मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर अनुमंडल स्थित ऋषिकुंड में चल रहे मलमास मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्रतिदिन लगभग 35 से 40 हजार श्रद्धालु यहां के गर्म कुंड में स्नान कर रहे हैं। मेले का समापन होने में अब केवल एक सप्ताह का समय शेष है, जिसके चलते मुंगेर सहित बिहार के अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। बिहार में मलमास मेले के दौरान राजगीर के बाद ऋषिकुंड दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है, जहां एक माह तक श्रद्धालु गर्म पानी में स्नान और बच्चों का मुंडन संस्कार कराने आते हैं। इस ऐतिहासिक मेले में श्रद्धालु मनोरंजन के लिए झूले और आसपास की हरी-भरी पहाड़ियों का भी आनंद लेते हैं। बच्चों का मुंडन कराने की परंपरा मान्यता है कि भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का मुंडन संस्कार राजा दशरथ द्वारा ऋषिकुंड में ही किया गया था। इसी कारण मलमास मेले के दौरान यहां अपने बच्चों का मुंडन कराने की परंपरा है। अत्यधिक भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न न हो। हालांकि, भारी भीड़ के कारण लगातार सड़क जाम की समस्या बनी हुई है, जिससे ऋषिकुंड आने वाले पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने का कार्य जारी यह मलमास मेला हर तीन साल में लगता है, जिसमें बिहार सहित अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु ऋषिकुंड के गर्म पानी में स्नान करने आते हैं। सरकार द्वारा ऋषिकुंड को एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनेगा। मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर अनुमंडल स्थित ऋषिकुंड में चल रहे मलमास मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्रतिदिन लगभग 35 से 40 हजार श्रद्धालु यहां के गर्म कुंड में स्नान कर रहे हैं। मेले का समापन होने में अब केवल एक सप्ताह का समय शेष है, जिसके चलते मुंगेर सहित बिहार के अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। बिहार में मलमास मेले के दौरान राजगीर के बाद ऋषिकुंड दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है, जहां एक माह तक श्रद्धालु गर्म पानी में स्नान और बच्चों का मुंडन संस्कार कराने आते हैं। इस ऐतिहासिक मेले में श्रद्धालु मनोरंजन के लिए झूले और आसपास की हरी-भरी पहाड़ियों का भी आनंद लेते हैं। बच्चों का मुंडन कराने की परंपरा मान्यता है कि भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का मुंडन संस्कार राजा दशरथ द्वारा ऋषिकुंड में ही किया गया था। इसी कारण मलमास मेले के दौरान यहां अपने बच्चों का मुंडन कराने की परंपरा है। अत्यधिक भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न न हो। हालांकि, भारी भीड़ के कारण लगातार सड़क जाम की समस्या बनी हुई है, जिससे ऋषिकुंड आने वाले पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने का कार्य जारी यह मलमास मेला हर तीन साल में लगता है, जिसमें बिहार सहित अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु ऋषिकुंड के गर्म पानी में स्नान करने आते हैं। सरकार द्वारा ऋषिकुंड को एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनेगा।


