CGMSC घोटाले में पूरक चालान पेश:मेडिकल उपकरण-रिएजेंट्स की खरीदी में गड़बड़ी, सिंडिकेट ने दवा निगम को पहुंचाया 550 करोड़ को नुकसान

CGMSC घोटाले में पूरक चालान पेश:मेडिकल उपकरण-रिएजेंट्स की खरीदी में गड़बड़ी, सिंडिकेट ने दवा निगम को पहुंचाया 550 करोड़ को नुकसान

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरक चालान पेश किया है। ब्यूरो में दर्ज अपराध क्रमांक 05/2025 में गुरुवार 16 अप्रैल 2026 को न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया। इस मामले में अभिषेक कौशल (डायरेक्टर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि., पंचकुला), राकेश जैन (प्रोप्राइटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर), प्रिंस जैन (लायजनर) और कुंजल शर्मा (मार्केटिंग हेड, डायसिस इंडिया प्रा. लि., नवी मुंबई) को आरोपी बनाया गया है। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज है। जांच में सामने आया कि ‘हमर लैब योजना’ के तहत सरकारी अस्पतालों में मुफ्त डायग्नोस्टिक सुविधा के लिए मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की खरीदी में टेंडर प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी की गई। आरोप है कि संबंधित फर्मों ने आपसी सांठगांठ (कार्टलाइजेशन) कर टेंडर में भाग लिया और फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपनी पात्रता साबित की। तीन फर्मों ने सिंडिकेट बनाकर आर्थिक नुकसान किया एसीबी के अफसरों की जांच में सामने आया है, कि तीनों प्रमुख फर्मों मोक्षित कॉर्पोरेशन, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने मिलकर टेंडर में समान पैटर्न पर उत्पाद, पैक साइज और दरें भरीं। जांच में यह भी सामने आया कि जिन उत्पादों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था, उन्हें भी एक जैसे तरीके से प्रस्तुत किया गया। सबसे कम दर मौक्षित कॉर्पोरेशन की रही, जिसके बाद अन्य फर्मों की दरें रखी गईं। इसके अलावा, डायसिस कंपनी के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने षड्यंत्रपूर्वक रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की कीमत वास्तविक एमआरपी से कई गुना अधिक दिखाकर CGMSC को भेजी। इसके चलते टेंडर में अत्यधिक दरें स्वीकृत हो गईं और सरकार को लगभग 550 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। 10 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश अब तक इस मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है। एसीबी ने स्पष्ट किया है कि ‘हमर लैब योजना’ में हुए इस घोटाले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब जानिए कैसे सामने आया दवा घोटाला दरअसल, दिसंबर 2024 में पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय, सीबीआई और ईडी मुख्यालय में सीजी-एमएससी में हुए घोटाले की शिकायत की थी। उनकी शिकायत पर केंद्र सरकार ने ईओडब्ल्यू को जांच के निर्देश दिए। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने पांच लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की। EOW के अफसरों ने अपनी दस्तावेजों में स्पेशिफिकेशन का जिक्र किया है। अब समझिए कैसे फर्म को मिलता था टेंडर? दैनिक भास्कर डिजिटल के पास मौजूद ईओडब्ल्यू जांच रिपोर्ट के दस्तावेजों के अनुसार, सीजीएमएससी के अधिकारियों ने मोक्षित कॉर्पोरेशन को महज 27 दिनों में करीब 750 करोड़ रुपए के ऑर्डर दे दिए। जबकि मेडिकल किट और उपकरणों की तत्काल कोई ज़रूरत नहीं थी, फिर भी योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया गया। मोक्षित कॉर्पोरेशन और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने मिलकर सीजीएमएससी में दवा आपूर्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया में मिलीभगत की। अधिकारियों ने फर्म के अनुसार टेंडर की शर्तें तय कीं, जिससे अन्य कंपनियां स्वतः दौड़ से बाहर हो गईं। इस रणनीति से इन्हीं फर्मों को टेंडर मिला, जिससे उनके कारोबार में सीधा फायदा हुआ। शशांक चोपड़ा से पूछताछ के बाद बढ़ी थी जांच रीएजेंट घोटाले के मास्टरमाइंड माने जा रहे शशांक चोपड़ा को हिरासत में लेने के बाद ईडी के अफसरों ने पूछताछ की थी। शशांक चोपड़ा से पूछताछ के बाद ईडी जांच में CGMSC के अधिकारियों डॉ. अनिल परसाई, दीपक कुमार बांधे, बसंत कुमार कौशिक, कमलकांत पाटनवार और क्षिरोद रौतिया पर शशांक को संरक्षण देने के गंभीर आरोप हैं। इन सभी पर पूर्व में कार्रवाई हो चुकी है।

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