काशी में तैयार हुई चित्रमय हनुमान चालीसा:रेशमी की साड़ी पर सजी भक्ति की अनूठी मिसाल, 6 महीने में बनकर हुई तैयार

काशी में तैयार हुई चित्रमय हनुमान चालीसा:रेशमी की साड़ी पर सजी भक्ति की अनूठी मिसाल, 6 महीने में बनकर हुई तैयार

धर्म और कला की नगरी वाराणसी एक बार फिर अपनी अनूठी परंपरा और रचनात्मकता के कारण चर्चा में है। यहां पहली बार ऐसी “चित्रमय हनुमान चालीसा” तैयार की गई है, जिसे रेशमी कपड़े पर बेहद आकर्षक ढंग से उकेरा गया है। खास बात यह है कि हनुमान चालीसा की हर चौपाई और दोहे को उससे जुड़े चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, जिससे यह केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि कला और आस्था का अद्भुत संगम बन गया है। यह अनोखी पहल काशी की प्रतिष्ठित बनारसी साड़ी संस्था वंदना सिल्क्स ने की है। करीब 6 फीट लंबे और 3 फीट चौड़े सिल्क कपड़े पर तैयार इस विशेष हनुमान चालीसा को बनाने में लगभग छह महीने का समय लगा। हर चौपाई को मिला चित्रों का स्वरूप
संस्थान से जुड़े देवराज जोगाई बताते हैं कि हनुमान चालीसा की 40 चौपाइयों पर 40 अलग-अलग चित्र बनाए गए हैं। इसके अलावा तीन दोहों के लिए भी विशेष चित्र तैयार किए गए हैं। कलाकारों ने पहले प्रत्येक चौपाई का भाव समझा, फिर उससे जुड़ी दृश्य कल्पनाओं को आकार दिया और अंत में उन्हें सिल्क के कपड़े पर उकेरा गया। इस अनोखे प्रयोग ने पारंपरिक धार्मिक पुस्तक को एक जीवंत कलाकृति में बदल दिया है। जो भी इसे देखता है, वह हनुमान भक्ति के साथ-साथ भारतीय कला की सूक्ष्मता से भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता। बनारसी परंपरा में आधुनिक तकनीक का संगम
डिजाइन तैयार करने में सहयोग देने वाले राजकुमार के अनुसार, सामान्य तौर पर बनारसी साड़ियों में ताना-बाना तकनीक के जरिए डिजाइन बुने जाते हैं, लेकिन इस विशेष हनुमान चालीसा में बुनाई की बजाय प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग किया गया है। उन्होंने बताया कि डिजाइन तैयार करने में काफी मेहनत और समय लगा, लेकिन अब इसकी प्रतियां बनाना अपेक्षाकृत आसान हो गया है। यही कारण है कि इसका छोटा स्वरूप भी तैयार किया गया है, जिसे हनुमान भक्तों को निशुल्क उपहार के रूप में भेंट किया जाता है। श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी चित्रमय चालीसा
फिलहाल इस अनोखी हनुमान चालीसा को संस्था के प्रतिष्ठान में सुरक्षित रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि चित्रों के माध्यम से चौपाइयों को देखना और समझना एक अलग आध्यात्मिक अनुभव देता है। 52 वर्षों से बनारसी साड़ियों के क्षेत्र में कार्यरत यह संस्था अब अपनी इस अनूठी धार्मिक कलाकृति के कारण भी चर्चा में है।

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