सीबीआई कोर्ट, लखनऊ ने रिश्वतखोरी के मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर अजय कुमार गौर को चार साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन पर 90 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। अजय कुमार गौर उस समय चंदौली जिले की शाहूपुरी शाखा में ब्रांच मैनेजर के पद पर तैनात थे। सीबीआई ने उन्हें लोन पास कराने के बदले रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। 10 लाख का लोन मंजूर करने के बदले मांगे थे 50 हजार मामला वर्ष 2018 का है। सीबीआई के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने 10 लाख रुपए के पर्सनल लोन के लिए SBI की शाहूपुरी शाखा में आवेदन किया था। आरोप था कि तत्कालीन ब्रांच मैनेजर अजय कुमार गौर ने लोन स्वीकृत और जारी करने के बदले 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। यह रकम लोन की राशि का करीब पांच प्रतिशत थी।
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए ट्रैप की कार्रवाई की। 40 हजार रुपए लेते ही सीबीआई ने पकड़ लियसीबीआई ने 26 फरवरी 2018 को केस दर्ज करने के बाद जाल बिछाया। कार्रवाई के दौरान अजय कुमार गौर ने शिकायतकर्ता से 40 हजार रुपए की रिश्वत ली। इसी दौरान सीबीआई टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।
जांच एजेंसी ने रिश्वत की रकम बरामद करने के साथ मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए। इसके बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। 6 साल से ज्यादा चली सुनवाई, अब आया फैसला सीबीआई ने जांच पूरी करने के बाद 27 अप्रैल 2018 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद 9 जनवरी 2019 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए। मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने रिश्वत मांगने और स्वीकार करने से जुड़े साक्ष्य अदालत के सामने रखे।
ट्रायल पूरा होने के बाद कोर्ट ने अजय कुमार गौर को दोषी माना और 24 अगस्त 2026 को उन्हें चार साल के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 90 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।

