इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट केस में दोषी करार पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक की सजा पर रोक लगा दी। साथ ही अपील लंबित रहने तक सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकलपीठ ने पारित किया। कहा गया कि वह मार्चि 2020 से याची जेल में बंद है और लगभग पांच वर्ष नौ महीने की सजा काट चुका है। उसकी कुल सजा छह वर्ष की है और अपील के निस्तारण में समय लगने की स्थिति में अपील निरर्थक हो सकती है। तर्क दिया कि गैंग चार्ट तैयार करते समय यह स्पष्ट नहीं किया गया कि आरोपी को गैंगस्टर मानने का आधार क्या था। यूपी सरकार ने विरोध किया राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध किया गया और कहा गया कि गैंग चार्ट में आरोपी के खिलाफ दो आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि यह भी स्वीकार किया गया कि उन मामलों में अभी तक कोई दोषसिद्धि नहीं हुई है और आरोपीइ लगभग पांच वर्ष नौ महीने से जेल में है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गैंग चार्ट में केवल अनुमोदन अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं, लेकिन आरोपी के खिलाफ स्वतंत्र और स्पष्ट निष्कर्ष दर्ज नहीं दिए गए हैं। कहा कि गैंग चार्ट में जिन दो मामलों का उल्लेख है, उनमें अभी तक आरोपी को दोषी नहीं ठहराया गया है और दोनों मुकदमों का ट्रायल लंबित है। अभियोजन असफल रहा न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपी के भय के कारण कोई गवाह सामने नहीं आया या उसने न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित किया। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि जिन गवाहों के बयानों पर अभियोजन का मामला आधारित है, उनमें आरोपी के गैंगस्टर होने या गैंग का सदस्य होने संबंधी ठोस सामग्री सामने नहीं आई। आरोपी द्वारा पहले ही काटी जा चुकी लंबी अवधि की सजा को देखते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को स्थगित रखने का निर्णय लिया और कमलेश पाठक को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।


