आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता की तबीयत बिगड़ी:लखीसराय में 3 दिन बाद अस्पताल में भर्ती, बाइपास-मलिया पुल को लेकर कर रहे थे प्रदर्शन

आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता की तबीयत बिगड़ी:लखीसराय में 3 दिन बाद अस्पताल में भर्ती, बाइपास-मलिया पुल को लेकर कर रहे थे प्रदर्शन

लखीसराय में जनहित के मुद्दों को लेकर समाहरणालय परिसर में तीन दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता कमल किशोर सिंह की बुधवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई। गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें आनन-फानन में सदर अस्पताल में भर्ती कराया। जानकारी के अनुसार, कमल किशोर सिंह 18 मई से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर थे। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने लखीसराय बाइपास पुल और मलिया पुल कुछ ही वर्षों में जर्जर हो गए हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने क्षेत्र की कई अन्य जनसमस्याओं पर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया था। कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अनशन स्थल पर नहीं पहुंचा
अनशन स्थल पर मौजूद लोगों ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि तीन दिनों तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अनशन स्थल पर नहीं पहुंचा। प्रशासन की ओर से न तो स्वास्थ्य जांच की कोई व्यवस्था की गई और न ही वार्ता का कोई प्रयास किया गया। सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही
जब अनशनकारी की हालत गंभीर होने लगी, तब जाकर प्रशासनिक महकमे में हलचल हुई और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते पहल की होती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। लखीसराय में जनहित के मुद्दों को लेकर समाहरणालय परिसर में तीन दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता कमल किशोर सिंह की बुधवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई। गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें आनन-फानन में सदर अस्पताल में भर्ती कराया। जानकारी के अनुसार, कमल किशोर सिंह 18 मई से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर थे। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने लखीसराय बाइपास पुल और मलिया पुल कुछ ही वर्षों में जर्जर हो गए हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने क्षेत्र की कई अन्य जनसमस्याओं पर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया था। कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अनशन स्थल पर नहीं पहुंचा
अनशन स्थल पर मौजूद लोगों ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि तीन दिनों तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अनशन स्थल पर नहीं पहुंचा। प्रशासन की ओर से न तो स्वास्थ्य जांच की कोई व्यवस्था की गई और न ही वार्ता का कोई प्रयास किया गया। सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही
जब अनशनकारी की हालत गंभीर होने लगी, तब जाकर प्रशासनिक महकमे में हलचल हुई और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते पहल की होती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।  

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