Sri Ganganagar Crime : श्रीगंगानगर साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन म्यूल हंटर के तहत कोतवाली पुलिस ने साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों के नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महालक्ष्मी नगर निवासी शुभम सेतिया ने कथिततौर पर ऐसे लोगों से बैंक खाते लिए, जिन्हें रुपयों की जरूरत थी। खाते के बदले खाताधारकों को हर महीने करीब 10 हजार रुपए का भुगतान किया जाता था। इसके बाद एटीएम और पासबुक अपने कब्जे में लेकर इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम निकालने और ट्रांसफर करने में किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, जांच में शुभम सेतिया को इस नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक वह अविवाहित है और अपनी मां के साथ रहता है। पुलिस का कहना है कि उसने कथित तौर पर फर्जी ज्योतिषी बनकर विदेश में रहने वाले लोगों से ठगी की थी। इसके बाद वह संगठित साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़ गया।
10-12 युवकों को जोड़ कर जुटाए बैंक खाते
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शुभम सेतिया ने अपने साथ करीब 10 से 12 युवकों को जोड़ रखा था। ये युवक ऐसे लोगों की तलाश करते थे, जिन्हें तत्काल रुपयों की जरूरत होती थी। उन्हें मासिक भुगतान का लालच देकर बैंक खाते इस्तेमाल के लिए लिए जाते थे। खाताधारकों से बैंक खाते के साथ एटीएम और पासबुक भी ले ली जाती थी। इसके बाद अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी के शिकार लोगों से ठगी गई रकम इन खातों में जमा कराई जाती और फिर को एटीएम या अन्य माध्यमों से निकाल लिया जाता था।
ठगी की रकम से खरीदे भूखंड
पुलिस के अनुसार, खातों में भारी रकम का लेन-देन होने के बाद आरोपी ने श्रीगंगानगर की रिद्धि-सिद्धि कॉलोनी सहित अन्य पॉश कॉलोनियों में महंगे भूखंड खरीदे। पुलिस अब साइबर ठगी से अर्जित रकम से बनाई गई संपत्ति का पता लगाने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद चल-अचल संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
पूछताछ में खाताधारक ने बताई पूरी कहानी
पुलिस ने जब आकाशदीप से पूछताछ की तो उसने कथिततौर पर बताया कि शुभम सेतिया ने उसके बैंक खाते का इस्तेमाल करने के लिए लिया था। इसके बदले उसे हर महीने 10 हजार रुपए दिए जाते थे। खाते की बैंकिंग सुविधाओं और एटीएम का इस्तेमाल आरोपी करता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने बैंक खाते इस्तेमाल हुए, उनमें कितनी रकम का लेन-देन हुआ और साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों की इसमें क्या भूमिका रही।
पोर्टल पर शिकायतों से खुला बैंक खाते का राज
कोतवाली पुलिस के अनुसार, समन्वय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर साइबर ठगी से संबंधित कई शिकायतें दर्ज हुई थीं। इन शिकायतों की जांच के दौरान कोतवाली क्षेत्र के स्वामी दयानंद मार्ग स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा के एक खाते में साइबर ठगी की रकम जमा होने की जानकारी सामने आई। पुलिस को तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और उत्तरप्रदेश सहित अलग-अलग राज्यों के पीड़ितों की ओर से दर्ज कराई गई चार शिकायतों में इस बैंक खाते से लेन-देन का कनेक्शन मिला। इसके बाद पुलिस ने खाते की जानकारी जुटाई तो वह आकाशदीप पुत्र रमेश सिंह, निवासी एसएसबी रोड, गली नंबर दो, आटा चक्की के पास, श्रीगंगानगर के नाम से संचालित मिला।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
जांच में अलग-अलग राज्यों के पीड़ितों से जुड़े मामले सामने आने के बाद पुलिस को आशंका है कि साइबर ठगी का यह नेटवर्क श्रीगंगानगर से बाहर तक फैला हुआ है। पुलिस बैंक खातों में हुए लेन-देन, मोबाइल नंबरों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
इधर, कोतवाली सीआई तेजवंत सिंह ने बताया कि मास्टर माइंड शुभम सेतिया के घर पर दबिश दी गई लेकिन वह गायब मिला। आरोपी की चल-अचल संपतियों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। इसके बाद इन संपतियों को सीज करने की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी।

