सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर जेल से ‘गायब’:वन विभाग ने हिरासत में लेने की पुष्टि की; महिलाएं बोलीं- जब तक रिहाई नहीं होगी, अन्न-जल नहीं लेंगे

सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर जेल से ‘गायब’:वन विभाग ने हिरासत में लेने की पुष्टि की; महिलाएं बोलीं- जब तक रिहाई नहीं होगी, अन्न-जल नहीं लेंगे

पन्ना जिले में सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की हिरासत को लेकर सियासी और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। मामला केन-बेतवा लिंक परियोजना, टाइगर रिजर्व के कोर एरिया और आदिवासियों के अधिकारों से जुड़ा है। घटना की शुरुआत तब हुई जब अमित भटनागर, जो लंबे समय से केन-बेतवा लिंक परियोजना और रुंझ डैम से प्रभावित आदिवासियों के मुआवजे और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे। जेल से रिहा होने के बाद ‘लापता’ हो गए। पुलिस टीम पर साथ ले जाने का आरोप अमित के भाई अंकित भटनागर ने मंगलवार देर शाम एक वीडियो संदेश जारी कर पुलिस और जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। अंकित के अनुसार, अजयगढ़ न्यायालय से जमानत मिलने के बाद जब वे अपने भाई को लेने जेल पहुंचे, तो जेल प्रशासन ने बताया कि अमित वहां मौजूद नहीं हैं। अंकित ने आरोप लगाया कि पुलिस और वन विभाग की टीम अमित को जेल से छूटते ही अपने साथ ले गई। अंकित भटनागर ने पुलिस और प्रशासन से सवाल किया, “अगर मेरे भाई को दोबारा गिरफ्तार किया गया था, तो परिवार को सूचित क्यों नहीं किया गया? उन्हें रात के अंधेरे में कहां रखा गया? क्या यह गिरफ्तारी है या कानूनी अपहरण?” देखिए प्रदर्शन की तस्वीरें… कोर एरिया में प्रदर्शन करने पर वन विभाग ने पकड़ा मामले ने तब तूल पकड़ा जब पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) के डिप्टी डायरेक्टर बीके पटेल ने पुष्टि की कि अमित भटनागर को वन विभाग की टीम ने पकड़ा है। विभाग का तर्क है कि अमित भटनागर बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के टाइगर रिजर्व के ‘कोर एरिया’ ढोढन बांध क्षेत्र में ग्रामीणों के साथ प्रदर्शन कर रहे थे। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत यह क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित है और यहां अनधिकृत प्रवेश एक गंभीर अपराध है। वहीं जब परिजनों को मामले की जनकारी न देने को लेकर सवाल किया तो कहा कि अमित के भाई को व्हाटसअप पर जनकारी दी गई थी। फिर थाने में उनकी मोबाइल से बात भी कराई गई। कहां की कोर्ट के नियमानुसार ही कार्रवाई की और मंगलवार को अमित को न्यायालय में पेश किया गया। जीतू पटवारी की पर भी अपराध दर्ज अमित भटनागर की गुमशुदगी और आदिवासियों के दमन की खबर मिलते ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पन्ना पहुंचे। प्रशासन की टीन ने पटवारी के काफिले को भूसौर नाका पर रोक दिया, जिसके बाद प्रदेश अध्यक्ष पीछे हटने के बजाय वैकल्पिक रास्ते को चुना। जीतू पटवारी और यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष अभिषेक परमार अपने समर्थकों के साथ बाइक पर सवार होकर जंगलों के रास्ते प्रतिबंधित ढोढन बांध क्षेत्र पहुंचे। आदिवासियों के बीच पहुंचकर उन्होंने सरकार पर जमकर निशाना साधा। हालांकि, इससे उन्हें कानूनी मुश्किलों में डाल दिया है। पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने जीतू पटवारी, अभिषेक परमार और उनके दर्जनों समर्थकों के खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत नामजद मामला दर्ज कर लिया है। विस्थापन और मुआवजे को लेकर आक्रोश केन-बेतवा परियोजना को लेकर पन्ना में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ढोढन बांध से प्रभावित आदिवासी और किसान विस्थापन, मुआवजे और पुनर्वास को लेकर विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मुआवजा सर्वे पारदर्शी नहीं है और बिना उचित प्रक्रिया के राशि वितरण किया जा रहा है। साथ ही पुनर्वास की स्पष्ट नीति भी सामने नहीं लाई गई है। ग्रामीण महिलाओं का रुख: “हमें सिर्फ अमित भाई साहब चाहिए” जीतू पटवारी के दौरे के बावजूद, प्रदर्शनकारी महिलाओं के सुर कुछ अलग नजर आए। उनका पूरा ध्यान अपने नेता अमित भटनागर की रिहाई पर टिका है। शीला आदिवासी (पलकुआ निवासी) ने कहा कि “जीतू पटवारी आए, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। उन्होंने सिर्फ पेड़-पौधे कटने की बात की, पर हमें न्याय नहीं मिला। हमें तो हमारे भाई साहब अमित भटनागर चाहिए, उनके आने पर ही न्याय मिलेगा।” मुन्नी आदिवासी ने कहा कि “हमारी पहली और आखिरी मांग अमित भाई साहब को बाहर निकालने की है। जब तक वे नहीं आएंगे, हम यहां से नहीं हटेंगे और न ही अन्न-पानी ग्रहण करेंगे। पहले उन्हें निकालो, मांगें बाद की बात हैं।” मुआवजे और गिरफ्तारी को लेकर आदिवासियों में आक्रोश इधर, पन्ना टाइगर रिजर्व प्रशासन कोर एरिया में प्रदर्शन को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई कर रहा है। अमित भटनागर की गिरफ्तारी और जीतू पटवारी पर पीओआर दर्ज होने के बाद मामला और गरमा गया है। वन विभाग अन्य प्रदर्शनकारियों की पहचान में जुटा है, जबकि आदिवासी संगठनों और किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। अमित भटनागर की रिहाई और उचित मुआवजे की मांग को लेकर पहले ही एसपी कार्यालय का घेराव किया जा चुका है। अब यह विवाद केवल स्थानीय आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।

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