बरेली में विश्व पर्यावरण दिवस के खास मौके पर रामगंगा तट एक बार फिर भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। काशी और हरिद्वार की तर्ज पर यहाँ भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और शहर के प्रबुद्ध जन घाट पर पहुंचे। जैसे ही तीन पंडितों ने पूरे विधान और मंत्रोच्चार के साथ आरती शुरू की, पूरा माहौल शंखनाद और घंटियों की आवाज से गूंज उठा। इस आध्यात्मिक नजारे को देखकर वहां मौजूद हर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गया। रामगंगा के घाट पर दीपदान भी किया गया, जिससे नदी की लहरें दीयों की रोशनी से जगमगा उठीं। आरती में शामिल होने आए लोगों ने जिला प्रशासन और आयोजकों की इस बेहतरीन पहल की जमकर तारीफ की। आम जनता ने प्रशासन से यह मांग भी उठाई कि रामगंगा के इस पावन तट पर हर शाम इसी तरह नियमित रूप से आरती का आयोजन होना चाहिए, ताकि शहर में पर्यटन और आध्यात्मिकता को बढ़ावा मिल सके। पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
इस भव्य आयोजन के दौरान कई सामाजिक संस्थाओं और एनजीओ के प्रतिनिधि भी रामगंगा तट पर जुटे। सभी ने नदी को स्वच्छ रखने और पर्यावरण को बचाने का संकल्प लिया। आमतौर पर बरेली में हर महीने के पहले सोमवार को रामगंगा आरती का आयोजन किया जाता है, लेकिन विश्व पर्यावरण दिवस होने के कारण इस बार विशेष आरती का कार्यक्रम रखा गया। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को प्रकृति और नदियों की स्वच्छता के प्रति जागरूक करना था। बड़े अधिकारी और प्रबुद्ध जन रहे मौजूद
इस कार्यक्रम में शहर की कई जानी-मानी हस्तियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मुख्य रूप से वन विभाग के अधिकारी वैभव चौधरी, कैंटोनमेंट बोर्ड की सीईओ तनु जैन, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. पवन सक्सेना, बरेली के मशहूर चिकित्सक डॉ. विमल भारद्वाज और कवि रोहित राकेश सहित कई गणमान्य लोग आरती में शामिल हुए और रामगंगा मां का आशीर्वाद लिया।


