औरंगाबाद में बकरीद को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट:पर्व को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने की तैयारी, डीएम बोलीं- सौहार्द बिगाड़ने पर कार्रवाई होगी

औरंगाबाद में बकरीद को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट:पर्व को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने की तैयारी, डीएम बोलीं- सौहार्द बिगाड़ने पर कार्रवाई होगी

औरंगाबाद में ईद-उल-जुहा (बकरीद) पर्व को लेकर आज कलेक्ट्रेट स्थित योजना भवन के सभा कक्ष में जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा और पुलिस अधीक्षक अमरीश राहुल ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में बकरीद पर्व के दौरान शांति, सौहार्द और विधि-व्यवस्था बनाए रखना था। बैठक में पर्व के दौरान संभावित समस्याओं, सुरक्षा व्यवस्था, संवेदनशील स्थलों की निगरानी और प्रशासनिक तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई। अनुमंडल पदाधिकारी की ओर से जानकारी दी गई कि इस साल बकरीद का पर्व 28 मई से 30 मई के बीच मनाया जाएगा। पर्व के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह नमाज अदा करने के बाद पारंपरिक रूप से कुर्बानी देते हैं और कई स्थानों पर मेले का आयोजन भी किया जाता है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने पूरे जिले में विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है। पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित की सभी संवेदनशील स्थलों पर दंडाधिकारी और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना पर तत्काल नियंत्रण पाया जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि पिछले सालों की तरह इस बार भी जिले में पर्व को शांतिपूर्ण और भाईचारे के माहौल में संपन्न कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाए और आवश्यकता पड़ने पर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। अफवाह फैलाने वालों और असामाजिक तत्वों पर रहेगी कड़ी नजर बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि कई बार कुछ असामाजिक तत्व अफवाह फैलाकर या छोटी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक और व्हाट्सएप पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले फोटो, वीडियो या संदेश प्रसारित करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से सोशल मीडिया की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि पूर्व में जिन क्षेत्रों में साम्प्रदायिक तनाव की घटनाएं हुई हैं, वहां विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है, जिनका इतिहास सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का रहा है। साथ ही गुप्त सूचनाओं के आधार पर उन तत्वों पर भी नजर रखने को कहा गया, जो पर्व के दौरान शांति व्यवस्था में बाधा डाल सकते हैं। जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि खुलेआम आपत्तिजनक पशुओं का परिवहन, सार्वजनिक स्थलों पर विवादास्पद तरीके से नमाज अदा करना या धार्मिक स्थलों के आसपास ध्वनि विस्तारक यंत्रों का अनुचित उपयोग भी तनाव का कारण बन सकता है। इसलिए सभी संबंधित पदाधिकारियों को संवेदनशील मामलों में विशेष सावधानी बरतने का निर्देश दिया गया है। किसी भी प्रकार की छोटी घटना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत समाधान करने और वरीय अधिकारियों को सूचित करने की बात कही गई। सफाई व्यवस्था, सुरक्षा और निगरानी के दिए गए निर्देश बैठक में कुर्बानी स्थलों की साफ-सफाई को लेकर भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए। जिलाधिकारी ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों और नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि कुर्बानी स्थलों पर जेसीबी मशीन से पांच से छह फीट गहरे गड्ढे खुदवाए जाएं, ताकि अपशिष्ट का समुचित निस्तारण किया जा सके और गंदगी या संक्रमण की स्थिति उत्पन्न न हो। इसके अलावा जिले के सभी मस्जिदों, मंदिरों, इमामबाड़ों और अन्य संवेदनशील स्थलों पर पंचायत स्तर तक पर्याप्त संख्या में पुलिस बल और कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। सभी प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई। बैठक में जिला शांति समिति के सदस्यों ने भी अपने क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को प्रशासन के समक्ष रखा। इस अवसर पर अपर समाहर्ता अनुग्रह नारायण सिंह, अपर समाहर्ता आपदा उपेंद्र पंडित, सदर अनुमंडल पदाधिकारी संतन कुमार सिंह, दाउदनगर अनुमंडल पदाधिकारी अमित राजन, जिला परिवहन पदाधिकारी सुनंदा कुमारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्वेता प्रियदर्शी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, सभी सीओ, बीडीओ, थाना अध्यक्ष एवं शांति समिति के सदस्य उपस्थित रहे। औरंगाबाद में ईद-उल-जुहा (बकरीद) पर्व को लेकर आज कलेक्ट्रेट स्थित योजना भवन के सभा कक्ष में जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा और पुलिस अधीक्षक अमरीश राहुल ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में बकरीद पर्व के दौरान शांति, सौहार्द और विधि-व्यवस्था बनाए रखना था। बैठक में पर्व के दौरान संभावित समस्याओं, सुरक्षा व्यवस्था, संवेदनशील स्थलों की निगरानी और प्रशासनिक तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई। अनुमंडल पदाधिकारी की ओर से जानकारी दी गई कि इस साल बकरीद का पर्व 28 मई से 30 मई के बीच मनाया जाएगा। पर्व के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह नमाज अदा करने के बाद पारंपरिक रूप से कुर्बानी देते हैं और कई स्थानों पर मेले का आयोजन भी किया जाता है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने पूरे जिले में विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है। पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित की सभी संवेदनशील स्थलों पर दंडाधिकारी और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना पर तत्काल नियंत्रण पाया जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि पिछले सालों की तरह इस बार भी जिले में पर्व को शांतिपूर्ण और भाईचारे के माहौल में संपन्न कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाए और आवश्यकता पड़ने पर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। अफवाह फैलाने वालों और असामाजिक तत्वों पर रहेगी कड़ी नजर बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि कई बार कुछ असामाजिक तत्व अफवाह फैलाकर या छोटी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक और व्हाट्सएप पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले फोटो, वीडियो या संदेश प्रसारित करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से सोशल मीडिया की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि पूर्व में जिन क्षेत्रों में साम्प्रदायिक तनाव की घटनाएं हुई हैं, वहां विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है, जिनका इतिहास सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का रहा है। साथ ही गुप्त सूचनाओं के आधार पर उन तत्वों पर भी नजर रखने को कहा गया, जो पर्व के दौरान शांति व्यवस्था में बाधा डाल सकते हैं। जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि खुलेआम आपत्तिजनक पशुओं का परिवहन, सार्वजनिक स्थलों पर विवादास्पद तरीके से नमाज अदा करना या धार्मिक स्थलों के आसपास ध्वनि विस्तारक यंत्रों का अनुचित उपयोग भी तनाव का कारण बन सकता है। इसलिए सभी संबंधित पदाधिकारियों को संवेदनशील मामलों में विशेष सावधानी बरतने का निर्देश दिया गया है। किसी भी प्रकार की छोटी घटना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत समाधान करने और वरीय अधिकारियों को सूचित करने की बात कही गई। सफाई व्यवस्था, सुरक्षा और निगरानी के दिए गए निर्देश बैठक में कुर्बानी स्थलों की साफ-सफाई को लेकर भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए। जिलाधिकारी ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों और नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि कुर्बानी स्थलों पर जेसीबी मशीन से पांच से छह फीट गहरे गड्ढे खुदवाए जाएं, ताकि अपशिष्ट का समुचित निस्तारण किया जा सके और गंदगी या संक्रमण की स्थिति उत्पन्न न हो। इसके अलावा जिले के सभी मस्जिदों, मंदिरों, इमामबाड़ों और अन्य संवेदनशील स्थलों पर पंचायत स्तर तक पर्याप्त संख्या में पुलिस बल और कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। सभी प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई। बैठक में जिला शांति समिति के सदस्यों ने भी अपने क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को प्रशासन के समक्ष रखा। इस अवसर पर अपर समाहर्ता अनुग्रह नारायण सिंह, अपर समाहर्ता आपदा उपेंद्र पंडित, सदर अनुमंडल पदाधिकारी संतन कुमार सिंह, दाउदनगर अनुमंडल पदाधिकारी अमित राजन, जिला परिवहन पदाधिकारी सुनंदा कुमारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्वेता प्रियदर्शी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, सभी सीओ, बीडीओ, थाना अध्यक्ष एवं शांति समिति के सदस्य उपस्थित रहे।  

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