सोनीपत जिले की युवा पहलवान काजल ने एक बार फिर अपने शानदार प्रदर्शन से पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। महाराष्ट्र में आयोजित तीन दिवसीय नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में काजल ने 65 प्लस भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर हिंद केसरी का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता में देशभर से 65 महिला पहलवानों ने हिस्सा लिया था, लेकिन काजल ने हर मुकाबले में अपना दबदबा कायम रखते हुए जीत की सुनहरी कहानी लिख दी। उनकी इस उपलब्धि से सोनीपत ही नहीं, पूरे हरियाणा में खुशी का माहौल है। काजल की इस ऐतिहासिक जीत पर उन्हें इनाम के तौर पर एक ऑटो कार और दो किलो चांदी की गदा देकर सम्मानित किया गया। सोनीपत पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया, जहां मेयर राजीव जैन ने भी उन्हें सम्मानित कर बधाई दी। महाराष्ट्र में दिखाया दम, बनीं हिंद केसरी महाराष्ट्र में आयोजित इस तीन दिवसीय प्रतियोगिता में देशभर से करीब 400 से ज्यादा खिलाड़ियों ने भाग लिया था। 65 प्लस भार वर्ग में काजल ने अपने अनुभव और शानदार तकनीक के दम पर सभी 25 प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ते हुए गोल्ड मेडल जीता। लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने हिंद केसरी का खिताब हासिल किया। इससे पहले भी वह कई बार भारत केसरी बन चुकी हैं और अब हिंद केसरी बनने के बाद उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हो गई है। ओलिंपिक में मेडल जीतना है सपना काजल का सपना अब ओलिंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। उन्होंने कहा कि वह लगातार मेहनत कर रही हैं और आने वाले वर्षों में भारत का झंडा दुनिया के सबसे बड़े मंच पर बुलंद करना चाहती हैं। परिवार और कोच भी उनकी तैयारी को लेकर पूरी मेहनत कर रहे हैं। काजल का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि देश के लिए पदक जीतना है। विश्व चैंपियनशिप में भी लहरा चुकी हैं परचम काजल इससे पहले बुल्गारिया के समोकोव में आयोजित अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन कर चुकी हैं। उन्होंने 72 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में चीन की यूकी लियू को 8-6 से हराकर विश्व खिताब अपने नाम किया था। मुकाबले में काजल ने बेहतरीन तकनीक और आत्मविश्वास का प्रदर्शन करते हुए चीन की पहलवान को करारी शिकस्त दी थी।
लगातार दूसरा विश्व खिताब जीतकर रचा इतिहास काजल का यह लगातार दूसरा विश्व चैंपियनशिप गोल्ड रहा। इससे पहले वर्ष 2024 में उन्होंने अंडर-17 विश्व चैंपियनशिप में 69 किलोग्राम भार वर्ग में यूक्रेन की ओलेक सांद्रा रिबाक को 9-2 से हराकर गोल्ड मेडल जीता था। लगातार दो विश्व खिताब जीतकर काजल ने यह साबित कर दिया कि वह भारतीय महिला कुश्ती की भविष्य की बड़ी स्टार हैं। टैक्सी ड्राइवर की बेटी ने संघर्ष से बनाई पहचान सोनीपत के गांव लाठ में जन्मी काजल साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता टैक्सी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव मेहनत कर रहे हैं। काजल ने मात्र 9 साल की उम्र में कुश्ती शुरू की थी। उनके चाचा कृष्ण पहलवान का सपना था कि परिवार से कोई बड़ा पहलवान बने और इसी प्रेरणा ने काजल को अखाड़े तक पहुंचाया। आज उनकी मेहनत और परिवार के समर्थन ने उन्हें देश की बड़ी महिला पहलवानों की कतार में खड़ा कर दिया है। 16 साल की उम्र में 16 बार बनीं भारत केसरी
कम उम्र में ही काजल ने कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। महज 16 साल की उम्र में वह 16 बार भारत केसरी का खिताब जीत चुकी हैं। लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर वह महिला कुश्ती में नया इतिहास रच रही हैं। गांव लाठ में जश्न का माहौल
काजल की इस उपलब्धि से उनके गांव लाठ में खुशी की लहर है। गांव में उनके स्वागत की भव्य तैयारियां की जा रही हैं। परिवार के सदस्यों का कहना है कि काजल सबसे पहले गांव पहुंचकर अपने आराध्य देव के दर्शन करेंगी। ग्रामीणों और खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में काजल ओलिंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाएंगी।


