बिहार को देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल शुरू कर दी है। सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में पटना और सीतामढ़ी में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि राज्य की प्राकृतिक-जल निकायों, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक धरोहरों को जोड़कर ‘समग्र इको-टूरिज्म योजना’ को तेजी से जमीन पर उतारा जाए। बिहार में प्राकृतिक स्थलों की कोई कमी नहीं है। बस जरूरत है, उसे सही तरीके से विकसित करने की। नेता और अधिकारी खुद बनेंगे प्रमोटर मुख्यमंत्री का मानना है कि बात जब तक हम खुद नहीं घूमेंगे, लोग कैसे भरोसा करेंगे? इसलिए अब पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मंत्री, विधायक और अधिकारी खुद टूर पैकेज लेकर इन जगहों का भ्रमण करेंगे और लोगों को प्रेरित करेंगे। 1. इको टूरिज्म: प्रकृति से कमाई का नया रास्ता, जाने क्या है प्लान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ कर दिया कि अब बिहार के जलाशय, पहाड़, जंगल और वेटलैंड सिर्फ देखने की चीज नहीं रहेंगे, बल्कि ये कमाई और रोजगार का बड़ा जरिया बनेंगे। पर्यावरण विभाग को निर्देश दिया गया है कि इन क्षेत्रों में व्यापक वृक्षारोपण किया जाए। पहाड़ों तक पहुंच होगी आसान राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे राजगीर, बांका और कैमूर जैसे इलाकों में हेलीपैड बनाने की योजना है। ताकि बाहर से आने वाले टूरिस्ट कम समय में वहां पहुंच सकें और बिहार के खूबसूरत नजारे देख सकें। 2. पुनौराधाम: मां सीता की जन्मभूमि बनेगी बड़ा केंद्र सीतामढ़ी के पुनौराधाम में माता सीता मंदिर को लेकर भी मुख्यमंत्री काफी गंभीर दिखे। उन्होंने साफ कहा कि, इसे अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। सरकार ने डेडलाइन फिक्स कर दी है कि 31 दिसंबर 2028 तक मंदिर और पूरा इलाका तैयार होना ही चाहिए। यहां एक पूरा नया शहर जैसा डेवलपमेंट होगा। श्रद्धालुओं के लिए रहने की सुविधा दी जाएगी। इसके साथ ही बड़े हॉल और ऑडिटोरियम बनाए जाएंगे। संतों और VIP के लिए अलग व्यवस्था माता सीता से जुड़े जितने भी स्थान हैं, उन्हें आपस में जोड़ा जाएगा। ताकि लोग यहां आकर 3-4 दिन आराम से घूम सकें। स्थानीय महंथों के सुझाव पर लक्ष्मणा नदी के संरक्षण और विकास को भी योजना में शामिल किया गया है। सीताकुंड और उर्विजा कुंड जैसे पवित्र स्थलों का विकास होगा, लेकिन उनकी मूल पहचान और धार्मिक महत्व से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। 3. जैन सर्किट पर भी फोकस सरकार सिर्फ एक धर्म तक सीमित नहीं रहना चाहती। जैन सर्किट को भी डेवलप करने की तैयारी है। इसके लिए जैन समाज के लोगों से बात की जाएगी और उनके सुझाव के आधार पर प्लान बनाया जाएगा। उनकी सलाह और सहयोग से उन ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण किया जाएगा जो अब तक उपेक्षित रहे हैं। बिहार को देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल शुरू कर दी है। सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में पटना और सीतामढ़ी में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि राज्य की प्राकृतिक-जल निकायों, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक धरोहरों को जोड़कर ‘समग्र इको-टूरिज्म योजना’ को तेजी से जमीन पर उतारा जाए। बिहार में प्राकृतिक स्थलों की कोई कमी नहीं है। बस जरूरत है, उसे सही तरीके से विकसित करने की। नेता और अधिकारी खुद बनेंगे प्रमोटर मुख्यमंत्री का मानना है कि बात जब तक हम खुद नहीं घूमेंगे, लोग कैसे भरोसा करेंगे? इसलिए अब पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मंत्री, विधायक और अधिकारी खुद टूर पैकेज लेकर इन जगहों का भ्रमण करेंगे और लोगों को प्रेरित करेंगे। 1. इको टूरिज्म: प्रकृति से कमाई का नया रास्ता, जाने क्या है प्लान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ कर दिया कि अब बिहार के जलाशय, पहाड़, जंगल और वेटलैंड सिर्फ देखने की चीज नहीं रहेंगे, बल्कि ये कमाई और रोजगार का बड़ा जरिया बनेंगे। पर्यावरण विभाग को निर्देश दिया गया है कि इन क्षेत्रों में व्यापक वृक्षारोपण किया जाए। पहाड़ों तक पहुंच होगी आसान राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे राजगीर, बांका और कैमूर जैसे इलाकों में हेलीपैड बनाने की योजना है। ताकि बाहर से आने वाले टूरिस्ट कम समय में वहां पहुंच सकें और बिहार के खूबसूरत नजारे देख सकें। 2. पुनौराधाम: मां सीता की जन्मभूमि बनेगी बड़ा केंद्र सीतामढ़ी के पुनौराधाम में माता सीता मंदिर को लेकर भी मुख्यमंत्री काफी गंभीर दिखे। उन्होंने साफ कहा कि, इसे अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। सरकार ने डेडलाइन फिक्स कर दी है कि 31 दिसंबर 2028 तक मंदिर और पूरा इलाका तैयार होना ही चाहिए। यहां एक पूरा नया शहर जैसा डेवलपमेंट होगा। श्रद्धालुओं के लिए रहने की सुविधा दी जाएगी। इसके साथ ही बड़े हॉल और ऑडिटोरियम बनाए जाएंगे। संतों और VIP के लिए अलग व्यवस्था माता सीता से जुड़े जितने भी स्थान हैं, उन्हें आपस में जोड़ा जाएगा। ताकि लोग यहां आकर 3-4 दिन आराम से घूम सकें। स्थानीय महंथों के सुझाव पर लक्ष्मणा नदी के संरक्षण और विकास को भी योजना में शामिल किया गया है। सीताकुंड और उर्विजा कुंड जैसे पवित्र स्थलों का विकास होगा, लेकिन उनकी मूल पहचान और धार्मिक महत्व से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। 3. जैन सर्किट पर भी फोकस सरकार सिर्फ एक धर्म तक सीमित नहीं रहना चाहती। जैन सर्किट को भी डेवलप करने की तैयारी है। इसके लिए जैन समाज के लोगों से बात की जाएगी और उनके सुझाव के आधार पर प्लान बनाया जाएगा। उनकी सलाह और सहयोग से उन ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण किया जाएगा जो अब तक उपेक्षित रहे हैं।


