8 हजार में तैयार की इलेक्ट्रिक साइकिल:ट्यूशन जाने में बेटी को होती थी परेशानी, पिता ने गिफ्ट की बैटरी से चलने वाली साइकिल

8 हजार में तैयार की इलेक्ट्रिक साइकिल:ट्यूशन जाने में बेटी को होती थी परेशानी, पिता ने गिफ्ट की बैटरी से चलने वाली साइकिल

कोडरमा के बिजली मिस्त्री धर्मप्रकाश ने अपनी बेटी की सुविधा के लिए एक सामान्य साइकिल को इलेक्ट्रिक साइकिल में परिवर्तित किया है। इसमें उन्हें 8 हजार रुपए खर्च करने पड़े। उनके इस नवाचार की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। बाजारा में बैटरी चालित साइकिल की कीमत 25 हजार से शुरू होती है। दरअसल, झुमरीतिलैया में बिशुनपुर रोड निवासी धर्मप्रकाश की छोटी बेटी पिंकी स्थानीय महाविद्यालय से वाणिज्य संकाय में स्नातक की पढ़ाई कर रही है। उसे प्रतिदिन लगभग 5 किलोमीटर दूर ट्यूशन जाने के लिए पहले ऑटो या टोटो का सहारा लेना पड़ता था। पैंडल मारने से थक जाती थी
बाद में धर्मप्रकाश ने पिंकी को एक साइकिल खरीद कर दी। हालांकि, लंबी दूरी तय करने के बाद पिंकी अक्सर थक जाती थी। अपनी बेटी की इस परेशानी को देखकर धर्मप्रकाश चिंतित हुए। साथ ही, वे टेलीविजन और सोशल मीडिया पर भविष्य में ईंधन की संभावित कमी से जुड़ी खबरें भी देखते थे। बेटी की थकान और भविष्य में ईंधन की समस्या को जोड़कर उनके मन में एक ऐसा समाधान खोजने का विचार आया, जिससे दोनों चुनौतियों से निपटा जा सके। इसी प्रेरणा से उन्होंने अपनी बेटी की सामान्य साइकिल को इलेक्ट्रिक साइकिल में बदलने का निर्णय लिया। एक सप्ताह में तैयार कर दी साइकिल
इस कार्य के लिए उन्होंने बाजार से 14 वोल्ट की बैटरी, एक मोटर और अन्य आवश्यक उपकरण खरीदे। मात्र एक सप्ताह की कड़ी मेहनत और लगभग 8 हजार रुपए की लागत से उन्होंने सामान्य साइकिल को सफलतापूर्वक इलेक्ट्रिक साइकिल में परिवर्तित कर दिया। पिता के इस आविष्कार ने पिंकी के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। पिंकी बताती है कि अब उसे ट्यूशन आने-जाने में न केवल समय की बचत होती है, बल्कि किसी प्रकार की थकावट भी महसूस नहीं होती। अब घर के अन्य सदस्य भी इस इलेक्ट्रिक साइकिल का उपयोग करने लगे हैं। युवावस्था से ही मशीनों से हो गया था लगाव
52 वर्षीय धर्म प्रकाश को शुरुआत से मशीनों से लगाव रहा है। वे घर में खराब पड़े किसी भी उपकरण को चाकू,चम्मच या किसी अन्य औजार से खोलते और उसे ठीक करने में जुट जाते थे। इनके पिता अक्षयवर यादव जो भारतीय सेना में कार्यरत थे, वे हमेशा चाहते थे कि धर्म प्रकाश पढ़ लिखकर अच्छी नौकरी करे, लेकिन धर्म प्रकाश को पढ़ाई में बिल्कुल भी मन नहीं लगता। 1990 में धर्मप्रकाश ने मैट्रिक पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी। इसके पश्चात वे घर में रखे सही सलामत उपकरणों को भी खोलकर हर रोज कुछ न कुछ नया कारनामा करने लगे। टीवी, रेडियो से लेकर एसी, जेट पंप और मोटरसाइकिल की भी कर देते हैं मरम्मती
धर्म प्रकाश, जिन्होंने बिजली मिस्त्री के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। अब वे बिजली से चलने वाले किसी भी उपकरण की मरम्मती कर देते हैं। ये न सिर्फ टीवी या रेडियो बल्कि एसी, फ्रिज, इंडक्शन, जेट पंप और यहां तक की बाइक की भी मरम्मती कर देते हैं। परिवार का मिला पूरा सहयोग
धर्मप्रकाश ने बताया कि वे अपनी पत्नी, दो पुत्री व एक पुत्र के साथ रहते हैं। बड़ी पुत्री पढ़ाई पूरी कर एक निजी विद्यालय में पढ़ाती है। वहीं, पुत्र स्नातक की पढ़ाई पूरी कर कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रहा है। जबकि पत्नी गृहिणी हैं। उन्होंने बताया कि बिजली उपकरणों की मरम्मती और इसके प्रति इसके जुनून को जारी रखने में इनके परिवार का बहुत बड़ा योगदान है। जब उन्होंने इस काम की शुरुआत की थी, तब उनकी आमदनी काफी कम थी। ऐसे में पत्नी ने इनका हौशला टूटने नहीं दिया बल्कि इनके इस काम का समर्थन करते हुए इनका साथ दिया। यही वजह है कि आज ये सालाना 6-7 लाख रुपए तक की घर बैठे ही आमदनी कर लेते हैं। कोडरमा के बिजली मिस्त्री धर्मप्रकाश ने अपनी बेटी की सुविधा के लिए एक सामान्य साइकिल को इलेक्ट्रिक साइकिल में परिवर्तित किया है। इसमें उन्हें 8 हजार रुपए खर्च करने पड़े। उनके इस नवाचार की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। बाजारा में बैटरी चालित साइकिल की कीमत 25 हजार से शुरू होती है। दरअसल, झुमरीतिलैया में बिशुनपुर रोड निवासी धर्मप्रकाश की छोटी बेटी पिंकी स्थानीय महाविद्यालय से वाणिज्य संकाय में स्नातक की पढ़ाई कर रही है। उसे प्रतिदिन लगभग 5 किलोमीटर दूर ट्यूशन जाने के लिए पहले ऑटो या टोटो का सहारा लेना पड़ता था। पैंडल मारने से थक जाती थी
बाद में धर्मप्रकाश ने पिंकी को एक साइकिल खरीद कर दी। हालांकि, लंबी दूरी तय करने के बाद पिंकी अक्सर थक जाती थी। अपनी बेटी की इस परेशानी को देखकर धर्मप्रकाश चिंतित हुए। साथ ही, वे टेलीविजन और सोशल मीडिया पर भविष्य में ईंधन की संभावित कमी से जुड़ी खबरें भी देखते थे। बेटी की थकान और भविष्य में ईंधन की समस्या को जोड़कर उनके मन में एक ऐसा समाधान खोजने का विचार आया, जिससे दोनों चुनौतियों से निपटा जा सके। इसी प्रेरणा से उन्होंने अपनी बेटी की सामान्य साइकिल को इलेक्ट्रिक साइकिल में बदलने का निर्णय लिया। एक सप्ताह में तैयार कर दी साइकिल
इस कार्य के लिए उन्होंने बाजार से 14 वोल्ट की बैटरी, एक मोटर और अन्य आवश्यक उपकरण खरीदे। मात्र एक सप्ताह की कड़ी मेहनत और लगभग 8 हजार रुपए की लागत से उन्होंने सामान्य साइकिल को सफलतापूर्वक इलेक्ट्रिक साइकिल में परिवर्तित कर दिया। पिता के इस आविष्कार ने पिंकी के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। पिंकी बताती है कि अब उसे ट्यूशन आने-जाने में न केवल समय की बचत होती है, बल्कि किसी प्रकार की थकावट भी महसूस नहीं होती। अब घर के अन्य सदस्य भी इस इलेक्ट्रिक साइकिल का उपयोग करने लगे हैं। युवावस्था से ही मशीनों से हो गया था लगाव
52 वर्षीय धर्म प्रकाश को शुरुआत से मशीनों से लगाव रहा है। वे घर में खराब पड़े किसी भी उपकरण को चाकू,चम्मच या किसी अन्य औजार से खोलते और उसे ठीक करने में जुट जाते थे। इनके पिता अक्षयवर यादव जो भारतीय सेना में कार्यरत थे, वे हमेशा चाहते थे कि धर्म प्रकाश पढ़ लिखकर अच्छी नौकरी करे, लेकिन धर्म प्रकाश को पढ़ाई में बिल्कुल भी मन नहीं लगता। 1990 में धर्मप्रकाश ने मैट्रिक पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी। इसके पश्चात वे घर में रखे सही सलामत उपकरणों को भी खोलकर हर रोज कुछ न कुछ नया कारनामा करने लगे। टीवी, रेडियो से लेकर एसी, जेट पंप और मोटरसाइकिल की भी कर देते हैं मरम्मती
धर्म प्रकाश, जिन्होंने बिजली मिस्त्री के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। अब वे बिजली से चलने वाले किसी भी उपकरण की मरम्मती कर देते हैं। ये न सिर्फ टीवी या रेडियो बल्कि एसी, फ्रिज, इंडक्शन, जेट पंप और यहां तक की बाइक की भी मरम्मती कर देते हैं। परिवार का मिला पूरा सहयोग
धर्मप्रकाश ने बताया कि वे अपनी पत्नी, दो पुत्री व एक पुत्र के साथ रहते हैं। बड़ी पुत्री पढ़ाई पूरी कर एक निजी विद्यालय में पढ़ाती है। वहीं, पुत्र स्नातक की पढ़ाई पूरी कर कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रहा है। जबकि पत्नी गृहिणी हैं। उन्होंने बताया कि बिजली उपकरणों की मरम्मती और इसके प्रति इसके जुनून को जारी रखने में इनके परिवार का बहुत बड़ा योगदान है। जब उन्होंने इस काम की शुरुआत की थी, तब उनकी आमदनी काफी कम थी। ऐसे में पत्नी ने इनका हौशला टूटने नहीं दिया बल्कि इनके इस काम का समर्थन करते हुए इनका साथ दिया। यही वजह है कि आज ये सालाना 6-7 लाख रुपए तक की घर बैठे ही आमदनी कर लेते हैं।  

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