होर्मुज के लिए पाक ने झोंकी पूरी ताकत: असीम मुनीर और शहबाज शरीफ के अहम दौरे खत्म, अब इस्लामाबाद में होगा फैसला?

होर्मुज के लिए पाक ने झोंकी पूरी ताकत: असीम मुनीर और शहबाज शरीफ के अहम दौरे खत्म, अब इस्लामाबाद में होगा फैसला?

Pakistan US-Iran Peace Initiative: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ते संकट के बीच पाकिस्तान ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के हालिया विदेश दौरे इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। अब इन दौरों के खत्म होने के बाद सबकी नजर इस्लामाबाद में संभावित अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी है।

तेहरान से तुर्किये तक कूटनीतिक दौड़

आसिम मुनीर ने तेहरान में तीन दिनों तक ईरान के शीर्ष नेतृत्व और शांति वार्ताकारों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया।

वहीं, शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब, कतर और तुर्किये का दौरा किया, जहां उन्होंने क्षेत्रीय नेताओं से मुलाकात कर शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश की। इन दौरों से साफ संकेत मिलता है कि पाकिस्तान खुद को इस पूरे संकट में एक अहम मध्यस्थ के रूप में स्थापित करना चाहता है।

क्या इस्लामाबाद बनेगा अगला वार्ता केंद्र?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच अगली दौर की बातचीत जल्द ही इस्लामाबाद में हो सकती है। इससे पहले भी दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क पाकिस्तान में हो चुके हैं, हालांकि कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था। अब एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही है कि पाकिस्तान की पहल से बातचीत को नई दिशा मिल सकती है।

होर्मुज बना सबसे बड़ा फ्लैशपॉइंट

इस पूरे घटनाक्रम के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तनाव का केंद्र बना हुआ है। ईरान द्वारा इस मार्ग पर नियंत्रण और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी के चलते हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं।

दुनिया के तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इस बीच, ईरान ने अमेरिका की नाकेबंदी का हवाला देते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर फिर से सख्त नियंत्रण लागू कर दिया है जिससे तनाव और बढ़ गया है।

अमेरिका की नजर भी पाकिस्तान पर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि पाकिस्तान में बातचीत की संभावना है। उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास जारी हैं। इससे यह साफ होता है कि अमेरिका भी इस समय पाकिस्तान को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंच के रूप में देख रहा है।

क्या इस्लामाबाद में बनेगी बात?

हालांकि अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन जिस तरह से पाकिस्तान ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ाई है उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में इस्लामाबाद वैश्विक राजनीति का केंद्र बन सकता है। अब देखना होगा कि क्या यह कूटनीतिक कोशिशें अमेरिका और ईरान के बीच किसी ठोस समझौते में बदल पाती हैं या फिर यह संकट और गहराता है।

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