शिक्षा का माध्यम राज्य की राजभाषा या क्षेत्रीय भाषा हो : प्रो. दुबे

शिक्षा का माध्यम राज्य की राजभाषा या क्षेत्रीय भाषा हो : प्रो. दुबे

वडोदरा. गुजरात केन्द्रीय विश्वाविद्यालय (सीयूजी) के प्रो. संजीव कुमार दुबे ने कहा कि विद्यार्थी को अंग्रेज़ी सहित अनेक भारतीय और विदेशी भाषाएं सीखने का अवसर दिया जाना चाहिए, हालांकि उसकी शिक्षा का माध्यम राज्य की राजभाषा या क्षेत्रीय भाषा होनी चाहिए।
नंद चतुर्वेदी के 103वें जन्मदिन पर राजस्थान के कोटा खुला विश्वविद्यालय में 10वें नंद चतुर्वेदी स्मृति व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। शिक्षा की भाषा और भारतीय भाषाओं की चुनौतियां विषय पर व्याख्यान देते हुए नंद चतुर्वेदी की शिक्षा व्यवस्था से अपेक्षाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति मूल भावना को उसके अनुकूल बताया।

त्रिभाषा सूत्र के प्रावधान की चर्चा करते हुए उन्होंने भाषा को ज्ञान की भाषा, पहचान की भाषा और स्वाभिमान की भाषा में वर्गीकृत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा माध्यम के स्कूलों को अंग्रेज़ी माध्यम स्कूलों में बदलने की होड़ के बीच मातृभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाना बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि भाषा हमें जोड़ती तो है लेकिन अस्मिता से जुड़ कर भाषा हमें बांटती भी है। हिंदी अकेले 56 मातृभाषाओं का प्रतिनिधित्व करती है। प्रो. दुबे ने कहा कि हमारी मुख्य भाषाएं अनेक भाषिक अस्मिताओं में बंट न जाए, ये हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

भाषा वेशभूषा और भोजन हमारी पहचान

राजस्थान के राज्यपाल के उच्च शिक्षा सलाहकार प्रो. कैलाश सोडानी ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि भाषा वेशभूषा और भोजन हमारी पहचान है। विद्यार्थी की स्कूल शिक्षा उसकी मातृ भाषा में होनी चाहिए या आज की नई शिक्षा नीति भी कहती है। कार्यक्रम का प्रारंभ नंद चतुर्वेदी की तस्वीर पर पुष्पांजलि से हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *