमी। न्यूयॉर्क के Stony Brook Cancer Center के रिसर्चर Paolo Boffetta ने भी कहा कि यह पहली ऐसी स्टडी है जो राष्ट्रीय स्तर पर इस कनेक्शन को साफ दिखाती है।
लक्षण क्या हैं?
कोलोरेक्टल कैंसर के कुछ आम लक्षण हैं:
- मल में खून आना या ब्लीडिंग
- बार-बार दस्त या कब्ज
- पेट में दर्द या ऐंठन
- बिना वजह वजन कम होना
- स्टूल का पतला होना
अगर ये लक्षण लगातार दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
वैज्ञानिक अभी इसकी सटीक वजह नहीं जानते, लेकिन कुछ बड़े कारण माने जा रहे हैं:
- मोटापा
- एक्सरसाइज की कमी
- ज्यादा रेड या प्रोसेस्ड मीट खाना
- फल-सब्जियों की कमी
- फैमिली हिस्ट्री
स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है?
American Cancer Society ने 2021 में सलाह दी कि अब लोगों को 50 की बजाय 45 साल की उम्र से ही कैंसर की स्क्रीनिंग शुरू कर देनी चाहिए।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


