नासिक के सप्तश्रृंगी देवी मंदिर में ‘चोरी’, गर्भगृह से 23 किलो चांदी गायब, मचा हड़कंप

नासिक के सप्तश्रृंगी देवी मंदिर में ‘चोरी’, गर्भगृह से 23 किलो चांदी गायब, मचा हड़कंप

लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र नासिक के सप्तश्रृंगी मंदिर को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मंदिर के गर्भगृह के नक्काशी कार्य में इस्तेमाल की गई चांदी में भारी हेराफेरी का आरोप लगा है। विभागीय आयुक्त कार्यालय की जांच में सामने आया है कि गर्भगृह से लगभग 22.5 किलो चांदी गायब है। इस मामले में अब ट्रस्ट के तत्कालीन अध्यक्ष, ट्रस्टियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग हो रही है।

रिकॉर्ड और वास्तविक वजन में बड़ा अंतर

सामाजिक कार्यकर्ता विठोबा द्यानद्यान द्वारा जिलाधिकारी को सौंपी गई शिकायत के अनुसार, मंदिर की पुरानी फाइलों और अभिलेखों में गर्भगृह की नक्काशी के लिए 406 किलो चांदी के उपयोग का जिक्र है। हालांकि, जब इस चांदी की वास्तविक जांच की गई, तो वहां केवल 383 किलो 703 ग्राम चांदी ही उपलब्ध पाई गई। इस तरह सीधे तौर पर 22 किलो से ज्यादा चांदी कम पाई गई है, जिसे लेकर बड़े स्तर पर गबन और भ्रष्टाचार का संदेह जताया जा रहा है।

रात में हटाई गई चांदी, बड़ा खुलासा

अब तक जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि 15 सितंबर 2021 को ट्रस्ट ने चांदी को दिन के उजाले में मूल्यांकनकर्ता की मौजूदगी निकालने का प्रस्ताव पारित किया था। लेकिन, अगले ही दिन ट्रस्ट के प्रबंधक सुदर्शन दहातोंडे की अनुपस्थिति में रात के समय गुपचुप तरीके से गर्भगृह की चांदी निकाल ली गई। प्रबंधक द्वारा तत्कालीन अध्यक्ष और धर्मादाय आयुक्त को लिखे गए पत्र ने इस गुप्त कार्रवाई की पोल खोल दी है, जो अब इस मामले में सबसे बड़ा सबूत बनकर उभरा है।

सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर कार्रवाई तेज

इस पूरे मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता विठोबा द्यानद्यान ने जिलाधिकारी से शिकायत कर तत्कालीन ट्रस्ट अध्यक्ष, ट्रस्टियों और संबंधित अधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर गबन की गई चांदी की कीमत ब्याज सहित वसूलने की मांग की है।

उच्चस्तरीय जांच शुरू

विभागीय आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर आयुक्त (राजस्व) जितेंद्र वाघ को जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, जिला प्रशासन ने भी सहायक जिलाधिकारी (कलवन), तहसीलदार को इस मामले की गहन जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़

जांच के दौरान ट्रस्ट प्रबंधक सुदर्शन दहातोंडे द्वारा अध्यक्ष और धर्मादाय आयुक्त को लिखा गया पत्र अहम सबूत के रूप में सामने आया है, जिसमें चांदी हटाने की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।

सप्तश्रृंगी मंदिर महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक है। सप्तशृंगी मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर इस तरह की कथित अनियमितता सामने आने से श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और कार्रवाई पर टिकी है, ताकि सच सामने आ सके और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

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