Stock Market: सिर्फ 3 महीने में भारतीयों ने शेयर बाजार में गंवा दिये 12.6 लाख करोड़ रुपये, लेकिन जिसने कोविड में खरीदा उसे अब भी मुनाफा

Stock Market: सिर्फ 3 महीने में भारतीयों ने शेयर बाजार में गंवा दिये 12.6 लाख करोड़ रुपये, लेकिन जिसने कोविड में खरीदा उसे अब भी मुनाफा

Stock Market Outlook: इस साल शेयर बाजार में बड़ी संख्या में रिटेल निवेशकों ने अपना काफी पैसा गंवाया है। जनवरी, फरवरी और मार्च, इन 3 महीनों में ही निवेशकों को 12.6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया है। निवेशकों को समझ नहीं आ रहा कि बाजार में आखिर हो क्या रहा है। अब तो धैर्य भी जवाब देने लगा है। दरअसल, इस दौरान एक साथ कई मोर्चों पर दबाव बना। मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की हवा निकाल दी। निफ्टी मार्च तिमाही में 10 फीसदी से ज्यादा टूट गया, जो पिछले कुछ सालों की सबसे बड़ी गिरावटों में गिनी जा रही है।

NSE की मार्केट पल्स रिपोर्ट के मुताबिक, एनएसई में लिस्टेड कंपनियों में भारतीय परिवारों की कुल हिस्सेदारी, जिसमें सीधे खरीदे गए शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश दोनों शामिल हैं, घटकर 76.5 लाख करोड़ रुपये रह गई। यह करीब 13 फीसदी की गिरावट है। सालभर की गिरावट में सबसे बड़ा हिस्सा सिर्फ मार्च तिमाही का रहा।

लॉन्ग टर्म निवेशकों को अब भी मुनाफा

हालांकि, तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक भी नहीं है। कोरोना महामारी के बाद अप्रैल 2020 से अब तक भारतीय परिवारों ने शेयर बाजार से करीब 44 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई है। इन्हें 29.6 फीसदी औसत सालाना रिटर्न मिला है। इसका मतलब यह है कि लॉन्ग टर्म निवेश में निवेशकों को अब भी बाजार ने अच्छा रिटर्न दिया है, भले ही बीच-बीच में झटके लगते रहे हों।

17 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंची FPI की हिस्सेदारी

विदेशी निवेशकों ने इस साल भारतीय बाजार से जमकर पैसा निकाला। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI ने करीब 19.6 अरब डॉलर की बिकवाली की। NSE में उनकी हिस्सेदारी घटकर 17 साल के सबसे निचले स्तर 15.8 फीसदी पर पहुंच गई है।

भारतीय बाजार में क्यों आई गिरावट?

भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी की एक बड़ी वजह यह भी रही कि दुनियाभर का पैसा अब AI और सेमीकंडक्टर थीम वाले बाजारों की तरफ जा रहा है। ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को इसका बड़ा फायदा मिला। वहीं, भारत में अभी ऐसी बड़ी लिस्टेड AI कंपनियां कम हैं, जो विदेशी निवेशकों को उसी तरह आकर्षित कर सकें। इसके बावजूद भारतीय निवेशकों का भरोसा पूरी तरह टूटा नहीं है। खास बात यह रही कि SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में पैसा लगातार आता रहा। घरेलू म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 11.4 फीसदी तक पहुंच गई है। यह लगातार 11वीं तिमाही है जब म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी नए उच्च स्तर पर रही।

शेयरों के बजाय म्यूचुअल फंड्स को चुन रहे निवेशक

एक दिलचस्प बदलाव यह भी देखने को मिला कि लोग अब सीधे शेयर खरीदने से ज्यादा म्यूचुअल फंड्स के जरिए निवेश करना पसंद कर रहे हैं। व्यक्तिगत निवेशकों की डायरेक्ट हिस्सेदारी घटकर पांच साल के निचले स्तर 9.1 फीसदी पर आ गई है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं कि लोग बाजार छोड़ रहे हैं। असल में निवेश का तरीका बदल रहा है।

पीएसयू कंपनियों ने किया अच्छा परफॉर्म

सरकारी कंपनियों यानी PSU शेयरों ने इस दौरान अपेक्षाकृत बेहतर परफॉर्म किया। सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और घरेलू सेक्टरों पर निवेशकों के भरोसे ने इन शेयरों को सहारा दिया। दूसरी तरफ प्राइवेट सेक्टर के कई बड़े शेयर दबाव में रहे।

कुल मिलाकर स्टॉक मार्केट का माहौल अभी भी आसान नहीं दिख रहा। महंगा तेल, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की रणनीति भारतीय बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। लेकिन SIP निवेशकों का धैर्य यह दिखा रहा है कि लंबी रेस के खिलाड़ी अभी मैदान छोड़ने के मूड में नहीं हैं।

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