पटना के मगध महिला कॉलेज में 19 और 20 मई को “न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर (NDD) वाले छात्रों के लिए चिकित्सीय हस्तक्षेप और प्रबंधन” विषय पर दो दिवसीय राज्यस्तरीय CRE (सतत पुनर्वास शिक्षा) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन समग्र क्षेत्रीय केंद्र (CRC) पटना ने IQAC, मगध महिला कॉलेज और पटना विश्वविद्यालय के सहयोग से किया। बिहार के अलग अलग जिलों से 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें शिक्षक, मनोवैज्ञानिक, पुनर्वास विशेषज्ञ, शोधार्थी और छात्र शामिल थे। कार्यक्रम का उद्देश्य न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर से प्रभावित बच्चों और छात्रों के लिए बेहतर उपचार, पुनर्वास और समावेशी शिक्षा की जानकारी उपलब्ध कराना था। विशेषज्ञों ने साझा की नई तकनीक कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इसमें बहु-विषयक चिकित्सीय हस्तक्षेप, समावेशी शिक्षा प्रणाली, न्यूरो-पुनर्वास, वाक् एवं भाषा चिकित्सा, व्यवहार प्रबंधन और बच्चों के मूल्यांकन से संबंधित दिशानिर्देश शामिल थे। विशेषज्ञों ने बताया कि ऑटिज्म, ADHD, लर्निंग डिसेबिलिटी और अन्य तंत्रिका-विकास संबंधी विकारों से जूझ रहे बच्चों के लिए समय पर पहचान और सही हस्तक्षेप बेहद जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों और चिकित्सकों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया। लाइव सांकेतिक भाषा अनुवाद बना कार्यक्रम की खास पहचान इस कार्यक्रम की बड़ी विशेषता यह रही कि मूक-बधिर प्रतिभागियों के लिए पूरे कार्यक्रम के दौरान लाइव सांकेतिक भाषा अनुवाद की व्यवस्था की गई थी। इससे सुनने में अक्षम प्रतिभागियों को भी सभी सत्रों को समझने और चर्चा में भाग लेने का अवसर मिला। आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों में सभी दिव्यांग वर्गों की जरूरतों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और शोध आधारित जानकारियां साझा कीं। प्रमुख वक्ताओं में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के डॉ. प्रणय कुमार गुप्ता, IGIMS पटना की डॉ. प्रिया, CRC पटना के सहायक प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार, डॉ. राजेंद्र कुमार प्रवीण, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट विद्याकर कुमार, स्पीच थेरेपिस्ट संयुक्ता, वरिष्ठ नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. मनोरंजन प्रसाद और व्याख्याता विद्या भूषण शामिल रहे। वक्ताओं ने कहा कि न्यूरो-डेवलपमेंटल विकारों से प्रभावित बच्चों के लिए सुलभ मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाओं की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में विशेषज्ञों की क्षमता बढ़ाने और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए सरकार, शिक्षण संस्थानों और स्वास्थ्य संगठनों को मिलकर काम करना होगा। पटना के मगध महिला कॉलेज में 19 और 20 मई को “न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर (NDD) वाले छात्रों के लिए चिकित्सीय हस्तक्षेप और प्रबंधन” विषय पर दो दिवसीय राज्यस्तरीय CRE (सतत पुनर्वास शिक्षा) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन समग्र क्षेत्रीय केंद्र (CRC) पटना ने IQAC, मगध महिला कॉलेज और पटना विश्वविद्यालय के सहयोग से किया। बिहार के अलग अलग जिलों से 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें शिक्षक, मनोवैज्ञानिक, पुनर्वास विशेषज्ञ, शोधार्थी और छात्र शामिल थे। कार्यक्रम का उद्देश्य न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर से प्रभावित बच्चों और छात्रों के लिए बेहतर उपचार, पुनर्वास और समावेशी शिक्षा की जानकारी उपलब्ध कराना था। विशेषज्ञों ने साझा की नई तकनीक कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इसमें बहु-विषयक चिकित्सीय हस्तक्षेप, समावेशी शिक्षा प्रणाली, न्यूरो-पुनर्वास, वाक् एवं भाषा चिकित्सा, व्यवहार प्रबंधन और बच्चों के मूल्यांकन से संबंधित दिशानिर्देश शामिल थे। विशेषज्ञों ने बताया कि ऑटिज्म, ADHD, लर्निंग डिसेबिलिटी और अन्य तंत्रिका-विकास संबंधी विकारों से जूझ रहे बच्चों के लिए समय पर पहचान और सही हस्तक्षेप बेहद जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों और चिकित्सकों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया। लाइव सांकेतिक भाषा अनुवाद बना कार्यक्रम की खास पहचान इस कार्यक्रम की बड़ी विशेषता यह रही कि मूक-बधिर प्रतिभागियों के लिए पूरे कार्यक्रम के दौरान लाइव सांकेतिक भाषा अनुवाद की व्यवस्था की गई थी। इससे सुनने में अक्षम प्रतिभागियों को भी सभी सत्रों को समझने और चर्चा में भाग लेने का अवसर मिला। आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों में सभी दिव्यांग वर्गों की जरूरतों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और शोध आधारित जानकारियां साझा कीं। प्रमुख वक्ताओं में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के डॉ. प्रणय कुमार गुप्ता, IGIMS पटना की डॉ. प्रिया, CRC पटना के सहायक प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार, डॉ. राजेंद्र कुमार प्रवीण, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट विद्याकर कुमार, स्पीच थेरेपिस्ट संयुक्ता, वरिष्ठ नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. मनोरंजन प्रसाद और व्याख्याता विद्या भूषण शामिल रहे। वक्ताओं ने कहा कि न्यूरो-डेवलपमेंटल विकारों से प्रभावित बच्चों के लिए सुलभ मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाओं की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में विशेषज्ञों की क्षमता बढ़ाने और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए सरकार, शिक्षण संस्थानों और स्वास्थ्य संगठनों को मिलकर काम करना होगा।


