मोतिहारी में स्वास्थ्य व्यवस्था में लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद सदर एसडीओ निशांत सिहारा ने कोटवा पीएचसी का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल की कार्यप्रणाली में कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। निरीक्षण के दौरान चार से पांच स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। इनमें सबसे गंभीर मामला एमओ वाईसी डॉ. गौरव कुमार का था, जो निरीक्षण के समय अस्पताल में मौजूद नहीं थे। उनसे संपर्क करने पर उन्होंने अपनी ड्यूटी गुरुवार को बताई, जबकि रोस्टर के अनुसार उनकी ड्यूटी उसी दिन निर्धारित थी। इस पर एसडीओ ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। निजी कमरे के तौर पर इस्तेमाल हो रहा मरीजों का बेड जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल के मरीजों के लिए बने बेड का उपयोग निजी कमरे के तौर पर किया जा रहा था। एक कमरे में ताला लगा मिला, जिसके बारे में बताया गया कि उसे डॉक्टर ने अपने निजी इस्तेमाल के लिए रखा है। संबंधित डॉक्टर के मुजफ्फरपुर से आने-जाने और नियमित रूप से उपस्थित न रहने की बात भी सामने आई, जिससे मरीजों को परेशानी होती है। इसके अतिरिक्त, डेटा ऑपरेटर आलोक कुमार पर मरीजों से रजिस्ट्रेशन के नाम पर निर्धारित शुल्क से अधिक पैसे वसूलने का आरोप लगा। जांच में यह आरोप सही पाया गया। एसडीओ ने मौके पर ही इस अनियमितता पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए, यह कहते हुए कि ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सही ढंग से निर्वहन करने की दी चेतावनी एसडीओ निशांत सिहारा ने बताया कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी स्वास्थ्य कर्मियों को अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन करने की चेतावनी दी। इस औचक निरीक्षण के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया है और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच भय का माहौल है। कई कर्मचारी अपनी कार्यशैली में सुधार करने की बात कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। मोतिहारी में स्वास्थ्य व्यवस्था में लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद सदर एसडीओ निशांत सिहारा ने कोटवा पीएचसी का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल की कार्यप्रणाली में कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। निरीक्षण के दौरान चार से पांच स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। इनमें सबसे गंभीर मामला एमओ वाईसी डॉ. गौरव कुमार का था, जो निरीक्षण के समय अस्पताल में मौजूद नहीं थे। उनसे संपर्क करने पर उन्होंने अपनी ड्यूटी गुरुवार को बताई, जबकि रोस्टर के अनुसार उनकी ड्यूटी उसी दिन निर्धारित थी। इस पर एसडीओ ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। निजी कमरे के तौर पर इस्तेमाल हो रहा मरीजों का बेड जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल के मरीजों के लिए बने बेड का उपयोग निजी कमरे के तौर पर किया जा रहा था। एक कमरे में ताला लगा मिला, जिसके बारे में बताया गया कि उसे डॉक्टर ने अपने निजी इस्तेमाल के लिए रखा है। संबंधित डॉक्टर के मुजफ्फरपुर से आने-जाने और नियमित रूप से उपस्थित न रहने की बात भी सामने आई, जिससे मरीजों को परेशानी होती है। इसके अतिरिक्त, डेटा ऑपरेटर आलोक कुमार पर मरीजों से रजिस्ट्रेशन के नाम पर निर्धारित शुल्क से अधिक पैसे वसूलने का आरोप लगा। जांच में यह आरोप सही पाया गया। एसडीओ ने मौके पर ही इस अनियमितता पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए, यह कहते हुए कि ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सही ढंग से निर्वहन करने की दी चेतावनी एसडीओ निशांत सिहारा ने बताया कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी स्वास्थ्य कर्मियों को अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन करने की चेतावनी दी। इस औचक निरीक्षण के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया है और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच भय का माहौल है। कई कर्मचारी अपनी कार्यशैली में सुधार करने की बात कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा।


