पूर्णिया के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण स्वीकृति मिली है। पीडियाट्रिक्स और ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनीकोलॉजी (गायनी) के बाद अब एनाटॉमी (शरीर रचना विज्ञान) विषय में भी डीएनबी पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति मिल गई है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) ने निरीक्षण के बाद एनाटॉमी में दो सीटों को मंजूरी दी है। इस नई स्वीकृति के साथ, जीएमसीएच में डीएनबी पाठ्यक्रम की कुल सीटें बढ़कर 12 हो गई हैं। पहले से पीडियाट्रिक्स और गायनी विभाग में पांच-पांच सीटों पर डीएनबी पाठ्यक्रम संचालित हो रहा था। एनाटॉमी की दो नई सीटें जुड़ने से एमबीबीएस के बाद उच्च चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थियों को पूर्णिया में ही विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर मिलेगा। जीएमसीएच के प्राचार्य प्रो. डॉ. हरिशंकर मिश्र ने बताया कि पिछले सत्र में पीडियाट्रिक्स और गायनी में डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू हुआ था, और अब एनाटॉमी में भी स्वीकृति मिल गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में ऑर्थोपेडिक्स, फिजियोलॉजी, फॉरेंसिक मेडिसिन और एनेस्थीसिया सहित चार अन्य विषयों में भी डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू करने की मंजूरी मिल सकती है। कॉलेज में डीएनबी पाठ्यक्रम के लिए गायनी विभागाध्यक्ष डॉ. ऋचा झा, पीडियाट्रिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम प्रकाश तथा एनाटॉमी विभाग के डॉ. राकेश और डॉ. नकुल चौधरी सहित अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हैं। डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई) द्वारा प्रदान की जाने वाली एक प्रतिष्ठित स्नातकोत्तर उपाधि है। इसे एमडी और एमएस जैसी पीजी डिग्रियों के समकक्ष मान्यता प्राप्त है और यह पाठ्यक्रम भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन संचालित होता है। इस उपलब्धि से मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों, शिक्षकों और कर्मियों में खुशी का माहौल है। प्राचार्य प्रो. डॉ. हरिशंकर मिश्र ने डीएनबी कोर्स के विस्तार के लिए लगातार प्रयासों पर जोर दिया। पूर्णिया के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण स्वीकृति मिली है। पीडियाट्रिक्स और ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनीकोलॉजी (गायनी) के बाद अब एनाटॉमी (शरीर रचना विज्ञान) विषय में भी डीएनबी पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति मिल गई है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) ने निरीक्षण के बाद एनाटॉमी में दो सीटों को मंजूरी दी है। इस नई स्वीकृति के साथ, जीएमसीएच में डीएनबी पाठ्यक्रम की कुल सीटें बढ़कर 12 हो गई हैं। पहले से पीडियाट्रिक्स और गायनी विभाग में पांच-पांच सीटों पर डीएनबी पाठ्यक्रम संचालित हो रहा था। एनाटॉमी की दो नई सीटें जुड़ने से एमबीबीएस के बाद उच्च चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थियों को पूर्णिया में ही विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर मिलेगा। जीएमसीएच के प्राचार्य प्रो. डॉ. हरिशंकर मिश्र ने बताया कि पिछले सत्र में पीडियाट्रिक्स और गायनी में डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू हुआ था, और अब एनाटॉमी में भी स्वीकृति मिल गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में ऑर्थोपेडिक्स, फिजियोलॉजी, फॉरेंसिक मेडिसिन और एनेस्थीसिया सहित चार अन्य विषयों में भी डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू करने की मंजूरी मिल सकती है। कॉलेज में डीएनबी पाठ्यक्रम के लिए गायनी विभागाध्यक्ष डॉ. ऋचा झा, पीडियाट्रिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम प्रकाश तथा एनाटॉमी विभाग के डॉ. राकेश और डॉ. नकुल चौधरी सहित अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हैं। डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई) द्वारा प्रदान की जाने वाली एक प्रतिष्ठित स्नातकोत्तर उपाधि है। इसे एमडी और एमएस जैसी पीजी डिग्रियों के समकक्ष मान्यता प्राप्त है और यह पाठ्यक्रम भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन संचालित होता है। इस उपलब्धि से मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों, शिक्षकों और कर्मियों में खुशी का माहौल है। प्राचार्य प्रो. डॉ. हरिशंकर मिश्र ने डीएनबी कोर्स के विस्तार के लिए लगातार प्रयासों पर जोर दिया।


