स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने कनिष्ठ अभियंता संयुक्त भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में फरार कोचिंग संचालक को अरेस्ट किया है। टैबलेट डिवाइस का यूज कर उसकी ओर से कई कैंडिडेट्स को लीक पेपर पढ़ाकर एग्जाम सेंटर तक पहुंचाया गया था। पेपर के एवज में 25 लाख रुपए में प्रत्येक कैंडिडेट से वसूले गए थे। एसओजी की ओर से फिलहाल गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है। एडीजी (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया- पेपर लीक मामले में आरोपी भीम सिंह (46) निवासी हरसोरा अलवर हाल बानसूर कोटपूतली बहरोड़ को अरेस्ट किया गया है। कनिष्ठ अभियंता संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 का एग्जाम दिसम्बर-2020 में हुई थी। एग्जाम में चीटिंग को लेकर जयपुर के सांगानेर थाने में साल-2020 में FIR दर्ज की गई थी। इसी परीक्षा के निरस्त होने के बाद सितम्बर-2021 को दोबारा कनिष्ठ अभियंता (सिविल) (डिग्रीधारक) संयुक्त भर्ती परीक्षा आयोजित की गई। एसओजी की ओर से पूर्व में गिरफ्तार पेपर लीक गैंग के मेंबर्स से पूछताछ में दोबारा हुई परीक्षा का पेपर लीक करना पता चला। एसओजी की ओर से जनवरी-2026 में FIR दर्ज कर जांच शुरू की गई। एसओजी ने पेपर लीक मामले में मास्टर माइंड जगदीश बिश्नोई, गणपत मालवाड़ा, अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा और भूपेन्द्र सारण सहित आरोपी गणपत लाल व सुरेश को अरेस्ट किया गया। एसओजी से पीछा छुड़ाकर भागा
एसओजी जांच में सामने आया कि पेपर लीक गिरोह की ओर से कैंडिडेट्स को लीक पेपर पढ़ाने के लिए सैमसंग टैबलेट एवं एप्पल आईपैड का यूज किया गया था। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खोज के दौरान एसओजी टीम एक अन्य कुख्यात आरोपी भीम सिंह तक पहुंच पाई। एसओजी की रडार पर होने का पता चलने पर आरोपी भीम सिंह फरार हो गया। एसओजी ने मुखबिर की सूचना पर दबिश देकर 17 अप्रैल को आरोपी भीम सिंह को दबिश देकर पकड़ा। कोचिंग व कम्प्यूटर लैब खोली
एसओजी की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी भीम सिंह और सह आरोपी भूपेन्द्र सारण पूर्व में आरपीएफ में साथ कार्यरत रहे हैं। जिससे दोनों के बीच आपसी संपर्क स्थापित हुआ। आरपीएफ से वीआरएस लेने के बाद आरोपी भीम सिंह ने बानसूर क्षेत्र में कोचिंग संस्थान खोला। जयपुर में ऑनलाइन परीक्षा के लिए कम्प्यूटर लैब भी संचालित की। आरोपी भीम सिंह मोबाइल की जगह पर टैबलेट डिवाइस का यूज करता था, जिससे एक साथ कई कैंडिडेट्स को प्रश्न-पत्र पढ़ाया जा सके। 25-30 लाख में पेपर का सौदा
आरोपी भीम सिंह ने अपने साथी गणपत मालवाड़ा और भूपेन्द्र सारण के साथ मिलकर कैंडिडेट्स को जयपुर में इकट्ठा किया। लीक प्रश्नपत्र को टैबलेट/आईपैड के जरिए पढ़ाकर परीक्षा में अवैध लाभ पहुंचाया। इसके बाद कैंडिडेट्स को उनके एग्जाम सेंटर्स तक भेजा गया। इसके एवज में प्रत्येक कैंडिडेट से 25 से 30 लाख रुपए लिए गए, जो गैंग के सभी मेंबर्स में डिवाइड होते थे। एसओजी की ओर से चीटिंग में यूज टैबलेट खुद की बेटी को देना पता चला, जिसे बरामद कर लिया गया। कई पेपर लीक में शामिल
एसओजी प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपी भीम सिंह पहले भी कई कॉम्पिटिशन एग्जामों के पेपर लीक में शामिल रहा है। जिसमें कनिष्ठ अभियंता भर्ती परीक्षा-2020, सीएचओ भर्ती परीक्षा-2020, राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा-2022, हाईकोर्ट एलडीसी भर्ती परीक्षा के पेपर लीक प्रकरण शामिल है। एसओजी की ओर से जांच की जा रही है कि पेपर लीक का स्त्रोत क्या था?, किन-किन लोगों के जरिए पेपर प्रसारित हुआ और किन-किन कैंडिडेट्स को फायदा पहुंचाया गया।


