Pharma Share: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया के शेयर बाजारों को हिलाकर रख दिया है। भारत का शेयर बाजार भी इस उथल-पुथल से नहीं बच सका। लेकिन इस गिरावट के बीच भारतीय फार्मा सेक्टर एक ऐसा सेक्टर बनकर उभरा है, जो न सिर्फ टिका हुआ है बल्कि तेजी से ऊपर भी चढ़ रहा है।
1 महीने में 11% चढ़ा निफ्टी फार्मा इंडेक्स
पिछले एक महीने में Nifty 50 इंडेक्स करीब 3.6 फीसदी गिरा है। लेकिन इसी दौरान Nifty Pharma इंडेक्स करीब 11 फीसदी चढ़ा है। ईयर-टू-डेट (YTD) बेसिस पर यानी साल की शुरुआत से अभी तक निफ्टी फार्मा इंडेक्स 9.4 फीसदी बढ़ा है।
27% से ज्यादा का उछाल
Gland Pharma के शेयर एक महीने में 27 फीसदी से ज्यादा चढ़े हैं। Laurus Labs और Biocon 21 से 23 फीसदी तक उछले। Cipla, Sun Pharma और Mankind Pharma जैसी जानी-मानी कंपनियों के शेयर भी 10 से 15 फीसदी तक बढ़े।

दवा की जरूरत कभी नहीं रुकती
इस मजबूती की सबसे बड़ी वजह एक बेहद सीधी सी बात है। चाहे देश में जंग हो, महंगाई हो, मंदी हो या बाजार गिरे, बीमार इंसान को दवा तो लेनी ही है। Master Capital Services के चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ. रवि सिंह के मुताबिक, लोग मुश्किल दौर में भी दवाओं और स्वास्थ्य पर खर्च करते रहते हैं। यही फार्मा सेक्टर की ताकत है जो इसे दूसरे सेक्टर से अलग बनाती है।
कमजोर रुपए ने भी दिया साथ
फार्मा सेक्टर की तेजी में एक बड़ी वजह रुपये की कमजोरी भी है। भारत की कई बड़ी दवा कंपनियां अमेरिका, यूरोप और दूसरे देशों में दवाएं बेचती हैं। विदेश में की गई कमाई को जब रुपये में बदला जाता है तो वह रकम ज्यादा हो जाती है। यानी जो चीज आम आदमी के लिए महंगाई का कारण बनती है, वही फार्मा कंपनियों की कमाई बढ़ा देती है।
कंपनियों के नतीजे भी रहे शानदार
Choice Institutional Equities की फार्मा एनालिस्ट मैत्री शेठ के मुताबिक, चौथी तिमाही में फार्मा कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे। रेवेन्यू और मार्जिन दोनों में सुधार हुआ। बायोसिमिलर, ऑन्कोलॉजी और पेप्टाइड जैसी हाई-मार्जिन दवाओं की लॉन्चिंग ने कंपनियों की कमाई को और मजबूत किया।
क्या कह रहे एक्सपर्ट्स
डॉ. रवि सिंह ने कहा है कि फार्मा सेक्टर को बाजार की हर गिरावट से पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। बाजार में बड़ी गिरावट आने पर इस सेक्टर पर भी असर पड़ सकता है। लेकिन यह सेक्टर पोर्टफोलियो की अस्थिरता कम करने और निवेश को संतुलित रखने में मदद करता है। मैत्री शेठ ने कहा कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई चेन में रुकावटें कुछ दबाव जरूर बना सकती हैं, जिससे इस पर असर पड़ सकता है।


