गर्मियों त्वचा का ख्याल रखना बेहद जरुरी होता है। अगर चिलचिलाती धूप से स्किन को नहीं बचाया, तो इससे त्वचा पर टैनिंग नजर आने लगती है। कई बार धूप के कारण स्किन डार्क हो जाती है। गर्मी के मौसम में सूरज की हानिकारक किरणों से बचने के लिए ज्यादातर लोग सनस्क्रीन लगाते हैं। इस मौसम में सनस्क्रीन लगाना अनिवार्य मानी जाती है। सूरज की हानिकारण अल्ट्रावॉयलेट किरणों से त्वचा की सुरक्षा के लिए डॉक्टर भी सनस्क्रीन लगाने की सलाह देते हैं। लेकिन कई बार आपने भी सुना होगा कि सनस्क्रीन ज्यादा से ज्यादा लगाने से स्किन को नुकसान पहुंचता है।
इस लेख में हम आपको बताएंगे कि यह सत्य है या सिर्फ एक मिथक है। असल में स्किन एक्सपर्ट बताते हैं कि सही तरीके और सही मात्रा में सनस्क्रीन का इस्तेमाल त्वचा की सूरज की किरणों से होने वाले नुकसान और समय से पहले उम्र बढ़ने से बचाता है।
गौरतलब है कि हर किसी को त्वचा काफी अलग होती है और कुछ लोगों को कुछ विशेष प्रकार के केमिकल सनस्क्रीन से एलर्जी या ड्राईनेस जैसी समस्याएं होती है। क्योंकि सनस्क्रीन का चयन और नियमित इस्तेमाल बेहद ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। आइए आपको बताते हैं सनस्क्रीन सही मात्रा, टाइप और इस्तेमाल तरीके।
सनस्क्रीन के प्रकार
सनस्क्रीन मुख्य रुप से दो ही प्रकार की होती है। पहली केमिकल सनस्क्रीन, जो UV किरणों को त्वचा में अवशोषित करके उसे नुकसान पहुंचाती हैं। इसमें ऐसे तत्व होते हैं जो सूर्य की हानिकारक किरणों को छान लेते हैं। दूसरी फिजिकल या मिनरल सनस्क्रीन होती है, जो त्वचा की सतह पर एक परत बना देती है और UV किरणों को सीधे परिवर्तित करती है।
वहीं, फिजिकल सनस्क्रीन अक्सर संवेदनशील त्वचा के लिए बेहतर मानी जाती है क्योंकि यह कम एलर्जी पैदा करती है।
गलत धारणाएं
कई बार लोगों का लगता है कि सनस्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। यह बिल्कुल सच नहीं है। यह समस्या तब आती है जब कोई व्यक्ति अपनी स्किन के लिए गलत प्रोडक्ट का इस्तेमाल करता है या संवेदनशील त्वचा होने पर बहुत बार केमिकल सनस्क्रीन लगाता है। इसलिए सही उत्पाद और सही मात्रा में इसको जरुर लगाएं, तभी त्वचा की सुरक्षा होगी।
सही इस्तेमाल
गौरतलब है कि सनस्क्रीन का सही यूज त्वचा को सूरज की किरणों से बचाने के लिए सबसे जरुरी भूमिका निभाता है। इसे चेहरे, हाथों और शरीर के खुले हिस्सों पर लगाना चाहिए। रोजाना दो घंटे में दोबारा लगाना सही होता है। खासतौर पर जब आप पानी में जा रहे हैं या पसीना आ रहा है। SPF 30 या उससे ऊपर का सनस्क्रीन का चयन करें। वाटरप्रूफ सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना तभी जरुरी होता है जब तैराकी या एक्सट्रीम पसीना होने वाला हो।
साइड इफेक्ट्स
जिन लोगों की त्वचा केमिकल सनस्क्रीन से संवेदनशील हो जाती है, उनको जलन, लालिमा या रैशेस हो सकते हैं। लेकिन इसके सही प्रोडक्ट और उचित मात्रा में इस्तेमाल करने से ये जोखिम बहुत कम हो जाता है। फिजिकल या मिनलर सनस्क्री का इस्तेमाल संवेदनशील त्वचा के लिए सेफ होता है।
निष्कर्ष
सनस्क्रीन का इस्तेमाल स्किन के लिए सेफ रहता है। अगर आप ज्यादा सनस्क्रीन का यूज करते हैं, तो त्वचा खराब हो जाती है- यह सिर्फ एक मिथक है। इसलिए सही प्रकार की सनस्क्रीन का चुनें और रोजाना इसका प्रयोग करें, जिससे आपकी स्किन और भी खूबसूरत हो जाएगी। त्वचा को सूरज की हानिकारण किरणों, समय से पहले उम्र बढ़ने और स्किन कैंसर से बचा सकता है।


