जयपुर में ई-मित्र रिटेलर आईडी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी करने वाले एक संगठित कॉल सेंटर गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। सीएसटी, रामनगरिया थाना और साइबर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में जगतपुरा स्थित एबीएस प्लाजा में संचालित फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक नाबालिग को बाल सम्प्रेषण गृह भेजा गया है। मामले में आरोपियों को कोर्ट में पेश कर 4 आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जबकि 5 महिला आरोपियों को जेल (ज्यूडिशियल कस्टडी) भेजा गया है। पुलिस ने मौके से 8 लैपटॉप, 9 मोबाइल फोन, 6 लैपटॉप चार्जर और अपराध में उपयोग लिया वाहन जब्त किया है। इस संबंध में थाना रामनगरिया में आईटी एक्ट में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कॉलेज-कॉचिंग में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को इस वारदात में नौकरी के नाम पर इस धंधे में फंसाया जा रहा था। वहीं इस मामले में आरोपी इन बच्चों को आंकड़ा उपलब्ध करवा रहा था। पुलिस को आशंका है कि आरोपी ने सरकारी तंत्र में सेंध लगाकर इनको डेटा उपलब्ध करवाया था। साइबर ठगी की पुलिस को मिली थी जानकारी स्पेशल पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश ने बताया कि गिरोह लोगों को ई-मित्र रिटेलर आईडी उपलब्ध कराने का झांसा देकर ऑनलाइन पेमेंट करवाता था। पेमेंट लेने के बाद न तो कोई वैध सेवा दी जाती थी और न ही असली आईडी उपलब्ध कराई जाती थी।
लैपटॉप में मिली डेटा शीट, QR कोड से लेते थे भुगतान छापेमारी के दौरान पुलिस ने 8 लैपटॉप, 9 मोबाइल फोन, चार्जर और एक वाहन जब्त किया। लैपटॉप में हजारों लोगों का डेटा, मोबाइल नंबरों की सूची और कॉलिंग रिकॉर्ड मिले हैं, जिनके आधार पर लोगों को कॉल कर ठगी की जा रही थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि गिरोह कॉलेज और कोचिंग में पढ़ने वाले युवाओं को नौकरी और अच्छी कमाई का लालच देकर इस अवैध कारोबार में शामिल करता था। पुलिस को आशंका है कि आरोपियों को लोगों का डेटा किसी सरकारी या संस्थागत स्रोत से अवैध रूप से उपलब्ध कराया गया था, जिसकी भी जांच की जा रही है। गिरोह कथित वेबसाइट, साझा ईमेल आईडी, अलग-अलग मोबाइल नंबर और WhatsApp पर बनाए गए पेमेंट ग्रुप्स के जरिए काम करता था। ठगी की रकम QR Code और UPI के माध्यम से वसूली जाती थी। वेतन और कमीशन पर काम करते थे कर्मचारी पूछताछ में सामने आया कि कॉल सेंटर का मुख्य संचालक कार्यालय, लैपटॉप, मोबाइल, सिम, पोर्टल, डेटा और भुगतान व्यवस्था उपलब्ध करवाता था। कार्यालय गिरफ्तार आरोपियों में से एक के नाम पर किराये पर लिया गया था। वहां काम करने वाले युवक-युवतियों को वेतन और कमीशन के आधार पर लगाया गया था। पुलिस के अनुसार मुख्य संचालक मौके से फरार मिला। उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों, मोबाइल कनेक्टिविटी, बैंकिंग ट्रेल, डिजिटल फुटप्रिंट और सहयोगियों की मदद से तलाश जारी है। इन आरोपियों को किया गिरफ्तार गिरफ्तार पुरुष आरोपियों में अजय सिंह (22) निवासी टोंक, इन्द्रजीत सिंह (23) टोंक, शुभम योगी (23) दौसा और दिलखुश उर्फ सागर गुर्जर (26) निवासी टोंक शामिल हैं। वहीं महिला आरोपियों में सोनिया द्विवेदी (22) निवासी सांगानेर, नेहा सिंह (32) निवासी उत्तर प्रदेश, कंचन महावर (22) निवासी करौली, रीतू सिंह (और शालू रावत को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने पुरुष आरोपियों को भेजा पुलिस रिमांड पर गिरफ्तार पुरुष आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम-14 जयपुर महानगर-द्वितीय के समक्ष पेश किया गया। पुलिस ने अदालत को बताया कि डिजिटल साक्ष्य, बैंक खातों, QR Code, सिम कार्ड, ईमेल लिंक और फरार मुख्य संचालक के नेटवर्क की जांच के लिए रिमांड आवश्यक है। अदालत ने चारों पुरुष आरोपियों को 29 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। महिला आरोपियों को पहले सुरक्षा और संवैधानिक प्रावधानों के तहत अपराजिता महिला सुरक्षा केंद्र भेजा गया, बाद में विधिसम्मत पूछताछ के बाद न्यायालय में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अपराध अजय सिंह ने कहा कि ई-मित्र कियोस्क रिटेलर आईडी के लिए आवेदन और भुगतान केवल DoIT के अधिकृत पोर्टल, SSO ID प्रक्रिया या अधिकृत LSP के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। वहीं डीसीपी ईस्ट रंजीता शर्मा ने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से जारी है और नागरिकों के डेटा के संभावित दुरुपयोग को गंभीरता से लिया जा रहा है। पुलिस की आमजन से अपील जयपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ई-मित्र, CSC, फ्रेंचाइजी, सरकारी सेवाओं या ऑनलाइन लाइसेंस के नाम पर आने वाली कॉल, लिंक, WhatsApp मैसेज और निजी खातों में भुगतान करने से पहले आधिकारिक सत्यापन अवश्य करें। साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।


