Heart Attack Cause: जरा सोचिए, एक 40 साल का इंसान जो अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखता है, जिसकी ब्लड प्रेशर (BP), शुगर और कोलेस्ट्रॉल की सारी रिपोर्ट एकदम परफेक्ट हैं, उसे अचानक आधी रात को हार्ट अटैक आ जाए। सुनने में यह डरावना लगता है, लेकिन यह सच है। हम अक्सर अपनी एनुअल हेल्थ चेकअप की रिपोर्ट्स देखकर निश्चिंत हो जाते हैं, पर एक साइलेंट किलर ऐसा है जो इन रिपोर्ट्स में नहीं आता। वह है, स्लीप एपेनिया (Sleep Apnea) यानी नींद की एक गंभीर बीमारी।
क्या है स्लीप एपेनिया?
हम में से कई लोग खर्राटों को गहरी और सुकून की नींद की निशानी मानते हैं, पर हकीकत इसके विपरीत है। स्लीप एपेनिया में नींद के दौरान सांस लेने वाली नली बार-बार सिकुड़ जाती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है।
रिपोर्ट नॉर्मल, फिर अटैक क्यों?
डॉक्टरों के अनुसार, स्लीप एपेनिया एक इंडिपेंडेंट रिस्क फैक्टर है। इसका मतलब है कि भले ही आपको बीपी या शुगर न हो, फिर भी यह आपके दिल को बीमार कर सकता है। जब रात में बार-बार ऑक्सीजन लेवल गिरता है, तो दिल पर जबरदस्त दबाव पड़ता है। शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ने लगते हैं और हार्ट रेट बिगड़ जाता है। रात भर दिल को जो आराम मिलना चाहिए था, वह उसे नहीं मिल पाता।
हार्ट अटैक का रिस्क दोगुना क्यों हो जाता है?
अगर स्लीप एपेनिया का इलाज न किया जाए, तो सोते समय हार्ट अटैक आने का खतरा दोगुना हो जाता है। रात के समय जब पूरी दुनिया सो रही होती है, तब इस बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति का दिल ओवरटाइम कर रहा होता है, जिससे अचानक कार्डियक अरेस्ट की स्थिति बन सकती है।
हार्ट अटैक से कैसे बचें?
- वजन घटाएं।
- करवट लेकर सोएं।
- डॉक्टर की सलाह से CPAP मशीन का इस्तेमाल करें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


