मोतिहारी में राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) से जुड़े लोडिंग-अनलोडिंग मजदूरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मंगलवार को हड़ताल कर जोरदार प्रदर्शन किया। फूड एंड एलाइड वर्कर्स यूनियन के बैनर तले जिलेभर के मजदूर जिला प्रबंधक कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए और धरना दिया। यूनियन का आरोप है कि मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, बकाया भुगतान और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ देने में लगातार अनियमितता बरती जा रही है। मजदूरों का कहना है कि अधिकारियों को कई बार अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं की गई, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। उच्च न्यायालय ने श्रमिकों के पक्ष में आदेश जारी किया था मजदूरों ने बताया कि उच्च न्यायालय ने 7 अगस्त 2025 को श्रमिकों के पक्ष में आदेश जारी किया था। इसके बाद विभागीय स्तर पर भी न्यूनतम मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, पूर्वी चम्पारण जिले में इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है, जिसे यूनियन न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और श्रमिकों के अधिकारों का हनन मान रही है। यूनियन से जुड़े मजदूरों के अनुसार, 1 अक्टूबर 2022 से न्यूनतम मजदूरी दर 10.20 रुपये प्रति इकाई निर्धारित की गई थी, जिसे हर छह महीने पर संशोधित किया गया। मार्च 2026 तक यह दर बढ़कर 11.65 रुपये प्रति इकाई हो गई है। इसके बावजूद कई स्थानों पर अभी भी पुराने दर से भुगतान किया जा रहा है, जिससे मजदूरों का भारी बकाया बन गया है। यूनियन ने इस संबंध में जिला प्रबंधक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है। राशि संबंधित खातों में जमा नहीं हो रही इसके अतिरिक्त, मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनके वेतन से 12 प्रतिशत पीएफ और 0.75 प्रतिशत ईएसआई की कटौती तो की जा रही है, लेकिन यह राशि संबंधित खातों में जमा नहीं हो रही है। यह एक गंभीर अनियमितता है। हड़ताल के चलते राज्य के खाद्य आपूर्ति तंत्र पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। वहीं, हड़ताल के बाद प्रशासन और एसएफसी अधिकारियों पर दबाव बढ़ गया है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग समय रहते क्या कदम उठाता है, ताकि संभावित संकट को टाला जा सके। मोतिहारी में राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) से जुड़े लोडिंग-अनलोडिंग मजदूरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मंगलवार को हड़ताल कर जोरदार प्रदर्शन किया। फूड एंड एलाइड वर्कर्स यूनियन के बैनर तले जिलेभर के मजदूर जिला प्रबंधक कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए और धरना दिया। यूनियन का आरोप है कि मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, बकाया भुगतान और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ देने में लगातार अनियमितता बरती जा रही है। मजदूरों का कहना है कि अधिकारियों को कई बार अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं की गई, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। उच्च न्यायालय ने श्रमिकों के पक्ष में आदेश जारी किया था मजदूरों ने बताया कि उच्च न्यायालय ने 7 अगस्त 2025 को श्रमिकों के पक्ष में आदेश जारी किया था। इसके बाद विभागीय स्तर पर भी न्यूनतम मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, पूर्वी चम्पारण जिले में इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है, जिसे यूनियन न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और श्रमिकों के अधिकारों का हनन मान रही है। यूनियन से जुड़े मजदूरों के अनुसार, 1 अक्टूबर 2022 से न्यूनतम मजदूरी दर 10.20 रुपये प्रति इकाई निर्धारित की गई थी, जिसे हर छह महीने पर संशोधित किया गया। मार्च 2026 तक यह दर बढ़कर 11.65 रुपये प्रति इकाई हो गई है। इसके बावजूद कई स्थानों पर अभी भी पुराने दर से भुगतान किया जा रहा है, जिससे मजदूरों का भारी बकाया बन गया है। यूनियन ने इस संबंध में जिला प्रबंधक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है। राशि संबंधित खातों में जमा नहीं हो रही इसके अतिरिक्त, मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनके वेतन से 12 प्रतिशत पीएफ और 0.75 प्रतिशत ईएसआई की कटौती तो की जा रही है, लेकिन यह राशि संबंधित खातों में जमा नहीं हो रही है। यह एक गंभीर अनियमितता है। हड़ताल के चलते राज्य के खाद्य आपूर्ति तंत्र पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। वहीं, हड़ताल के बाद प्रशासन और एसएफसी अधिकारियों पर दबाव बढ़ गया है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग समय रहते क्या कदम उठाता है, ताकि संभावित संकट को टाला जा सके।


