Cancer Cause: हम अक्सर वही खाते हैं जो देखते आए हैं, एक रोटी और ले लो या बिस्किट के बिना चाय कैसी? लेकिन क्या आप जानते हैं कि अनजाने में अपनाई गई ये आदतें शरीर में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के बीज बो रही हैं? कैंसर विशेषज्ञ का मानना है कि प्रोसेस्ड फूड, अधिक मैदा और शुगर शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। कैंसर से बचना है तो दवाइयों से पहले अपनी थाली को बदलना होगा। यह आपको डराने के लिए नहीं, बल्कि यह बताने के लिए है कि कैसे रोजमर्रा के छोटे-छोटे बदलाव आपको एक स्वस्थ जीवन दे सकते हैं।
बिस्किट की जगह भुना हुआ चना (Evening Snacks)
चाय के साथ मैदे वाले बिस्किट या कुकीज लेने की आदत छोड़ें। मैदा और शुगर शरीर में सूजन (inflammation) बढ़ाते हैं। इसकी जगह एक मुट्ठी भुना हुआ चना लें। यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है, जो कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
सफेद चावल की जगह आधा चावल और ज्यादा राजमा (Lunch)
कैंसर से बचने के लिए कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम और फाइबर व प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना जरूरी है। अगर आप एक पूरी प्लेट सफेद चावल खाते हैं, तो उसे आधा कर दें और उसमें राजमा या दाल की मात्रा दोगुनी कर दें। साथ में एक कटोरी ताज़ा सलाद जरूर लें। राजमा जैसे लेग्यूम्स में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं।
नमकीन/चिप्स की जगह मखाना और मूंगफली (Munching)
पैकेट बंद चिप्स या नमकीन में प्रिजर्वेटिव्स और अधिक नमक होता है, जो सेहत के लिए हानिकारक है। इसकी जगह घी में भुने हुए मखाने और मूंगफली का सेवन करें। मखाने एंटी-एजिंग और एंटी-कैंसर गुणों से भरपूर माने जाते हैं।
फ्रूट जूस की जगह साबुत फल और नारियल पानी (Hydration)
डिब्बाबंद फ्रूट जूस में केवल चीनी होती है और फाइबर गायब होता है। इसकी जगह एक पूरा सेब, केला या संतरा खाएं। साबुत फल खाने से शरीर को जरूरी फाइटोकेमिकल्स मिलते हैं। प्यास बुझाने के लिए नारियल पानी का चुनाव करें, जो शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।
आलू की सब्जी की जगह पनीर/चिकन और कचूमर सलाद (Dinner)
सिर्फ स्टार्च वाली सब्जियां (जैसे आलू) खाने के बजाय प्रोटीन वाली चीजें जैसे पनीर या लीन मीट शामिल करें। साथ ही अपनी थाली का आधा हिस्सा रंग-बिरंगे सलाद (कचूमर) से भरें। सलाद में मौजूद विटामिन्स और एंजाइम्स शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


