MVA में दरार! अंबादास दानवे की उम्मीदवारी से कांग्रेस नाराज, क्या टूटने की कगार पर है गठबंधन?

MVA में दरार! अंबादास दानवे की उम्मीदवारी से कांग्रेस नाराज, क्या टूटने की कगार पर है गठबंधन?

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधन का गणित अब उलझता नजर आ रहा है। विपक्षी मोर्चे महाविकास अघाड़ी में शामिल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के बीच खींचतान ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। विवाद की मुख्य जड़ एमएलसी चुनाव के लिए शिवसेना (UBT) का वह फैसला है, जिसमें उन्होंने अंबादास दानवे को अपना चेहरा बनाया है।

उद्धव के नाम पर थी चर्चा, आदित्य ने चला नया दांव

राजनीतिक गलियारों में पहले यह चर्चा जोरों पर थी कि खुद उद्धव ठाकरे गठबंधन के साझा उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरेंगे। कांग्रेस ने भी स्पष्ट कर दिया था कि यदि उद्धव ठाकरे चुनाव लड़ते हैं, तो वह उन्हें पूरा समर्थन देगी। लेकिन, आदित्य ठाकरे ने अचानक अंबादास दानवे के नाम का ऐलान कर सबको चौंका दिया। यह सरप्राइज दांव कांग्रेस को रास नहीं आ रहा है।

अलग उम्मीदवार उतारने की तैयारी?

शिवसेना (UBT) के इस स्वतंत्र फैसले से कांग्रेस नेतृत्व असहज महसूस कर रहा है। पार्टी ने अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा है कि उनका समर्थन सिर्फ उद्धव ठाकरे के लिए था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस अब अपना अलग उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रही है, जो गठबंधन में बड़ी टूट का संकेत दे सकता है।

शिवसेना (UBT) की नई रणनीति?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंबादास दानवे को आगे करके उद्धव ठाकरे ने यह संकेत दे दिया है कि उनकी पार्टी अब अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेने के मूड में है। यह कदम पार्टी के भीतर नए नेतृत्व को मजबूत करने और संगठन पर अपनी पकड़ दिखाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

क्यों बढ़ा विवाद?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शिवसेना (UBT) की ओर से अंबादास दानवे के नाम की घोषणा के बाद गठबंधन के भीतर अविश्वास की स्थिति बनती दिख रही है। माना जा रहा है कि बिना सलाह-मशविरा किए उम्मीदवार तय किए जाने से सहयोगी दलों में नाराजगी बढ़ी है। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या उद्धव ठाकरे के बिना कांग्रेस गठबंधन का साथ निभाएगी या अलग राह चुनेगी। वहीं शिवसेना (UBT) फिलहाल गठबंधन की राजनीति से ज्यादा अपनी पार्टी की जमीन मजबूत करने पर जोर देती नजर आ रही है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस अलग उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या महाविकास अघाड़ी के नेता इस कलह को सुलझा पाएंगे या महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नए मोर्चे और नए समीकरणों का जन्म होगा।

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