Shooting World Cup: Esha Singh ने पिस्टल से साधा निशाना, World Record के साथ Gold पर किया कब्जा

Shooting World Cup: Esha Singh ने पिस्टल से साधा निशाना, World Record के साथ Gold पर किया कब्जा

म्यूनिख से भारतीय निशानेबाजी के लिए बड़ी और गर्व भरी खबर सामने आई है। युवा निशानेबाज ईशा सिंह ने आईएसएसएफ विश्व कप में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में नया विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया है। सिर्फ 21 साल की ईशा ने फाइनल में 43 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीतते हुए दक्षिण कोरिया की किम येजी का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने वर्ष 2024 में बाकू विश्व कप में 42 अंक बनाए थे।गौरतलब है कि इस मुकाबले में पेरिस ओलंपिक चैंपियन यांग जिन और पूर्व विश्व चैंपियन डोरीन वेनेकैंप जैसी दिग्गज खिलाड़ी भी मौजूद थीं। हालांकि ईशा ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा और पहले तीन सीरीज में एक भी अंक नहीं गंवाया। जर्मनी की डोरीन वेनेकैंप ने 38 अंकों के साथ रजत पदक जीता, जबकि यांग जिन पांचवें स्थान पर रहीं।मौजूद जानकारी के अनुसार ईशा सिंह की इस सफलता के पीछे पिछले चार वर्षों की लगातार मेहनत और खास तकनीकी प्रशिक्षण रहा है। उनके कोच रोनक पंडित ने उन्हें अलग शैली में प्रशिक्षण दिया। आमतौर पर निशानेबाज तेजी से हाथ उठाकर निशाना लगाते हैं, लेकिन ईशा को धीरे हाथ उठाने और उसी मूवमेंट में ट्रिगर दबाने की ट्रेनिंग दी गई। यही तकनीक म्यूनिख में उनके लिए सबसे बड़ी ताकत साबित हुई है।ईशा सिंह ने मुकाबले के बाद कहा कि 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा काफी चुनौतीपूर्ण होती है और इसमें शुरुआत से बढ़त बनाना बहुत जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि वह फाइनल के दौरान बाकी खिलाड़ियों या उनके नामों पर ध्यान नहीं देतीं, बल्कि सिर्फ अपनी प्रक्रिया और मानसिक संतुलन पर फोकस करती है।बता दें कि 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा, 10 मीटर एयर पिस्टल से काफी अलग मानी जाती है। इसमें निशानेबाजों को बेहद कम समय में लक्ष्य साधना होता है। फाइनल पूरी तरह तेज रफ्तार राउंड में होता है, जहां खिलाड़ी के पास सिर्फ तीन सेकंड का समय होता है। ऐसे दबाव वाले मुकाबले में लगातार सटीक निशाना लगाना आसान नहीं माना जाता है।ईशा ने क्वालिफिकेशन में 587 अंक हासिल कर चौथे स्थान पर जगह बनाई थी। फाइनल में उन्होंने शुरुआती तीन सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया। चौथी सीरीज में पहला निशाना चूकने के बावजूद उन्होंने वापसी की और आखिरी चरण में शानदार खेल दिखाते हुए विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ईशा सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा प्रदर्शन किया हो। पिछले वर्ष उन्होंने अर्जेंटीना विश्व कप में रजत पदक जीता था। इसके अलावा काहिरा विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक और इस वर्ष एशियाई खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं।अब इस साल दोहा में होने वाली विश्व चैंपियनशिप पर सभी की नजरें रहेंगी, जहां लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए शुरुआती कोटा स्थान तय किए जाएंगे। माना जा रहा है कि ईशा सिंह भारतीय निशानेबाजी की नई बड़ी उम्मीद बनकर उभर रही हैं। 

म्यूनिख से भारतीय निशानेबाजी के लिए बड़ी और गर्व भरी खबर सामने आई है। युवा निशानेबाज ईशा सिंह ने आईएसएसएफ विश्व कप में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में नया विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया है। सिर्फ 21 साल की ईशा ने फाइनल में 43 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीतते हुए दक्षिण कोरिया की किम येजी का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने वर्ष 2024 में बाकू विश्व कप में 42 अंक बनाए थे।
गौरतलब है कि इस मुकाबले में पेरिस ओलंपिक चैंपियन यांग जिन और पूर्व विश्व चैंपियन डोरीन वेनेकैंप जैसी दिग्गज खिलाड़ी भी मौजूद थीं। हालांकि ईशा ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा और पहले तीन सीरीज में एक भी अंक नहीं गंवाया। जर्मनी की डोरीन वेनेकैंप ने 38 अंकों के साथ रजत पदक जीता, जबकि यांग जिन पांचवें स्थान पर रहीं।
मौजूद जानकारी के अनुसार ईशा सिंह की इस सफलता के पीछे पिछले चार वर्षों की लगातार मेहनत और खास तकनीकी प्रशिक्षण रहा है। उनके कोच रोनक पंडित ने उन्हें अलग शैली में प्रशिक्षण दिया। आमतौर पर निशानेबाज तेजी से हाथ उठाकर निशाना लगाते हैं, लेकिन ईशा को धीरे हाथ उठाने और उसी मूवमेंट में ट्रिगर दबाने की ट्रेनिंग दी गई। यही तकनीक म्यूनिख में उनके लिए सबसे बड़ी ताकत साबित हुई है।
ईशा सिंह ने मुकाबले के बाद कहा कि 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा काफी चुनौतीपूर्ण होती है और इसमें शुरुआत से बढ़त बनाना बहुत जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि वह फाइनल के दौरान बाकी खिलाड़ियों या उनके नामों पर ध्यान नहीं देतीं, बल्कि सिर्फ अपनी प्रक्रिया और मानसिक संतुलन पर फोकस करती है।
बता दें कि 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा, 10 मीटर एयर पिस्टल से काफी अलग मानी जाती है। इसमें निशानेबाजों को बेहद कम समय में लक्ष्य साधना होता है। फाइनल पूरी तरह तेज रफ्तार राउंड में होता है, जहां खिलाड़ी के पास सिर्फ तीन सेकंड का समय होता है। ऐसे दबाव वाले मुकाबले में लगातार सटीक निशाना लगाना आसान नहीं माना जाता है।
ईशा ने क्वालिफिकेशन में 587 अंक हासिल कर चौथे स्थान पर जगह बनाई थी। फाइनल में उन्होंने शुरुआती तीन सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया। चौथी सीरीज में पहला निशाना चूकने के बावजूद उन्होंने वापसी की और आखिरी चरण में शानदार खेल दिखाते हुए विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ईशा सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा प्रदर्शन किया हो। पिछले वर्ष उन्होंने अर्जेंटीना विश्व कप में रजत पदक जीता था। इसके अलावा काहिरा विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक और इस वर्ष एशियाई खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं।
अब इस साल दोहा में होने वाली विश्व चैंपियनशिप पर सभी की नजरें रहेंगी, जहां लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए शुरुआती कोटा स्थान तय किए जाएंगे। माना जा रहा है कि ईशा सिंह भारतीय निशानेबाजी की नई बड़ी उम्मीद बनकर उभर रही हैं।

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