सिटी रिपोर्टर |अंबा कुटुंबा प्रखंड की परता पंचायत बिहार-झारखंड सीमा पर स्थित एक ऐसा गांव है, जो धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक विरासत के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। बटाने नदी के तट पर बसे इस पंचायत की पहचान हजारों वर्ष पुराने श्री कृष्ण पुरी कल्पवृक्ष धाम से है। स्थानीय लोगों के अनुसार इसी धाम के नाम पर गांव का नाम परता पड़ा। यहां मौजूद कल्पवृक्ष को लेकर लोगों में गहरी श्रद्धा है। मान्यता है कि इस वृक्ष के नीचे खड़े होकर सच्चे मन से कल्पना करने और मन्नत मांगने पर इच्छाएं पूरी होती हैं।धाम परिसर में स्थित इस कल्पवृक्ष की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। वर्षों से इस वृक्ष को गाय के शुद्ध दूध से सिंचने की परंपरा चली आ रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि आज भी प्रतिदिन लगभग 10 लीटर शुद्ध दूध से वृक्ष का अभिषेक किया जाता है। इसके लिए धाम परिसर में छह गायें रखी गई हैं, जिनकी देखभाल विशेष रूप से की जाती है। प्रखंड : कुटुंबा कुल आबादी : 14000 मुख्यालय से दूरी : 26 किमी कनेक्टिविटी : सड़क मार्ग सिटी रिपोर्टर |अंबा कुटुंबा प्रखंड की परता पंचायत बिहार-झारखंड सीमा पर स्थित एक ऐसा गांव है, जो धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक विरासत के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। बटाने नदी के तट पर बसे इस पंचायत की पहचान हजारों वर्ष पुराने श्री कृष्ण पुरी कल्पवृक्ष धाम से है। स्थानीय लोगों के अनुसार इसी धाम के नाम पर गांव का नाम परता पड़ा। यहां मौजूद कल्पवृक्ष को लेकर लोगों में गहरी श्रद्धा है। मान्यता है कि इस वृक्ष के नीचे खड़े होकर सच्चे मन से कल्पना करने और मन्नत मांगने पर इच्छाएं पूरी होती हैं।धाम परिसर में स्थित इस कल्पवृक्ष की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। वर्षों से इस वृक्ष को गाय के शुद्ध दूध से सिंचने की परंपरा चली आ रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि आज भी प्रतिदिन लगभग 10 लीटर शुद्ध दूध से वृक्ष का अभिषेक किया जाता है। इसके लिए धाम परिसर में छह गायें रखी गई हैं, जिनकी देखभाल विशेष रूप से की जाती है। प्रखंड : कुटुंबा कुल आबादी : 14000 मुख्यालय से दूरी : 26 किमी कनेक्टिविटी : सड़क मार्ग


