डुमरांव विधानसभा क्षेत्र में अधूरी पड़ी सड़क परियोजनाओं को लेकर पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने सरकार और विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में वर्ष 2020 से 2025 के बीच 230 सड़कों के निर्माण और पुनर्निर्माण को मंजूरी मिली थी, लेकिन अधिकांश परियोजनाएं अब भी अधूरी हैं। उन्होंने ग्रामीण कार्य विभाग के आधिकारिक एग्रीमेंट दस्तावेज भी सार्वजनिक किए। डॉ. सिंह के अनुसार, स्वीकृत परियोजनाओं में 203 जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण शामिल था। इनकी कुल लंबाई 411.90 किलोमीटर और अनुमानित लागत लगभग 257.70 करोड़ रुपये थी। मई 2025 में निविदा प्रक्रिया पूरी कर कार्य विभिन्न एजेंसियों को सौंपे गए थे। अनुबंध के तहत अधिकांश कार्य एक वर्ष के भीतर पूरे होने थे, लेकिन निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बावजूद कई सड़कें अभी भी निर्माणाधीन हैं। स्थानीय लोगों को भारी परेशानी उन्होंने बक्सर-आरा एनएच-84 से गजरावां रोड, कृष्णाब्रह्म से गिरधर बरांव रोड, एनएच-30 से रूपसागर रोड, ढकाईच से कोरानसराय पुल रोड, केसठ बस स्टैंड से सोनवर्षा एनएच-30 रोड, नावानगर से धवई-उसरा मुख्य सड़क और डुमरांव शहर की कई अन्य महत्वपूर्ण सड़कों का उल्लेख किया, जो अब भी अधूरी पड़ी हैं। इससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी हो रही है। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार, विभागीय अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के चलते ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई परियोजनाओं की समयसीमा समाप्त हो चुकी है, फिर भी जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। जमीनी स्तर पर अधिकांश योजनाएं अधूरी डॉ. सिंह ने डुमरांव बाईपास, रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) और अमृत भारत योजना के तहत डुमरांव रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण जैसी अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं में भी देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकांश योजनाएं अधूरी हैं। डॉ. अजीत कुमार सिंह ने सरकार से लंबित परियोजनाओं की तत्काल समीक्षा करने और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि जनता को इन परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि डुमरांव की सड़कें, बाईपास और रेल ओवर ब्रिज आखिर कब पूरे होंगे और जनता को इनका लाभ कब मिलेगा। डुमरांव विधानसभा क्षेत्र में अधूरी पड़ी सड़क परियोजनाओं को लेकर पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने सरकार और विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में वर्ष 2020 से 2025 के बीच 230 सड़कों के निर्माण और पुनर्निर्माण को मंजूरी मिली थी, लेकिन अधिकांश परियोजनाएं अब भी अधूरी हैं। उन्होंने ग्रामीण कार्य विभाग के आधिकारिक एग्रीमेंट दस्तावेज भी सार्वजनिक किए। डॉ. सिंह के अनुसार, स्वीकृत परियोजनाओं में 203 जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण शामिल था। इनकी कुल लंबाई 411.90 किलोमीटर और अनुमानित लागत लगभग 257.70 करोड़ रुपये थी। मई 2025 में निविदा प्रक्रिया पूरी कर कार्य विभिन्न एजेंसियों को सौंपे गए थे। अनुबंध के तहत अधिकांश कार्य एक वर्ष के भीतर पूरे होने थे, लेकिन निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बावजूद कई सड़कें अभी भी निर्माणाधीन हैं। स्थानीय लोगों को भारी परेशानी उन्होंने बक्सर-आरा एनएच-84 से गजरावां रोड, कृष्णाब्रह्म से गिरधर बरांव रोड, एनएच-30 से रूपसागर रोड, ढकाईच से कोरानसराय पुल रोड, केसठ बस स्टैंड से सोनवर्षा एनएच-30 रोड, नावानगर से धवई-उसरा मुख्य सड़क और डुमरांव शहर की कई अन्य महत्वपूर्ण सड़कों का उल्लेख किया, जो अब भी अधूरी पड़ी हैं। इससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी हो रही है। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार, विभागीय अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के चलते ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई परियोजनाओं की समयसीमा समाप्त हो चुकी है, फिर भी जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। जमीनी स्तर पर अधिकांश योजनाएं अधूरी डॉ. सिंह ने डुमरांव बाईपास, रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) और अमृत भारत योजना के तहत डुमरांव रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण जैसी अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं में भी देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकांश योजनाएं अधूरी हैं। डॉ. अजीत कुमार सिंह ने सरकार से लंबित परियोजनाओं की तत्काल समीक्षा करने और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि जनता को इन परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि डुमरांव की सड़कें, बाईपास और रेल ओवर ब्रिज आखिर कब पूरे होंगे और जनता को इनका लाभ कब मिलेगा।


