कुर्बानी सब्र का सबसे बड़ा इम्तेहान : कारी नोमानी

कुर्बानी सब्र का सबसे बड़ा इम्तेहान : कारी नोमानी

भास्कर न्यूज| पटेगना अररिया प्रखंड के बटुरबाड़ी पंचायत अंतर्गत पलासी झौआ चौक स्थित मदीना मस्जिद हाजी इसहाक नगर में नमाज के दौरान इमाम व ख़तीब कारी कमरुज्जमा कमर नोमानी ने माह-ए-जिलहिज्जा की फ़ज़ीलत पर बयान किया। उन्होंने कहा कि अल्लाह तआला ने क़ुरआन करीम में हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को हुक्म दिया कि अपने बेटे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम को अल्लाह की राह में कुर्बान करें। उन्होंने कहा कि हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने लंबे अरसे तक दुआ की थी- या अल्लाह, मुझे नेक और स्वस्थ बेटा अता फ़रमा।जब हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम बड़े होकर अपने वालिद का हाथ बंटाने लायक हुए, तब अल्लाह की तरफ से उनकी कुर्बानी का हुक्म आया। कारी नोमानी ने कहा कि यह इम्तेहान इंसानी सोच से कहीं बढ़कर था, क्योंकि कोई भी बाप अपने बेटे की कुर्बानी देने की कल्पना नहीं कर सकता। लेकिन हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के हुक्म के आगे पूरी फ़रमांबरदारी और सब्र का मुज़ाहिरा किया। हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने अपने बेटे हजरत इस्माइल अली से फरमाया कि बेटा मैंने ख्वाब में देखा है कि मैं तुम्हें जबह कर रहा हूं। बताओ तुम्हारी क्या राय है। वह बेटा भी खलीलुल्लाह का बेटा था। जिसकी नस्ल से नबी- ए- कायनात मोहम्मद सल्लल्लाहु अलेह दुनिया में तसरीफ लाने वाले थे। उस बेटे ने पलट कर ये नहीं कहा के अब्बा जान मैंने कौन सा ऐसा जुर्म किया है। जवाब में बेटे ने ये कहा के अब्बा जान जो हुक्म आपको अल्लाह के तरफ से हुआ है उसको कर गुजरिए। भास्कर न्यूज| पटेगना अररिया प्रखंड के बटुरबाड़ी पंचायत अंतर्गत पलासी झौआ चौक स्थित मदीना मस्जिद हाजी इसहाक नगर में नमाज के दौरान इमाम व ख़तीब कारी कमरुज्जमा कमर नोमानी ने माह-ए-जिलहिज्जा की फ़ज़ीलत पर बयान किया। उन्होंने कहा कि अल्लाह तआला ने क़ुरआन करीम में हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को हुक्म दिया कि अपने बेटे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम को अल्लाह की राह में कुर्बान करें। उन्होंने कहा कि हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने लंबे अरसे तक दुआ की थी- या अल्लाह, मुझे नेक और स्वस्थ बेटा अता फ़रमा।जब हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम बड़े होकर अपने वालिद का हाथ बंटाने लायक हुए, तब अल्लाह की तरफ से उनकी कुर्बानी का हुक्म आया। कारी नोमानी ने कहा कि यह इम्तेहान इंसानी सोच से कहीं बढ़कर था, क्योंकि कोई भी बाप अपने बेटे की कुर्बानी देने की कल्पना नहीं कर सकता। लेकिन हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के हुक्म के आगे पूरी फ़रमांबरदारी और सब्र का मुज़ाहिरा किया। हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने अपने बेटे हजरत इस्माइल अली से फरमाया कि बेटा मैंने ख्वाब में देखा है कि मैं तुम्हें जबह कर रहा हूं। बताओ तुम्हारी क्या राय है। वह बेटा भी खलीलुल्लाह का बेटा था। जिसकी नस्ल से नबी- ए- कायनात मोहम्मद सल्लल्लाहु अलेह दुनिया में तसरीफ लाने वाले थे। उस बेटे ने पलट कर ये नहीं कहा के अब्बा जान मैंने कौन सा ऐसा जुर्म किया है। जवाब में बेटे ने ये कहा के अब्बा जान जो हुक्म आपको अल्लाह के तरफ से हुआ है उसको कर गुजरिए।  

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