मिर्जापुर में ध्वनि एवं ध्यान कार्यशाला का समापन:प्रतिभागियों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया

मिर्जापुर में ध्वनि एवं ध्यान कार्यशाला का समापन:प्रतिभागियों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया

मिर्जापुर में पंडित छन्नूलाल मिश्र संगीत न्यास, काशी द्वारा आयोजित 11 दिवसीय “ध्वनि एवं ध्यान” कार्यशाला का सेठ द्वारका प्रसाद बजाज एजुकेशन सेंटर में समापन हो गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को संगीत, योग, ध्यान और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से मानसिक, शारीरिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाना था। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की विभिन्न विधाओं का गहन प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही, योग और ध्यान की विशेष कक्षाओं के माध्यम से एकाग्रता, आत्मविश्वास और मानसिक शांति के महत्व पर जोर दिया गया। बच्चों और अन्य प्रतिभागियों ने सभी गतिविधियों में पूरे समर्पण और उत्साह के साथ सक्रिय भागीदारी की। समापन समारोह में प्रतिभागियों ने कार्यशाला में सीखे गए ज्ञान और कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उनकी मधुर संगीत प्रस्तुतियां, योगाभ्यास और ध्यान प्रदर्शन ने उपस्थित अतिथियों और अभिभावकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए मुख्य अतिथि पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि संगीत और ध्यान जीवन को सकारात्मक दिशा देते हैं। उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला और इस आयोजन को नई पीढ़ी के लिए अत्यंत उपयोगी तथा प्रेरणादायी बताया। कार्यक्रम में डॉ. राजेश रंजन और पृथ्वी नारंग विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. शिवानी कौशिक ने अतिथियों का स्वागत किया और न्यास अध्यक्ष व प्रशिक्षिका प्रो. डॉ. नम्रता मिश्रा के प्रति सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में सहायक होती हैं। विद्यालय के डायरेक्टर परितोष बजाज ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा के साथ संगीत, योग और ध्यान जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों को संस्कारवान, रचनात्मक और आत्मविश्वासी बनाती हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन कुलभूषण पाठक ने किया। समारोह के अंत में मुख्य अतिथि के हाथों सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। यह कार्यक्रम उत्साह, प्रेरणा और नई ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ।

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