जालंधर | आर्थिक तंगी के कारण अब किसी भी होनहार छात्र की पढ़ाई बीच में नहीं छूटेगी। केंद्र और पंजाब सरकार द्वारा अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए कई महत्वपूर्ण स्कॉलरशिप योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाना और जरूरतमंद बच्चों को फीस, किताबों व हॉस्टल के खर्चों में वित्तीय सहायता प्रदान करना है। नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप ःयह योजना सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के कक्षा 8वीं के छात्र के लिए है। इसमें माता-पिता की सालाना आय 3.50 लाख से कम हो और 7वीं में 55% अंक (एससी/एसटी के लिए 50%) हों। छात्रों को एमएटी और एसएटी परीक्षा पास करनी होती है। चयनित छात्रों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक प्रति वर्ष 12,000 की राशि सीधे बैंक खाते में मिलती है। पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप (एससी छात्र) के लिए10वीं के बाद कॉलेज, यूनिवर्सिटी या प्रोफेशनल कोर्स करने वाले अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए यह योजना वरदान है। इसमें परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख से कम होनी चाहिए। प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप (एससी छात्र) में यह कक्षा 9वीं और 10वीं में पढ़ने वाले एससी छात्रों के लिए है। इसके लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा ₹2 लाख तय की गई है। इसमें किताबों के लिए अतिरिक्त अनुदान भी मिलता है। इसके साथ ही अल्पसंख्यक समुदाय हेतु प्री-मैट्रिक स्कीम में सिख, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के कक्षा 1 से 10वीं तक के छात्र इसके पात्र हैं। इसमें पिछली कक्षा में कम से कम 50% अंक और परिवार की सालाना आय ₹1 लाख से कम हो। पिछड़ा वर्ग के उन छात्रों के लिए जो 10वीं के बाद उच्च शिक्षा ले रहे हैं। आय सीमा ₹1 लाख वार्षिक है। योजना के तहत ट्यूशन फीस और मासिक मेंटेनेंस अलाउंस का प्रावधान है। सरकार ने अब पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल और राज्य के पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य कर दिया है।


